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Nuh News: लंपी वायरस का कहर... ग्रामीण बोले पशु मर रहे, विभाग बोला सब नियंत्रण में
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नूंह में गोपालकों की बढ़ी चिंता, आरोप-बीमारी फैलने के बावजूद सरकारी पशु अस्पतालों में समय पर दवाइयां नहीं मिल रहीं
रिजवान खान
नूंह। जिले में गोवंश के बीच लंपी वायरस का खतरा गोपालकों की चिंता बढ़ा रहा है। बीमारी की चपेट में आने वाले पशुओं की हालत देखकर पशुपालक भयभीत हैं। ढाडोला, घासेड़ा और ढाडोली गांव में गोपालकों ने कई गोवंशों के संक्रमित होने और कुछ के मरने के दावे किए हैं। वहीं, पशुपालन विभाग का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और वायरस से कोई गोवंश नहीं मरा है।
गोपालकों का आरोप है कि बीमारी फैलने के बावजूद सरकारी पशु अस्पतालों में उन्हें समय पर दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। मजबूरी में बाजार से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए लगातार महंगा इलाज कराना मुश्किल हो रहा है।
विभाग के अनुसार, जिले में 10 पंजीकृत और दो बिना पंजीकरण के संचालित गोशालाएं हैं। इनमें करीब पांच हजार गोवंश हैं। इन्हें मिलाकर जिले में कुल 40,903 गोवंश बताए गए हैं।
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डिप्टी डायरेक्टर वीरेंद्र सिंह के अनुसार जिले के 20-21 अस्पतालों के अंतर्गत 98 गोवंश लंपी वायरस की चपेट में आए हैं। इनमें से 55 गोवंश ठीक हो चुके हैं। विभाग का दावा है कि वायरस के कारण कोई गोवंश नहीं मरा है। गोवंश को बीमारी से बचाने के लिए पहले ही वैक्सीनेशन कराया जा चुका है।
पड़ताल में सामने आई अलग तस्वीर
बुधवार को गांवों में की गई पड़ताल के दौरान गोपालकों ने विभागीय दावों से अलग स्थिति बताई। ढाडोला गांव में गोपालकों ने बताया कि कई पशु लंपी वायरस की चपेट में हैं। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल से समय पर दवा नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी दुकानों से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
ढाडोला में 40 गोवंश में एक के मरने का दावा
ढाडोला निवासी हसन ने बताया कि उनके पास करीब 40 गोवंश हैं। लंपी वायरस के कारण एक गोवंश मर चुका है, जबकि दो की हालत बेहद खराब है। करीब पांच अन्य गोवंश भी बीमारी की चपेट में हैं। हसन ने कहा कि गोवंश हमारे लिए परिवार की तरह हैं। एक पशु के मरने से दुख हुआ है। अगर समय पर डॉक्टर और दवा मिल जाए तो शायद पशुओं को बचाया जा सकता है।”
घासेड़ा में दो गोवंशों के मरने का दावा
घासेड़ा निवासी अब्दुल रज्जाक ने बताया कि उनके पास 20 गोवंश हैं। इनमें कई पशु बीमारी की चपेट में हैं और उनके अनुसार दो गोवंश मर चुके हैं। अब्दुल रज्जाक ने कहा कि बीमारी के समय सरकारी अस्पताल से दवा नहीं मिलती तो बाहर से खरीदनी पड़ती है। हर बार महंगी दवा खरीदना गरीब पशुपालक के लिए आसान नहीं है।
ढाडोली में भी दो गोवंश संक्रमित
ढाडोली निवासी अरशद ने बताया कि उनके पास करीब 45 गोवंश हैं, जिनमें से दो लंपी वायरस की चपेट में हैं। उन्होंने गांवों में पशु चिकित्सकों की नियमित टीम भेजने और संक्रमित पशुओं की निगरानी बढ़ाने की मांग की।
क्या है लंपी वायरस
लंपी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय को प्रभावित करती है। यह बीमारी त्वचा पर गांठों और अन्य लक्षणों के कारण पहचानी जाती है। बीमारी से दूध उत्पादन कम हो सकता है, पशु कमजोर हो सकता है और गंभीर मामलों में मर भी सकरा है। यह बीमारी इंसानों में नहीं फैलती।
बीमारी के प्रमुख लक्षण
- पशु को तेज बुखार आना।
- शरीर पर कठोर गांठें या उभरे हुए दाने निकलना।
- सिर, गर्दन, पैर, थन और शरीर के अन्य हिस्सों पर गांठें दिखाई देना।
- लिम्फ नोड्स में सूजन।
- आंख और नाक से स्राव आना।
- पैरों या शरीर में सूजन।
- भूख कम होना और कमजोरी।
- दूध उत्पादन में अचानक कमी।
- गंभीर स्थिति में पशु की हालत लगातार बिगड़ना।
बचाव के लिए यह करें
विभाग की सलाह के अनुसार पशुओं का टीकाकरण कराएं और टीकाकरण अभियान में सहयोग करें।
जिस पशु में लंपी के लक्षण दिखाई दें, उसे स्वस्थ पशुओं से अलग रखना संक्रमण का खतरा कम करने में मदद कर सकता है।
पशुओं के आसपास सफाई रखें। पानी जमा न होने दें और मक्खी-मच्छर की संख्या कम करने के उपाय करें।
संक्रमित पशु को दूसरे गांव या पशु बाजार में ले जाने से बचें। संक्रमित पशुओं की आवाजाही बीमारी के प्रसार का जोखिम बढ़ा सकती है।
