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पतंजलि की मदद नहीं कर रही योगी सरकार, ग्रेटर नोएडा फूड पार्क से बाबा रामदेव ने खींचा हाथ

Wed, 06 Jun 2018 09:41 AM IST
शिशिर चौरसिया/अमर उजाला, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 06 Jun 2018 09:41 AM IST
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patanjali to planned food park to shift from uttar pradesh

केंद्र सरकार ने बाबा रामदेव के नेतृत्व वाली पतंजलि के ग्रेटर नोएडा के पास प्रस्तावित मेगा फूड पार्क की सैद्धांतिक अनुमति (इन प्रिंसिपल अप्रूवल) को रद्द करने के लिए नोटिस भेजा है। यदि कंपनी की तरफ से उचित जवाब नहीं मिलता है, तो उसे मिली सैद्धांतिक अनुमति अगले महीने रद्द भी हो सकती है।

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इस पर हालांकि अपनी ओर से खुलासे में पतंजलि आयुर्वेद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आचार्य बालकृष्ण ने अमर उजाला को बताया कि इस परियोजना में उत्तर प्रदेश सरकार का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। इस वजह से उन्होंने इस परियोजना को किसी और राज्य में ले जाने का मन बनाया है।
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बालकृष्ण का कहना है कि ग्रेटर नोएडा के पास करीब 450 एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना में करीब 6,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित था। इसके शुरू होने पर दसियों हजार युवाओं को तो रोजगार मिलता ही, आसपास के हजारों किसानों को भी लाभ होता।

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दो और फूड पार्क को भी नोटिस

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केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि पतंजलि के ग्रेटर नोएडा मेगा फूड पार्क सहित उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित तीन फूड पार्क के प्रवर्तकों को नोटिस जारी किया गया है।

इनमें ग्रेटर नोएडा के पास यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे मेगा फूड पार्क विकसित करने वाली कंपनी पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क नोएडा प्राइवेट लिमिटेड, मथुरा के गांव भदावल, तहसील छाता में मेगा फूड पार्क विकसित करने वाली कंपनी ओवरसीज इंफ्रा अलायंस फूड पार्क और मिर्जापुर के बेदौली, तालुका कलवारी माफी में मेगा फूड पार्क विकसित करने वाली कंपनी विंध्याचल अटिवो फूड पार्क प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। 


इनमें से मिर्जापुर और मथुरा के फूड पार्क को बीते साल दिसंबर में, जबकि बाबा रामदेव की कंपनी को इस साल जनवरी में सरकार की तरफ से इन प्रिंसिपल अप्रूवल मिला था। अधिकारी ने कहा कि इन्होंने तय समय में जमीन का टाइटल पेश नहीं किया और परियोजना के लिए फाइनेंशियल क्लोजर नहीं कर सके।

इसके बाद इन्हें एक पखवाड़े पहले ही नोटस भेज दिया गया है। उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए नियमानुसार समय दिया गया है और यदि इनके जवाब से मंत्रालय संतुष्ट नहीं होता है, तो जुलाई में इनका अप्रूवल रद्द कर दिया जाएगा।

अभी तक पेश नहीं किया जमीन का टाइटल

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अधिकारी के मुताबिक, बाबा रामदेव की कंपनी सहित उत्तर प्रदेश में फूड पार्क बनाने वाली अन्य कंपनियों ने अभी तक जमीन का टाइटल (कंपनी के नाम जमीन होने के कागजात) पेश नहीं किए हैं।

यही नहीं, इन्होंने किसी बैंक से परियोजना के वित्त पोषण या फाइनेंशियल क्लोजर के लिए अभी तक करार करने की भी सूचना नहीं दी है। जब तक कोई बैंक या वित्तीय संस्थान इसके वित्त पोषण के लिए तैयार नहीं होगा, सरकार फाइनल अप्रूवल दे ही नहीं सकती।

सरकार से मिलेगी 50 फीसदी सब्सिडी
ग्रेटर नोएडा, मथुरा और मिर्जापुर में प्रस्तावित फूड पार्कों के विकास के लिए सरकार कुल परियोजना लागत की 50 फीसदी राशि सब्सिडी के रूप में देगी। कुल परियोजना लागत में 30 फीसदी राशि का इंतजाम किसी बैंक या वित्तीय संस्थान से करना होगा, जबकि 20 फीसदी राशि का निवेश प्रवर्तक कंपनी को करना होगा।

पतंजलि फूड पार्क में 2,000 करोड़ का निवेश
बाबा रामदेव ने अमर उजाला से बातचीत में पिछले दिनों बताया था कि उनके ग्रेटर नोएडा के मेगा फूड पार्क में रोज 250 टन बिस्कुट, 750 टन आटा और करीब 1,000 टन सरसों तेल का उत्पादन होगा। इस फूड पार्क से न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में सामानों की आपूर्ति हो सकेगी बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के कुछ इलाकों में भी आपूर्ति होगी।

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