ISI भारत पर न करे हमला इसलिए नहीं दी इजाजत
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इराक व सीरिया में पवित्र धार्मिक स्थलों को आतंकी संगठन आईएसआईएस से बचाने के लिए भारतीय धार्मिक संस्था के सदस्यों को जाने की इजाजत दी गई तो यह सीधा सांप्रदायिक संघर्ष का परिणाम बन सकता है।
इतना ही नहीं आईएसआईएस भारत में हमले तक कर सकता है। केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी। हाईकोर्ट के समक्ष गृह मंत्रालय ने पेश जवाब में कहा कि किसी भी संप्रदाय के व्यक्तियों को इराक या सीरिया में संघर्ष में भाग लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
यदि ऐसी इजाजत दी गई तो यह सीधे अन्य देश के मामलों में हस्तक्षेप होगा। इतना ही नहीं इस का सीधा परिणाम भारत में होगा। मंत्रालय ने कहा कि अंजुमन-ए-हैदरी नामक संगठन के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को इराक जाने की अनुमति इसी कारण नहीं दी गई थी।
गृहमंत्रालय ने भी तर्क दिया
उन्होंने कहा कि इस प्रतिनिधिमंडल के जाने का मुख्य उद्देश्य इराक में पवित्र धार्मिक स्थलों की रक्षा के लिए पंजीकृत स्वयंसेवकों को भेजने के तौर-तरीकों पर चर्चा करना था।
मंत्रालय ने यह जवाब अधिवक्ता महमूद प्राचा की उस याचिका पर दायर किया है जिसमें उसने अपने खिलाफ जारी लुक आउट नोटिस को चुनौती दी है।
उन्होंने कहा कि था कि वे इराक व सीरिया में आईएसआईएस की गतिविधियों को रोकने के लिए राहत कार्य के लिए जाना चाहते हैं।