आज हमारी आजादी फिर लेगी हजारों जानें!
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पंख फैलाए खुले आसमान में गोता लगा रहे परिंदे हमें आजादी का अहसास दिलाते हैं, मगर आम लोगों का आजादी का जश्न इन बेजुबानों की जिंदगी खतरे में डाल रहा है। हम शौक से पतंग उड़ाते हैं और ये बेचारे मारे जाते हैं। 15 अगस्त के आसपास हर साल हजारों पक्षी पतंग के मांझे से घायल होते हैं।
यह बात कितनी गंभीर है इसका अंदाजा आप इस तथ्य से लगा सकते हैं। बीते साल 2500 से ज्यादा जख्मी पक्षी उत्तर-पूर्वी दिल्ली के विजयानंद सूरी जैन धर्मार्थ पक्षी अस्पताल में लाए गए। ये परिंदे भी वो हैं, जिन्हें कोई भला आदमी अस्पताल तक पहुंचा देता है। पूरे एनसीआर में कितने पक्षी घायल होते होंगे इसकी कोई गिनती नहीं है।
हड्डियां तक काट देता है पैना चीनी मांझा
अस्पताल के मैनेजर अशोक शर्मा ने बताया कि जो पक्षी लाए गए थे, उनमें से आधे तो ठीक हो गए, मगर बाकी अपंग हो गए। अब ये परिंदे अस्पताल में ही उड़ने की नाकाम कोशिश में पंख फड़फड़ाते रहते हैं। जो ठीक हो जाते हैं, उन्हें दिल्ली से बाहर बगीचों या जंगलों के आसपास छोड़ दिया जाता है।
यहां के सीनियर डॉक्टर अमिताभ देव और डॉक्टर रामेश्वर यादव की गुजारिश है कि पतंग उड़ाने से पहले एक बार परिंदों का ख्याल अपने मन में जरूर लाएं। उन्होंने लगे हाथ यह भी कहा कि सीलिंग या एग्जॉस्ट फैन चालू करते वक्त भी निगाह दौड़ा लें कि आसपास कोई परिंदा तो नहीं बैठा है।
नवीन शाहदरा के जैन धर्मार्थ पक्षी अस्पताल के मैनेजर अशोक शर्मा आजादी के मौके पर लोगों से अपील करना चाहता हूं कि अपने बच्चों को पतंग उड़ाने से रोकें। चीनी मांझे का इस्तेमाल तो कतई न करें। ये इतने तेज होते हैं कि पक्षियों की हड्डी तक कट जाती है।