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बेड से गिरने का डर, जमीन पर लेटने को मजबूर गर्भवती
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Sat, 02 May 2015 06:44 PM IST
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करीब तीन साल हो गए लेकिन सेक्टर- 24 स्थित ईएसआई अस्पताल में बेडों की संख्या में विस्तार नहीं हुआ है। 300 बेड पर चार गुना रोगी भर्ती हैं।
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शनिवार को अमर उजाला की टीम ने अस्पताल के वार्डों का जायजा लिया तो पाया कि पहली मंजिल स्थित महिला वार्ड में एक-एक बेड पर चार-चार महिला रोगी भर्ती थीं।
इसमें गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं, जो ऐसी स्थिति में बेड से गिर भी सकती हैं। यहीं वजह है कि कुछ गर्भवती अपनी और पेट में पल रहे बच्चे की जान को बचाने के लिए जमीन पर लेटने को मजबूर हैं। पेश है संवाददाता सौम्य मिश्र और फोटोग्राफर राजन राय की रिपोर्ट...
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ऐसा होता है वीआईपी के साथ सुलूक
ईएसआई के स्लोगन के मुताबिक आईपी यानि बीमित व्यक्ति को वीआईपी माना जाता है लेकिन कौन सा ऐसा वीआईपी होगा, जिसे भरे हुए बेड और जमीन पर लेटना पड़ता हो।
राज्य कर्मचारी बीमा निगम(ईएसआईसी) ने 15 हजार रुपये तक के वेतन पाने वाले लोगों से अच्छी स्वास्थ्य सेवा देने का वादा तो कर लिया और वेतन से बीमा किस्त की कटौती भी करता है लेकिन उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मुहैया करा पा रहा।
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लेट लतीफी की भेंट चढ़ी ओपीडी बिल्डिंग
ओपीडी बिल्डिंग के पुनर्निर्माण में लेट लतीफी का ढर्रा हावी है। जर्जर इस बिल्डिंग में पंजीकरण, ओपीडी, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जैसी सुविधाएं हैं।
इस बिल्डिंग में मरीजों, तीमारदारों और स्टाफ की जान के खतरे को ईएसआई मुख्यालय ने नजरंदाज कर रखा है। बिल्डिंग का पुनर्निर्माण कार्य अब तक पूरा हो जाना था लेकिन हाल में इस पर काम शुरू हुआ, जो इन दिनों रुका हुआ है।
इस बिल्डिंग में नई बिल्डिंग से इमरजेंसी सेवा शिफ्ट होनी है, जिससे वहां पर जगह हो सके। ब्लड बैंक जैसा अहम प्रोजेक्ट भी बिल्डिंग पर काम न होने के कारण रुका हुआ है।
मरीजों की तकलीफ
डायबिटीज से पीड़ित हूं। यहां एक-एक बेड पर चार-चार मरीज भर्ती हैं। पूरा दिन और रात बेड पर बैठे-बैठे गुजारनी पड़ती है। बुरा हाल है।- शर्मीला, निवासी पुरानी कोंडली
गर्भवती हूं लेकिन यहां एक ही बेड पर तीन मरीजों के साथ रहना पड़ रहा है। दिन में बेड पर बैठी रहती हूं और रात में गिरने के डर से जमीन पर चादर बिछाकर लेट जाती हूं।- इंदु, निवासी हरौला
बेड पर जगह नहीं मिलती। जमीन में ही लेटना पड़ता है। बहुत तकलीफ होती है। महिला विभाग में और बेड होने चाहिए, जिन्हें गैलरी में डाला जा सकता है।- सारो, निवासी खोड़ा
परिजनों से पटा पड़ा प्रतीक्षालय और गैलरी
मरीजों के साथ आए परिजनों से प्रतीक्षालय से लेकर गैलरी तक पटी पड़ी हुई है। भीड़ इस कदर है कि कई बार स्टाफ के लिए स्ट्रेचर और व्हीलचेयर लेकर निकलना मुश्किल हो जाता है।
अस्पताल में एसी ठप, मरीज-स्टाफ पसीने से लथपथ
ईएसआई अस्पताल का एसी ठप हो गया है। सेंट्रली एसी होने के कारण अस्पताल में हवा के आवागमन की कोई व्यवस्था नहीं है। गर्मी, पसीने और घुटन से मरीज और मेडिकल स्टाफ परेशान है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक तकनीकी दिक्कत के कारण एसी शनिवार को ठप हुआ है लेकिन मरीजों का कहना है कि एसी शुक्रवार से नहीं चल रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
दिल्ली और नोएडा छोड़कर गाजियाबाद, साहिबाबाद और आसपास के सभी ईएसआई अस्पताल प्रदेश सरकार के अंतर्गत आते हैं। वहां से बड़ी संख्या में रोगी नोएडा रेफर कर दिए जाते हैं। यहां पहले से ही रोगियों की भीड़ है और इंफ्रास्ट्रक्चर उस मुताबिक नहीं है। बेडों की संख्या तभी बढ़ सकती है, जब और स्थान उपलब्ध हो। मरीजों को वापस भी नहीं किया जा सकता है। ऐसे में बेडों पर ज्यादा मरीजों को जगह देनी पड़ती है। डॉ. प्रदीप खन्ना, उप चिकित्सा अधीक्षक