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Noida News: नशे के साथ अवसाद के जाल में फंस रहे युवा, करा रहे उपचार
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- हर माह जिम्स में 25 से 30 विद्यार्थी इलाज के लिए पहुंच रहे, कई कारण जिम्मेदार
नितेश कुमार
ग्रेटर नोएडा। नशे की बढ़ती लत युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रही है। नशे की गिरफ्त में आने वाले विद्यार्थियों में धीरे-धीरे अवसाद, चिड़चिड़ापन, अकेलापन और पढ़ाई के प्रति रुचि कम होने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के मनोरोग विभाग में हर माह 25 से 30 ऐसे विद्यार्थी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनकी उम्र करीब 20 से 25 वर्ष है। चिकित्सकों के मुताबिक पढ़ाई का दबाव, करियर को लेकर चिंता, पारिवारिक तनाव, अकेलापन और दोस्तों का दबाव युवाओं को नशे की ओर धकेलने वाले प्रमुख कारण हैं। शुरुआत में कई विद्यार्थी तनाव कम करने या दोस्तों के कहने पर प्रयोग के तौर पर नशा शुरू करते हैं। धीरे-धीरे यह आदत बढ़ती जाती है और युवा मानसिक व शारीरिक रूप से नशे पर निर्भर होने लगता है।
जिम्स के मनोरोग विभाग के लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. (प्रो.) अभिषेक भारती ने बताया कि नशे का असर खत्म होने के बाद कई युवाओं में बेचैनी, उदासी, नींद की समस्या और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। पढ़ाई में मन नहीं लगता और परिवार व दोस्तों से दूरी बनने लगती है। मानसिक परेशानी बढ़ने पर नशे की मात्रा भी बढ़ सकती है। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी के कारण युवा शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। लगातार उदासी, नींद में बदलाव, भूख कम या अधिक लगना, किसी काम में मन नहीं लगना और लोगों से दूरी बनाना अवसाद के संकेत हो सकते हैं।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों में भी बढ़ रहा अवसाद
डॉ. भारती के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य की समस्या केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं है। आर्थिक तंगी, तनाव और सामाजिक दूरी जैसी परिस्थितियां भी अवसाद का कारण बन रही हैं। विद्यार्थियों में नशे के साथ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां सामने आ रही हैं। जिम्स में हर माह 20 से 25 वर्ष की उम्र के करीब 25 से 30 विद्यार्थी इलाज के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अवसाद और नशे की लत दोनों का समय पर उपचार संभव है। समस्या सामने आने पर लती को डांटने या ताने देने के बजाय विशेषज्ञों के पास लेकर जाना चाहिए।
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नितेश कुमार
ग्रेटर नोएडा। नशे की बढ़ती लत युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रही है। नशे की गिरफ्त में आने वाले विद्यार्थियों में धीरे-धीरे अवसाद, चिड़चिड़ापन, अकेलापन और पढ़ाई के प्रति रुचि कम होने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के मनोरोग विभाग में हर माह 25 से 30 ऐसे विद्यार्थी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनकी उम्र करीब 20 से 25 वर्ष है। चिकित्सकों के मुताबिक पढ़ाई का दबाव, करियर को लेकर चिंता, पारिवारिक तनाव, अकेलापन और दोस्तों का दबाव युवाओं को नशे की ओर धकेलने वाले प्रमुख कारण हैं। शुरुआत में कई विद्यार्थी तनाव कम करने या दोस्तों के कहने पर प्रयोग के तौर पर नशा शुरू करते हैं। धीरे-धीरे यह आदत बढ़ती जाती है और युवा मानसिक व शारीरिक रूप से नशे पर निर्भर होने लगता है।
जिम्स के मनोरोग विभाग के लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. (प्रो.) अभिषेक भारती ने बताया कि नशे का असर खत्म होने के बाद कई युवाओं में बेचैनी, उदासी, नींद की समस्या और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। पढ़ाई में मन नहीं लगता और परिवार व दोस्तों से दूरी बनने लगती है। मानसिक परेशानी बढ़ने पर नशे की मात्रा भी बढ़ सकती है। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी के कारण युवा शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। लगातार उदासी, नींद में बदलाव, भूख कम या अधिक लगना, किसी काम में मन नहीं लगना और लोगों से दूरी बनाना अवसाद के संकेत हो सकते हैं।
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आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों में भी बढ़ रहा अवसाद
डॉ. भारती के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य की समस्या केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं है। आर्थिक तंगी, तनाव और सामाजिक दूरी जैसी परिस्थितियां भी अवसाद का कारण बन रही हैं। विद्यार्थियों में नशे के साथ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां सामने आ रही हैं। जिम्स में हर माह 20 से 25 वर्ष की उम्र के करीब 25 से 30 विद्यार्थी इलाज के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अवसाद और नशे की लत दोनों का समय पर उपचार संभव है। समस्या सामने आने पर लती को डांटने या ताने देने के बजाय विशेषज्ञों के पास लेकर जाना चाहिए।
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