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चिंता: रील्स के चक्कर में पलकें झपकाना तक भूल रहे लोग, आंखों में भेंगापन आने, ड्राई आई, मायोपिया का खतरा बढ़ा
Wed, 02 Apr 2025 03:52 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 02 Apr 2025 03:52 PM IST
सार
इन दिनों सोशल मीडिया पर बच्चों हो या नौजवान या फिर युवा सभी रील्स देखने का शौक रखते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताना आपकी सेहत पर बुरा असर डालती हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि रील विजन सिंड्रोम गंभीर महामारी बन जाए, इससे पहले सभी आयुवर्ग के लोगों को आंखों की सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Adobestock
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विस्तार
सोशल मीडिया पर रील्स देखने की बीमारी मानसिक सेहत के साथ आंखों को भी बेहद नुकसान पहुंचा रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार, स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने के कारण पलक झपकाने की दर 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है, जिससे ड्राई-आई सिंड्रोम के अलावा निकट व दूर की वस्तुओं के बीच फोकस बदलने में कठिनाई जैसे नेत्र विकार बढ़े हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि रील विजन सिंड्रोम गंभीर महामारी बन जाए, इससे पहले सभी आयुवर्ग के लोगों को आंखों की सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है। एशिया पैसिफिक एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी (एपीएओ) और ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी ने साझे तौर पर इस समस्या और इसके उपायों पर मंथन किया।
एपीएओ 2025 कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. ललित वर्मा ने बताया कि अत्यधिक स्क्रीन एक्सपोजर के कारण डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या महामारी की तरफ बढ़ रही है। घंटों रील्स देखने वाले बच्चों में भेंगापन की समस्या दिख रही है।
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उन्होंने बताया, हाल में एक छात्र लगातार आंखों में जलन और धुंधली दृष्टि की शिकायत लेकर आया। जांच में पता चला कि लंबे समय तक स्क्रीन पर नजरें टिकाए रहने के कारण उसकी आंखों से पर्याप्त आंसू नहीं निकल रहे थे।
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विशेषज्ञों का कहना है कि रील विजन सिंड्रोम गंभीर महामारी बन जाए, इससे पहले सभी आयुवर्ग के लोगों को आंखों की सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है। एशिया पैसिफिक एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी (एपीएओ) और ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी ने साझे तौर पर इस समस्या और इसके उपायों पर मंथन किया।
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एपीएओ 2025 कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. ललित वर्मा ने बताया कि अत्यधिक स्क्रीन एक्सपोजर के कारण डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या महामारी की तरफ बढ़ रही है। घंटों रील्स देखने वाले बच्चों में भेंगापन की समस्या दिख रही है।
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उन्होंने बताया, हाल में एक छात्र लगातार आंखों में जलन और धुंधली दृष्टि की शिकायत लेकर आया। जांच में पता चला कि लंबे समय तक स्क्रीन पर नजरें टिकाए रहने के कारण उसकी आंखों से पर्याप्त आंसू नहीं निकल रहे थे।
वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. समर बसाक के मुताबिक, लोग रील देखने में इतने लीन हो जाते हैं कि असली दुनिया से एकदम कट जाते हैं। न उनका पढ़ाई-लिखाई में मन लगता, न ही अपने कामकाज में।
2050 तक दुनिया की 50 फीसदी आबादी होगी मायोपिया की शिकार
ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. हरबंश लाल ने बताया, अब हम 30 साल की उम्र तक चश्मे के नंबर में उतार-चढ़ाव देख रहे हैं, कुछ दशक पहले यह 21 साल था। हालिया अध्ययनों की मानें तो 2050 तक दुनिया की 50% आबादी मायोपिया की शिकार होगी।
ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. हरबंश लाल ने बताया, अब हम 30 साल की उम्र तक चश्मे के नंबर में उतार-चढ़ाव देख रहे हैं, कुछ दशक पहले यह 21 साल था। हालिया अध्ययनों की मानें तो 2050 तक दुनिया की 50% आबादी मायोपिया की शिकार होगी।
20 मिनट पर 20 सेकंड का ब्रेक
डॉक्टर आंखों के तनाव के मामले में 20-20-20 नियम के पालन की सलाह दे रहे हैं। इसके मायने हैं, हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लेना और 20 फीट दूर किसी चीज को देखना। आंखों के लगातार नीली रोशनी के संपर्क में रहने से बच्चों, युवाओं को अक्सर सिरदर्द, माइग्रेन व नींद संबंधी विकारों से जूझना पड़ रहा है।
डॉक्टर आंखों के तनाव के मामले में 20-20-20 नियम के पालन की सलाह दे रहे हैं। इसके मायने हैं, हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लेना और 20 फीट दूर किसी चीज को देखना। आंखों के लगातार नीली रोशनी के संपर्क में रहने से बच्चों, युवाओं को अक्सर सिरदर्द, माइग्रेन व नींद संबंधी विकारों से जूझना पड़ रहा है।
बार-बार पलकें झपकाएं, स्क्रीन टाइम घटाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि आंखों की सेहत के लिए स्क्रीन देखते समय बार-बार पलक झपकाने का प्रयास करना, स्क्रीन टाइम घटाना व नियमित स्क्रीन ब्रेक जैसी कोशिशों से फायदा हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आंखों की सेहत के लिए स्क्रीन देखते समय बार-बार पलक झपकाने का प्रयास करना, स्क्रीन टाइम घटाना व नियमित स्क्रीन ब्रेक जैसी कोशिशों से फायदा हो सकता है।