दिल्ली में होने वाला था बड़ा आतंकी हमला
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इंडियन मुजाहिद्दीन के संदिग्ध आतंकी तहसीन अख्तर उर्फ मोनू और पाकिस्तानी नागरिक वकास उर्फ जिया-उर-रहमान की लश्कर-ए-तइबा से मिलकर दिल्ली में एक और ब्लास्ट की योजना थी।
साल 2012 में पुणे ब्लास्ट के बाद आतंकियों को अगला टारगेट राजधानी दिल्ली थी। इस बात का खुलासा दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को अदालत को दी गई जानकारी में किया है।
लश्कर और इंडियन मुजाहिद्दीन ने संयुक्त रूप से पाकिस्तान व सऊदी अरब के जरिए भारत के विभिन्न शहरों में आतंकी वारदातों की योजना बनाई थी।
दिल्ली पहुंच चुके थे आतंकी
पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत के समक्ष पेश जांच अधिकारी ने बताया कि जांच में यह बात सामने आई है कि 2012 दिल्ली में ब्लास्ट की योजना पर फरार जैबुद्दीन उर्फ जैबी व फैयाज कागजी ने काम किया था।
उन्होंने दोनों आतंकियों का रिमांड मांगते हुए बताया कि इन्होंने माना है कि इंडियन मुजाहिद्दीन के मुखिया रियाज भटकल व फैयाज कागजी ने उन्हें दिल्ली में ब्लास्ट के लिए विस्फोटक पदार्थ का प्रबंध करने का निर्देश दिया था।
एक अगस्त 2012 को पुणे में सीरियल ब्लास्ट के बाद अगला टारगेट दिल्ली था। उन्होंने बताया कि दिल्ली में ब्लास्ट की योजना के तहत पुणे मॉड्यूल सदस्य दिल्ली पहुंचने शुरू हो गए थे, लेकिन कुछ सदस्यों के गिरफ्तार होने के कारण योजना को बदलना पड़ा।
एनआईए ने भी मांगा रिमांड
हालांकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने भी उनका रिमांड मांगते हुए तर्क रखा कि इन दोनों से हैदराबाद के दिलखुशनगर ब्लास्ट में पूछताछ करनी है। कोर्ट ने दिल्ली मामले को प्राथमिकता पर रखते हुए आतंकियों को दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया।
मोनू व वकास को गैरकानूनी हथियार फैक्टरी मामले में रिमांड पूरा होने के बाद पेश किया गया था। अदालत ने दोनों आतंकियों से पूछताछ के लिए उन्हें 20 दिन की रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया।
वहीं, आतंकी वकार अजहर, मोहम्मद महरूफ व साकिब अंसारी को भी चार दिन के रिमांड पर भेज दिया।