बाहर से खरीदे गए या दूसरे स्थान से लाए गए पशु को तुरंत झुंड में शामिल करने के बजाय पशु चिकित्सक की सलाह लें।
फोटो - बीमारी से ग्रस्त गो वंश
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रिजवान खान
नूंह। जिले में गोवंश के बीच लंपी वायरस का खतरा गोपालकों की चिंता बढ़ा रहा है। बीमारी की चपेट में आने वाले पशुओं की हालत देखकर पशुपालक भयभीत हैं। ढाडोला, घासेड़ा और ढाडोली गांव में गोपालकों ने कई गोवंशों के संक्रमित होने और कुछ के मरने के दावे किए हैं। वहीं, पशुपालन विभाग का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और वायरस से कोई गोवंश नहीं मरा है।
गोपालकों का आरोप है कि बीमारी फैलने के बावजूद सरकारी पशु अस्पतालों में उन्हें समय पर दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। मजबूरी में बाजार से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए लगातार महंगा इलाज कराना मुश्किल हो रहा है।
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विभाग के अनुसार, जिले में 10 पंजीकृत और दो बिना पंजीकरण के संचालित गोशालाएं हैं। इनमें करीब पांच हजार गोवंश हैं। इन्हें मिलाकर जिले में कुल 40,903 गोवंश बताए गए हैं।
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डिप्टी डायरेक्टर वीरेंद्र सिंह के अनुसार जिले के 20-21 अस्पतालों के अंतर्गत 98 गोवंश लंपी वायरस की चपेट में आए हैं। इनमें से 55 गोवंश ठीक हो चुके हैं। विभाग का दावा है कि वायरस के कारण कोई गोवंश नहीं मरा है। गोवंश को बीमारी से बचाने के लिए पहले ही वैक्सीनेशन कराया जा चुका है।
पड़ताल में सामने आई अलग तस्वीर
बुधवार को गांवों में की गई पड़ताल के दौरान गोपालकों ने विभागीय दावों से अलग स्थिति बताई। ढाडोला गांव में गोपालकों ने बताया कि कई पशु लंपी वायरस की चपेट में हैं। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल से समय पर दवा नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी दुकानों से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
ढाडोला में 40 गोवंश में एक के मरने का दावा
ढाडोला निवासी हसन ने बताया कि उनके पास करीब 40 गोवंश हैं। लंपी वायरस के कारण एक गोवंश मर चुका है, जबकि दो की हालत बेहद खराब है। करीब पांच अन्य गोवंश भी बीमारी की चपेट में हैं। हसन ने कहा कि गोवंश हमारे लिए परिवार की तरह हैं। एक पशु के मरने से दुख हुआ है। अगर समय पर डॉक्टर और दवा मिल जाए तो शायद पशुओं को बचाया जा सकता है।”
घासेड़ा में दो गोवंशों के मरने का दावा
घासेड़ा निवासी अब्दुल रज्जाक ने बताया कि उनके पास 20 गोवंश हैं। इनमें कई पशु बीमारी की चपेट में हैं और उनके अनुसार दो गोवंश मर चुके हैं। अब्दुल रज्जाक ने कहा कि बीमारी के समय सरकारी अस्पताल से दवा नहीं मिलती तो बाहर से खरीदनी पड़ती है। हर बार महंगी दवा खरीदना गरीब पशुपालक के लिए आसान नहीं है।
ढाडोली में भी दो गोवंश संक्रमित
ढाडोली निवासी अरशद ने बताया कि उनके पास करीब 45 गोवंश हैं, जिनमें से दो लंपी वायरस की चपेट में हैं। उन्होंने गांवों में पशु चिकित्सकों की नियमित टीम भेजने और संक्रमित पशुओं की निगरानी बढ़ाने की मांग की।
क्या है लंपी वायरस
लंपी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय को प्रभावित करती है। यह बीमारी त्वचा पर गांठों और अन्य लक्षणों के कारण पहचानी जाती है। बीमारी से दूध उत्पादन कम हो सकता है, पशु कमजोर हो सकता है और गंभीर मामलों में मर भी सकरा है। यह बीमारी इंसानों में नहीं फैलती।
बीमारी के प्रमुख लक्षण
- पशु को तेज बुखार आना।
- शरीर पर कठोर गांठें या उभरे हुए दाने निकलना।
- सिर, गर्दन, पैर, थन और शरीर के अन्य हिस्सों पर गांठें दिखाई देना।
- लिम्फ नोड्स में सूजन।
- आंख और नाक से स्राव आना।
- पैरों या शरीर में सूजन।
- भूख कम होना और कमजोरी।
- दूध उत्पादन में अचानक कमी।
- गंभीर स्थिति में पशु की हालत लगातार बिगड़ना।
बचाव के लिए यह करें
विभाग की सलाह के अनुसार पशुओं का टीकाकरण कराएं और टीकाकरण अभियान में सहयोग करें।
जिस पशु में लंपी के लक्षण दिखाई दें, उसे स्वस्थ पशुओं से अलग रखना संक्रमण का खतरा कम करने में मदद कर सकता है।
पशुओं के आसपास सफाई रखें। पानी जमा न होने दें और मक्खी-मच्छर की संख्या कम करने के उपाय करें।
संक्रमित पशु को दूसरे गांव या पशु बाजार में ले जाने से बचें। संक्रमित पशुओं की आवाजाही बीमारी के प्रसार का जोखिम बढ़ा सकती है।
बाहर से खरीदे गए या दूसरे स्थान से लाए गए पशु को तुरंत झुंड में शामिल करने के बजाय पशु चिकित्सक की सलाह लें।
फोटो - बीमारी से ग्रस्त गो वंश