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यूपीसीडा के महानिदेशक को गिरफ्तार करने का वारंट जारी
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ग्रेटर नोएडा। जिला उपभोक्ता आयोग ने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के महानिदेशक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यूपीसीडा ने आयोग के एक आदेश का 14 साल बाद भी पालन नहीं किया है। आयोग ने गिरफ्तारी के लिए कानपुर पुलिस को वारंट भेजा है। साथ ही महानिदेशक को 15 अक्तूबर को तलब भी किया है। दिल्ली के पीतमपुरा निवासी सुंदरपाल ने वर्ष 1997 में यूपीसीडी (तब यूपीएसआईडीसी) के साइट-5 में 450 वर्गमीटर का औद्योगिक भूखंड खरीदा था। सुंदरपाल ने आयोग को बताया कि पूरा भुगतान करने के बाद उसी साल भूखंड पर कब्जा ले लिया था, लेकिन बीमारी के कारण निर्माण नहीं करा सके। ठीक होने के बाद यूपीसीडी से समय विस्तार देने का आवेदन किया था। यूपीसीडा ने इसका जवाब नहीं दिया।
मार्च, 2002 में यूपीसीडा ने आवंटन निरस्त कर दिया। इसके बाद सुनवाई का मौका भी नहीं दिया। सुंदरपाल ने जिला उपभोक्ता आयोग से भूखंड दिलवाने की अपील की। आयोग ने यूपीसीडा का भी पक्ष सुना। इसके बाद आयोग ने तीन जनवरी 2008 को आदेश जारी किया। इसमें यूपीसीडा को दो माह के अंदर आवंटी के भूखंड को फिर से आवंटित कर कब्जा देने का आदेश दिया। अगर मूल भूखंड किसी और को आवंटित कर दिया गया है तो वैकल्पिक भूखंड पूर्व शर्तों पर देना है। साथ ही कब्जा देने तक जमा धनराशि का ब्याज भी देना होगा। यूपीसीडा ने आयोग के इस आदेश का पालन नहीं किया। आवंटी ने इसकी फिर शिकायत की। इस पर आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर ने मंगलवार को यूपीसीडा के महानिदेशक के खिलाफ वारंट जारी किया है। अगर महानिदेशक जमानत करा लेते हैं तो उनको 15 अक्तूबर को तलब होना होगा।
अपने जवाब में फंस गया यूपीसीडा
यूपीसीडा ने आयोग में अपना पक्ष रखा था कि आवंटी को कब्जा लेने के लिए कई नोटिस भेजे गए थे, लेकिन नोटिस नहीं दिखा सके। इस पर आयोग ने माना कि आवंटी को कब्जा दिया ही नहीं गया है। बिना किसी नोटिस और सुनवाई के आवंटन निरस्त करना कानून के खिलाफ है। वहीं, यूपीसीडा ने आयोग के आदेश को राज्य आयोग में चुनौती दी। सुनवाई के बाद राज्य आयोग ने जनवरी 2015 में अपील खारिज कर दी और जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश को सही माना।
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मार्च, 2002 में यूपीसीडा ने आवंटन निरस्त कर दिया। इसके बाद सुनवाई का मौका भी नहीं दिया। सुंदरपाल ने जिला उपभोक्ता आयोग से भूखंड दिलवाने की अपील की। आयोग ने यूपीसीडा का भी पक्ष सुना। इसके बाद आयोग ने तीन जनवरी 2008 को आदेश जारी किया। इसमें यूपीसीडा को दो माह के अंदर आवंटी के भूखंड को फिर से आवंटित कर कब्जा देने का आदेश दिया। अगर मूल भूखंड किसी और को आवंटित कर दिया गया है तो वैकल्पिक भूखंड पूर्व शर्तों पर देना है। साथ ही कब्जा देने तक जमा धनराशि का ब्याज भी देना होगा। यूपीसीडा ने आयोग के इस आदेश का पालन नहीं किया। आवंटी ने इसकी फिर शिकायत की। इस पर आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर ने मंगलवार को यूपीसीडा के महानिदेशक के खिलाफ वारंट जारी किया है। अगर महानिदेशक जमानत करा लेते हैं तो उनको 15 अक्तूबर को तलब होना होगा।
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अपने जवाब में फंस गया यूपीसीडा
यूपीसीडा ने आयोग में अपना पक्ष रखा था कि आवंटी को कब्जा लेने के लिए कई नोटिस भेजे गए थे, लेकिन नोटिस नहीं दिखा सके। इस पर आयोग ने माना कि आवंटी को कब्जा दिया ही नहीं गया है। बिना किसी नोटिस और सुनवाई के आवंटन निरस्त करना कानून के खिलाफ है। वहीं, यूपीसीडा ने आयोग के आदेश को राज्य आयोग में चुनौती दी। सुनवाई के बाद राज्य आयोग ने जनवरी 2015 में अपील खारिज कर दी और जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश को सही माना।
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