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बच्चों को यौन शोषण से बचाने में मदद करेंगे ये पोस्टर, आप भी देखें

Sun, 23 Aug 2015 12:19 PM IST
Updated Sun, 23 Aug 2015 12:19 PM IST
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Posters to protect child abuse in delhi

दिल्ली सरकार ने बार फिर से पोस्टरों की नई श्रृंखला जारी की है जिस पर चर्चा शुरु हो गई है। हालांकि इस बार यह पोस्टर किसी राजनीतिक विरोधी पर निशाना साधने या आप सरकार की उपलब्धियों को बताने के लिए जारी नहीं किए गए हैं।

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असल में सरकार ने बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन शोषण से संबंधित तीन पोस्टरों की श्रृंखला जारी की है जिसका मकसद स्कूल जाने वाले बच्चों को जागरुक करना है।
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दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने इन पोस्टरों की 5000 प्रतियां दिल्ली के विभिन्न स्कूलों के लिए जारी किए हैं।

इन पोस्टरों में गुड टच और बैड टच में अंतर के साथ-साथ यह बताने की कोशिश की गई है कि बच्चे खुद को इस तरह की चीजों से कैसे बचा सकते हैं।

बच्चे जानेंगे किससे करें शिकायत

Posters to protect child abuse in delhi

साथ ही इन पोस्टरों की मदद से बच्चों को यह बताने की भी कोशिश की गई है कि ऐसी स्थिती सामने आने पर वह किससे इसकी शिकायत करें।

इस पोस्टरों के बारे में दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इनका मकसद ऐसी कार्यप्रणाली विकसित करना है जिससे बच्चों को इन परिस्थितियों से फंसने से बचाया जा सके।

बच्चों को ध्यान में रखकर बनाई गई इस पोस्टर श्रृंखला में रंगों, आसान भाषा और चित्रों का इस्तेमाल किया गया है ताकि वह संदेश को आसानी से समझ सकें।

सरकार के मुताबिक इन पोस्टरों की मदद से क्लास में टीचर बच्चों को इस बारे में आसानी से समझा सकेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों के साथ होने वाले 85% यौन अपराध में उन्हें जानने वाले लोग ही शामिल होते हैं जबकि इनमें से केवल 25% बच्चे ही इसकी शिकायत करते हैं।

क्यों खास हैं ये पोस्टर

Posters to protect child abuse in delhi

असल में यह कदम सरकार की उस सुरक्षा नीति का ही हिस्सा है जिसमें बच्चों, अभि‌भावकों और अध्यापकों को शामिल करते हुए तीनों की भागीदारी के साथ इसे आगे बढ़ाना है।

उदाहरण के लिए पांच से आठ साल के बच्चों के लिए जो प्रारूप तैयार किया गया है उसमें यौन शोषण को समझाने के साथ गुड टच और बैड टच को समझाने की कोशिश की गई है।

जबकि नौ से 12 साल के बच्चों के लिए ‌डिजाइन किए गए मॉड्यूल में जबरन किए जाने वाले यौन गतिविधियों, यौन शोषण से बचाव के बारे में बताया गया है।

वहीं 12 साल से 18 साल के बच्चों के लिए बनाए गए प्रारुप में इस बारे में विस्तार से बताते हुए कानूनी पक्षों और कानून में दिए गए अधिकारों के बारे में बताया गया है।

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