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नोटबंदी के दौरान फर्जी खाता खुलवाकर जमा कराए थे 9 करोड़, फरारी के बाद अब गिरफ्तार

Sat, 26 Dec 2020 05:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 26 Dec 2020 05:35 AM IST
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person arrested for depositing 9 crore during demonetisation 
गिरफ्त में आरोपी... - फोटो : अमर उजाला।

नोटबंदी के दौरान फर्जी कागजातों से नौ बैंक खाते खुलवाकर नौ करोड़ रुपये का काला धन को जमा करने वाले आरोपी को आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ आयकर विभाग ने शाखा में शिकायत दर्ज करवायी थी। उसके बाद से आरोपी फरार था। 

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शाखा के संयुक्त आयुक्त डॉक्टर ओपी मिश्रा ने बताया कि आरोपी की पहचान नवीन शाहदरा निवासी गौरव सिंघल के रूप में हुई है। आयकर अधिकारी राजेश कुमार गुप्ता ने वर्ष 2018 में शाखा में शिकायत दर्ज करवायी। जिसमें बताया कि 9 नवंबर 2016 से 30 दिसंबर 2016 के बीच अलग अलग बैंक खातों में 9 करोड़ रुपये जमा किये गये हैं। सभी बैंक खाते फर्जी कागजात पर खुलवाये गये थे। 
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बैंकों से पूछताछ में पता चला कि खाताधारक विश्वास नगर के एक ही परिसर से व्यवसायिक गतिविधियां चला रहा है। केवाईसी दस्तावेजों की तस्वीरों से खातों के मालिक की पहचान गौरव सिंघल के रूप में हुई। आईटी अधिनियम के तहत उससे पूछताछ की गयी, जिसमें उसने बताया कि फर्जी पेन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र से खाते खुलवाये नोटबंदी के दौरान उसमें काला धन डलवाये। 
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आयकर अधिकारी की शिकायत पर शाखा की टीम जांच शुरू की। जांच में पता चला कि बैंक खाते योगेश जैन और राहुल जैन के नाम से खुलवाये गये थे। जिसपर गौरव सिंघल ने अपने फोटोग्राफ लगाये थे और उसमें अपने फोन नंबर दिये थे। खाते से ज्यादातर पैसे मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग से निकाले गये थे। 

जांच में पता चला कि नोटबंदी के दौरान काला धन को रखने के लिए फर्जी नाम और पते से खाते खुलवाये गये। मामला दर्ज होने के बाद गौरव सिंघल फरार हो गया। निरीक्षक अमित चौधरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने उसकी तलाश में यमुनापार, रोहिणी और नोएडा में दबिश दी। इस बीच पुलिस को पता चला कि आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने घर के पास ही किसी पीजी में रह रहा है। इस सूचना पर पुलिस टीम ने 24 दिसंबर को नवीन शाहदरा से उसे गिरफ्तार कर लिया। 


पूछताछ में पता चला कि वह दसवीं तक पढ़ा है। उसके बाद एक केबल कंपनी में सुपरवाइजर की नौकरी करने लगा। यहां उसकी मुलाकात कई सप्लायर से हुई। जिससे उसने जीएसटी और वैट में फायदे के लिए फर्जी बिल बनाना सीख लिया। नोटबंदी के दौरान लोगों के काला धन को छुपाने के लिए उसने फर्जी खाते खोले। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। 

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