बच्चों को यौन शोषण से बचाने में मदद करेंगे ये पोस्टर, आप भी देखें
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दिल्ली सरकार ने बार फिर से पोस्टरों की नई श्रृंखला जारी की है जिस पर चर्चा शुरु हो गई है। हालांकि इस बार यह पोस्टर किसी राजनीतिक विरोधी पर निशाना साधने या आप सरकार की उपलब्धियों को बताने के लिए जारी नहीं किए गए हैं।
असल में सरकार ने बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन शोषण से संबंधित तीन पोस्टरों की श्रृंखला जारी की है जिसका मकसद स्कूल जाने वाले बच्चों को जागरुक करना है।
दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने इन पोस्टरों की 5000 प्रतियां दिल्ली के विभिन्न स्कूलों के लिए जारी किए हैं।
इन पोस्टरों में गुड टच और बैड टच में अंतर के साथ-साथ यह बताने की कोशिश की गई है कि बच्चे खुद को इस तरह की चीजों से कैसे बचा सकते हैं।
बच्चे जानेंगे किससे करें शिकायत
साथ ही इन पोस्टरों की मदद से बच्चों को यह बताने की भी कोशिश की गई है कि ऐसी स्थिती सामने आने पर वह किससे इसकी शिकायत करें।
इस पोस्टरों के बारे में दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इनका मकसद ऐसी कार्यप्रणाली विकसित करना है जिससे बच्चों को इन परिस्थितियों से फंसने से बचाया जा सके।
बच्चों को ध्यान में रखकर बनाई गई इस पोस्टर श्रृंखला में रंगों, आसान भाषा और चित्रों का इस्तेमाल किया गया है ताकि वह संदेश को आसानी से समझ सकें।
सरकार के मुताबिक इन पोस्टरों की मदद से क्लास में टीचर बच्चों को इस बारे में आसानी से समझा सकेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों के साथ होने वाले 85% यौन अपराध में उन्हें जानने वाले लोग ही शामिल होते हैं जबकि इनमें से केवल 25% बच्चे ही इसकी शिकायत करते हैं।
क्यों खास हैं ये पोस्टर
असल में यह कदम सरकार की उस सुरक्षा नीति का ही हिस्सा है जिसमें बच्चों, अभिभावकों और अध्यापकों को शामिल करते हुए तीनों की भागीदारी के साथ इसे आगे बढ़ाना है।
उदाहरण के लिए पांच से आठ साल के बच्चों के लिए जो प्रारूप तैयार किया गया है उसमें यौन शोषण को समझाने के साथ गुड टच और बैड टच को समझाने की कोशिश की गई है।
जबकि नौ से 12 साल के बच्चों के लिए डिजाइन किए गए मॉड्यूल में जबरन किए जाने वाले यौन गतिविधियों, यौन शोषण से बचाव के बारे में बताया गया है।
वहीं 12 साल से 18 साल के बच्चों के लिए बनाए गए प्रारुप में इस बारे में विस्तार से बताते हुए कानूनी पक्षों और कानून में दिए गए अधिकारों के बारे में बताया गया है।