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UP Election 2022: मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा बोले- ईवीएम से छेड़छाड़ का तो सवाल ही नहीं

Thu, 10 Mar 2022 07:52 AM IST
अनुराग सक्सेना एएनआई, नोएडा
एएनआई, नोएडा Published by: अनुराग सक्सेना Updated Thu, 10 Mar 2022 07:52 AM IST
सार

सीईसी ने एक इंटरव्यू में बताया कि यूपी के मुख्य चुनाव अधिकारी ने वाराणसी से एडीएम को इसलिए निलंबित किया क्योंकि उन्होंने प्रशिक्षण के लिए ईवीएम ले जाने की बात राजनीतिक दलों को बताने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया था।

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UP Election 2022: Chief Election Commissioner Sushil Chandra said - there is no question of EVM tampering
मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा - फोटो : एएनआई-फाइल फोटो

विस्तार

यूपी में समाजवादी पार्टी द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से छेड़छाड़ का आरोप लगाए जाने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सुशील चंद्रा ने कहा है कि चुनाव आयोग ने हमेशा पारदर्शिता बनाई है तो ईवीएम से छेड़छाड़ का तो सवाल ही नहीं।

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सीईसी ने एक इंटरव्यू में बताया कि यूपी के मुख्य चुनाव अधिकारी ने वाराणसी से एडीएम को इसलिए निलंबित किया क्योंकि उन्होंने प्रशिक्षण के लिए ईवीएम ले जाने की बात राजनीतिक दलों को बताने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया था।

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उन्होंने कहा कि ईवीएम से छेड़छाड़ का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। ईवीएम का 2004 से लगातार प्रयोग हो रहा है। साल 2019 तक हमने प्रत्येक बूथ पर वोटर-वैरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रायल (वीवीपैट) का प्रयोग शुरू कर दिया था। उन्हें देखने के बाद ईवीएम को राजनीतिक दलों के पोलिंग एजेंट के सामने सील किया जाता है और उन्हें हस्ताक्षर लिए जाते हैं।

त्रिस्तरीय सुरक्षा में रहती है ईवीएम

उन्होंने बताया कि ईवीएम को त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे में स्ट्रांग रूम में रखा जाता है। वहां सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है। स्ट्रांग रूम पर राजनीतिक दलों के एजेंटों की नजर रहती है, तो ईवीएम से किसी भी तरह की छेड़छाड़ का तो सवाल ही नहीं उठता ना ही कोई ईवीएम स्ट्रांग रूम से बाहर ले जाई जा सकती।

ईवीएम का यूनिक नंबर दिखाने के बाद संतुष्ट हुए राजनीतिक दल

चंद्रा ने कहा कि वाराणसी में जिस ईवीएम पर सवाल उठाए गए हैं, वह प्रशिक्षण के लिए थी। एडीएम की गलती यह थी कि उन्होंने प्रशिक्षण के लिए ईवीएम ले जाने की जानकारी राजनीतिक दलों को नहीं दी, जो कि एक मानक प्रक्रिया है। हर ईवीएम का एक नंबर होता है। उन्होंने बताया कि जब राजनीतिक दल के लोग सवाल उठाए तो हमने उन्हें नंबर दिखा दिए तब स्पष्ट हो गया कि ये ईवीएम से चुनाव नहीं कराए गए हैं। इसके बाद वे संतुष्ट हो गए।

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