Delhi: अब विधानसभा और उपराज्यपाल के बीच तकरार, एलजी पर विधानसभा के कामकाज में हस्तक्षेप करने का आरोप
उपराज्यपाल सचिवालय ने केंद्र सरकार के पूर्ण सहयोग और फंडिंग के बावजूद भी विधानसभा को कागज रहित नहीं करने और इसके डिजिटलीकरण के प्रयासों में देरी होने का दावा किया है, जबकि उसका दावा पूरी तरह से गलत और तथ्यों के विपरीत है।
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दिल्ली सरकार के बाद अब दिल्ली विधानसभा और उपराज्यपाल सचिवालय के बीच ठन गई है। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने आरोप लगाया कि उपराज्यपाल सचिवालय अधिकारियों के माध्यम से विधानसभा के कामकाज में हस्तक्षेप कर रहा है। उपराज्यपाल सचिवालय ने केंद्र सरकार के पूर्ण सहयोग और फंडिंग के बावजूद भी विधानसभा को कागज रहित नहीं करने और इसके डिजिटलीकरण के प्रयासों में देरी होने का दावा किया है, जबकि उसका दावा पूरी तरह से गलत और तथ्यों के विपरीत है।
रामनिवास गोयल ने सोमवार को विधानसभा परिसर में संवाददाता सम्मेलन में बताया कि विधानसभा के डिजिटलीकरण प्रोजेक्ट की प्रक्रिया वर्ष 2015 में शुरू की थी। विधानसभा की सामान्य प्रयोजन समिति की एक उपसमिति ने 8 अक्तूबर 2015 को ई-विधान को लागू करने का अध्ययन करने के लिए हिमाचल प्रदेश का दौरा किया। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने अपनी एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट 16 अक्तूबर 2015 को केंद्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भेजी। मगर वर्ष 2018 में यह प्रोजेक्ट केंद्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से संसदीय कार्य मंत्रालय को सौंप दिया।
इसके बाद 26 फवरी 2018 को एक संशोधित प्रोजेक्ट रिपोर्ट संसदीय कार्य मंत्रालय को सौंप दी गई और तीन साल की कवायद के बावजूद केन्द्र सरकार ने दिल्ली विधान सभा को ई-विधान प्रोजेक्ट चालू करने के लिए इजाजत नहीं दी। उन्होंने बताया कि विधानसभाओं को फंड जारी करने में हो रही देरी को देखते हुए दिल्ली विधानसभा की सामान्य प्रयोजन समिति ने पांच नवम्बर 2018 को सिफारिश की कि डिजिटलीकरण को हमारे अपने सोर्सेज से लागू किया जाना चाहिए।
कमेटी की रिपोर्ट को दिल्ली विधानसभा ने 27 जनवरी 2019 को स्वीकार किया। वहीं दिल्ली सरकार इस फैसले पर सहमत हो गई और दिल्ली विधानसभा को इस प्रोजेक्ट के लिए वर्ष 2019-20 में 20 करोड़ का फंड आवंटित कर दिया गया। हालांकि, कोविड-19 के कारण टेंडर जारी नहीं हो सका, मगर कोविड के पश्चात विधानसभा सचिवालय ने दिसंबर 2022 में टेंडर की प्रक्रिया आरंभ कर दी, मगर दिल्ली सरकार के वित्त सचिव ने इस योजना में अड़ंगा लगा दिया। इस कारण यह योजना पूरी नहीं हो सकी।