{"_id":"6747a3b0f14fc954050fcaf3","slug":"police-busted-fake-visa-racket-and-arrested-three-fraudsters-2024-11-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"फर्जी वीजा रैकेट का भंडाफोड़: ऑप्टोमेट्री डिप्लोमा और एमबीए डिग्री धारक लोगों से ठगी, तीन जालसाज गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फर्जी वीजा रैकेट का भंडाफोड़: ऑप्टोमेट्री डिप्लोमा और एमबीए डिग्री धारक लोगों से ठगी, तीन जालसाज गिरफ्तार
Thu, 28 Nov 2024 04:26 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Thu, 28 Nov 2024 04:26 AM IST
सार
इनके कब्जे से घोटाले में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और बैंक खाते बरामद बरामद किए गए हैं। इन्होंने विदेशी नौकरी चाहने वालों से बड़ी रकम वसूली। उन्हें विभिन्न देशों में नियुक्ति पत्र और वीजा देने का वादा किया।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अपराध शाखा ने फर्जी वीजा रैकेट का पर्दाफाश कर तीन जालसाजों चंदन बरनवाल, डॉ. आजाद प्रताप राव और रितेश तिवारी को गिरफ्तार किया है। सभी हट्टा, कुशीनगर के निवासी हैं। रितेश तिवारी एमबीए/बीबीए डिग्री होल्डर व डाॅ. आजाद प्रताप राव ने ऑप्टोमेट्री में डिप्लोमा किया हुआ है। आरोपी खुद को वीएफएस ग्लोबल का कर्मचारी बताते थे।
विज्ञापन
इनके कब्जे से घोटाले में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और बैंक खाते बरामद बरामद किए गए हैं। इन्होंने विदेशी नौकरी चाहने वालों से बड़ी रकम वसूली। उन्हें विभिन्न देशों में नियुक्ति पत्र और वीजा देने का वादा किया। अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संजय भटिया के अनुसार, वीजा, पासपोर्ट और काउंसलर सेवाओं के लिए आउटसोर्सिंग और प्रौद्योगिकी सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी वीएफएस ग्लोबल में सलाहकार आनंद सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि परवीन साहू और अजीत साहू ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए खुद को वीएफएस अधिकारी बताकर आवेदकों से बड़ी रकम के बदले जाली वीजा और नियुक्ति पत्र जारी किए।
विज्ञापन
ऑनलाइन प्रोफाइल में वीएफएस लोगो का दुरुपयोग किया और धोखाधड़ी वाले ईमेल आईडी के जरिए पीड़ितों से बात की। जांच में आरोपियों के 6 फेसबुक/जीमेल खातों का विवरण गूगल पर मिला। आईडी/ऑनलाइन सोशल मीडिया खातों के लिए विभिन्न लोगों के नाम पर कई सिम का इस्तेमाल किया था।
विज्ञापन
तकनीकी जांच में एक पीडि़त की पहचान आमिल शेख के रूप में हुई। पोलैंड के वीजा के लिए नियुक्ति पत्र के लिए उनसे 2.5 लाख रुपये की ठगी की गई। पुलिस ने कई ईमेल आईडी, फर्जी सिम कार्ड और वीएफएस रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इसके बाद गिरोह मास्टरमाइंड चंदन बरनवाल, जिसका फर्जी नाम परवीन साहू था, को छह नवंबर को यूपी से गिरफ्तार किया गया। चंदन बरनवाल ने खुलासे के बाद उसके साथी रितेश तिवारी और आजाद प्रताप राव को भी पकड़ लिया।
सोशल मीडिया का लिया सहारा
आरोपी ने खुद को वीएफएस अधिकारी दिखाने के लिए कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यानी फेसबुक/इंस्टाग्राम/लिंकडिन आदि का इस्तेमाल किया। वह सोशल मीडिया के माध्यम से वीजा नियुक्ति पत्र के लिए जरूरतमंद लोगों से संपर्क करते थे और उन्हें बताते थे कि वह हर श्रेणी के लिए वीजा नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे। मूल रूप से, वे उन लोगों को शिकार बनाते थे जिन्हें रोजगार वीजा की आवश्यकता होती थी। आरोपी लोगों को बहला-फुसलाकर अलग-अलग खातों में अच्छी रकम ट्रांसफर करवाते थे। इस पर वह पर्यटक/व्यावसायिक श्रेणी का वीजा नियुक्ति पत्र लेते थे और लव पीडीएफ एडिटर की मदद से उसे रोजगार श्रेणी में परिवर्तित कर देते थे।
आरोपी जालसाजों की प्रोफाइल और भूमिका
हट्टा, कुशीनगर निवासी रितेश गोरखपुर, यूपी से एमबीए/बीबीए डिग्री धारक भी है। वह पहले भीकाजी कामा पैलेस में इमिग्रेशन कंसल्टेंसी में लगी एक कंपनी में काम करता था। वह चंदन बरनवाल के साथ मिलकर सोशल मीडिया के जरिए पीडि़तों से संपर्क करता था और उन्हें ठगता था। वह इस घोटाले का मास्टरमाइंड है। हट्टा, कुशीनगर निवासी चंदन बरनवाल (26) कंप्यूटर का अच्छा ज्ञान रखता है। वह रितेश के साथ मुख्य साजिशकर्ता है। स्नातक डिग्री होल्डर डॉ. आज़ाद प्रताप राव (23) ऑप्टोमेट्री में डिप्लोमा धारक हैं और हट्टा में क्लिनिक भी चलाता था।