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Delhi NCR News: पीएफआई की याचिका पर होगी सुनवाई, हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के यूएपीए के तहत प्रतिबंध के खिलाफ याचिका को अनुमति दे दी है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेदेला की खंडपीठ ने केंद्र सरकार से इस याचिका पर जवाब मांगा है। केंद्र सरकार ने 28 सितंबर 2022 को पीएफआई को यूएपीए की धारा तीन के तहत गैरकानूनी संगठन घोषित करते हुए इस पर पांच साल का प्रतिबंध लगाया था।
केंद्र के प्रतिबंध में संगठन पर देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के लिए हानिकारक गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद, मार्च 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा की अध्यक्षता में एक यूएपीए ट्रिब्यूनल ने इस पांच साल के प्रतिबंध को बरकरार रखा था। पीएफआई ने इस आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
केंद्र सरकार ने तर्क दिया था कि यूएपीए ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देने वाली रिट याचिका भारत के संविधान के अनुच्छेद-226 और 227 के तहत सुनवाई योग्य नहीं है। हालांकि, पीएफआई के वकील ने कहा कि यूएपीए, 1967 की धारा 4(1) के तहत ट्रिब्यूनल द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई योग्य है। यह मामला अब केंद्र सरकार के जवाब के बाद आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के यूएपीए के तहत प्रतिबंध के खिलाफ याचिका को अनुमति दे दी है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेदेला की खंडपीठ ने केंद्र सरकार से इस याचिका पर जवाब मांगा है। केंद्र सरकार ने 28 सितंबर 2022 को पीएफआई को यूएपीए की धारा तीन के तहत गैरकानूनी संगठन घोषित करते हुए इस पर पांच साल का प्रतिबंध लगाया था।
केंद्र के प्रतिबंध में संगठन पर देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के लिए हानिकारक गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद, मार्च 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा की अध्यक्षता में एक यूएपीए ट्रिब्यूनल ने इस पांच साल के प्रतिबंध को बरकरार रखा था। पीएफआई ने इस आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
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केंद्र सरकार ने तर्क दिया था कि यूएपीए ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देने वाली रिट याचिका भारत के संविधान के अनुच्छेद-226 और 227 के तहत सुनवाई योग्य नहीं है। हालांकि, पीएफआई के वकील ने कहा कि यूएपीए, 1967 की धारा 4(1) के तहत ट्रिब्यूनल द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई योग्य है। यह मामला अब केंद्र सरकार के जवाब के बाद आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
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