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Noida News: 24 साल पुराने गैंगस्टर केस में दो आरोपी बरी
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24 साल पुराने गैंगस्टर केस में दो आरोपी बरी
ग्रेटर नोएडा। करीब 24 वर्ष पुराने गैंगस्टर एक्ट के मामले में गौतमबुद्ध नगर की विशेष गैंगस्टर अदालत ने फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों राजकुमार और विनोद को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल गैंगचार्ट तैयार कर देना या आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज होना, गैंगस्टर एक्ट के तहत दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपियों ने किसी संगठित गिरोह के सदस्य के रूप में समाज में भय और आतंक फैलाकर आर्थिक, भौतिक अथवा अन्य अनुचित लाभ अर्जित किया था। यह मामला वर्ष 2002 का है। थाना सूरजपुर में आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने गैंगचार्ट में आरोप लगाया था कि राजकुमार और विनोद एक सक्रिय गिरोह के सदस्य हैं। उनके खिलाफ हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट, लूट और चोरी जैसे कई मुकदमे दर्ज हैं। इसी आधार पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तत्कालीन थाना प्रभारी, विवेचक और एक वादी सहित कई गवाहों को अदालत में पेश किया। वहीं बचाव पक्ष ने दलील दी कि गैंगचार्ट में शामिल अधिकांश आधारभूत मामलों में आरोपियों को पहले ही दोषमुक्त किया जा चुका है और उनके खिलाफ संगठित गिरोह चलाने का कोई स्वतंत्र एवं ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। ब्यूरो
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ग्रेटर नोएडा। करीब 24 वर्ष पुराने गैंगस्टर एक्ट के मामले में गौतमबुद्ध नगर की विशेष गैंगस्टर अदालत ने फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों राजकुमार और विनोद को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल गैंगचार्ट तैयार कर देना या आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज होना, गैंगस्टर एक्ट के तहत दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपियों ने किसी संगठित गिरोह के सदस्य के रूप में समाज में भय और आतंक फैलाकर आर्थिक, भौतिक अथवा अन्य अनुचित लाभ अर्जित किया था। यह मामला वर्ष 2002 का है। थाना सूरजपुर में आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने गैंगचार्ट में आरोप लगाया था कि राजकुमार और विनोद एक सक्रिय गिरोह के सदस्य हैं। उनके खिलाफ हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट, लूट और चोरी जैसे कई मुकदमे दर्ज हैं। इसी आधार पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तत्कालीन थाना प्रभारी, विवेचक और एक वादी सहित कई गवाहों को अदालत में पेश किया। वहीं बचाव पक्ष ने दलील दी कि गैंगचार्ट में शामिल अधिकांश आधारभूत मामलों में आरोपियों को पहले ही दोषमुक्त किया जा चुका है और उनके खिलाफ संगठित गिरोह चलाने का कोई स्वतंत्र एवं ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। ब्यूरो
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