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Noida News: यूडीएफ यात्री शुल्क को बताया ज्यादा, फिर से तय करने की मांग
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- नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रस्तावित अत्यधिक यूडीएफ एवं यात्री शुल्कों पर विधायक जेवर ने जताई चिंता
माई सिटी रिपोर्टर
यमुना सिटी। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रस्तावित यूजर डेवलपमेंट फीस (यूडीएफ) एवं अन्य यात्री शुल्कों को लेकर जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर कहा है कि नोएडा एयरपोर्ट पर प्रारंभिक चरण में प्रस्तावित शुल्क संरचना अधिक है। इसका फिर से मूल्यांकन नहीं होना चाहिए।
नोएडा एयरपोर्ट पर दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट की तुलना में कुछ शहरों के लिए यात्री किराया अधिक है। विधायक ने पत्र में इसपर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि नोएडा एयरपोर्ट देश की सबसे महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। एयरपोर्ट से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की जनता को अत्यधिक अपेक्षाएं हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्य सचिव, केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री एवं केन्द्रीय नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों को पत्र प्रेषित करते हुए यात्री किराए में कमी करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रारंभिक चरण में ही टिकट दरें दिल्ली एयरपोर्ट से अधिक रहेंगी, तो इससे यात्रियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ेगा तथा एयरपोर्ट की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी।
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एयरपोर्ट तक नहीं है बेहतर परिवहन व्यवस्था
विधायक ने पत्र में लिखा है वर्तमान में एयरपोर्ट को पूर्ण मेट्रो, रैपिड रेल एवं अन्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी का लाभ प्राप्त नहीं है। एनसीआर एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अनेक यात्रियों को यहां तक पहुंचने में अतिरिक्त समय एवं व्यय करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में दिल्ली एयरपोर्ट की तुलना में अधिक यूडीएफ एवं शुल्क तर्कसंगत नहीं हैं।
एटीएफ पर एक प्रतिशत शुल्क होते हुए भी टिकट महंगे
विधायक ने यह तथ्य भी प्रमुखता से उठाया कि उत्तर प्रदेश में एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर कर मात्र 1% है, जबकि दिल्ली में यही कर लगभग 25% है। इसके बावजूद यदि टिकट दरें अधिक रखी जाती हैं, तो यह यात्रियों के हितों के प्रतिकूल होगा। उन्होंने विमानन विशेषज्ञों एवं एयरलाइंस की ओर से व्यक्त उन आशंकाओं का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा गया है कि अत्यधिक यूडीएफ एवं एयरपोर्ट शुल्कों के कारण टिकट दरों में अनावश्यक वृद्धि होगी, जिससे यात्रियों की संख्या, एयरलाइन संचालन एवं एयरपोर्ट की दीर्घकालिक व्यवहार्यता प्रभावित हो सकती है।
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माई सिटी रिपोर्टर
यमुना सिटी। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रस्तावित यूजर डेवलपमेंट फीस (यूडीएफ) एवं अन्य यात्री शुल्कों को लेकर जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर कहा है कि नोएडा एयरपोर्ट पर प्रारंभिक चरण में प्रस्तावित शुल्क संरचना अधिक है। इसका फिर से मूल्यांकन नहीं होना चाहिए।
नोएडा एयरपोर्ट पर दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट की तुलना में कुछ शहरों के लिए यात्री किराया अधिक है। विधायक ने पत्र में इसपर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि नोएडा एयरपोर्ट देश की सबसे महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। एयरपोर्ट से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की जनता को अत्यधिक अपेक्षाएं हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्य सचिव, केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री एवं केन्द्रीय नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों को पत्र प्रेषित करते हुए यात्री किराए में कमी करने की मांग की है।
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उन्होंने कहा कि यदि प्रारंभिक चरण में ही टिकट दरें दिल्ली एयरपोर्ट से अधिक रहेंगी, तो इससे यात्रियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ेगा तथा एयरपोर्ट की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी।
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एयरपोर्ट तक नहीं है बेहतर परिवहन व्यवस्था
विधायक ने पत्र में लिखा है वर्तमान में एयरपोर्ट को पूर्ण मेट्रो, रैपिड रेल एवं अन्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी का लाभ प्राप्त नहीं है। एनसीआर एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अनेक यात्रियों को यहां तक पहुंचने में अतिरिक्त समय एवं व्यय करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में दिल्ली एयरपोर्ट की तुलना में अधिक यूडीएफ एवं शुल्क तर्कसंगत नहीं हैं।
एटीएफ पर एक प्रतिशत शुल्क होते हुए भी टिकट महंगे
विधायक ने यह तथ्य भी प्रमुखता से उठाया कि उत्तर प्रदेश में एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर कर मात्र 1% है, जबकि दिल्ली में यही कर लगभग 25% है। इसके बावजूद यदि टिकट दरें अधिक रखी जाती हैं, तो यह यात्रियों के हितों के प्रतिकूल होगा। उन्होंने विमानन विशेषज्ञों एवं एयरलाइंस की ओर से व्यक्त उन आशंकाओं का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा गया है कि अत्यधिक यूडीएफ एवं एयरपोर्ट शुल्कों के कारण टिकट दरों में अनावश्यक वृद्धि होगी, जिससे यात्रियों की संख्या, एयरलाइन संचालन एवं एयरपोर्ट की दीर्घकालिक व्यवहार्यता प्रभावित हो सकती है।