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परेशानी : फास्टैग लेन में भी लग रही एक किलोमीटर की लंबी लाइन

Tue, 13 Oct 2020 11:49 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2020 11:49 PM IST
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Trouble: A one kilometer long line is also seen in Fastag lane
लुहारली टोल प्लाजा पर फास्ट टैग की मैनुअल स्कैनिंग करता कर्मचारी। - फोटो : Grnoida
परेशानी : फास्टैग लेन में भी लग रही एक किलोमीटर की लंबी लाइन
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ग्रेटर नोएडा (राजेश भाटी/ऋषिपाल सिंह)। लुहारली टोल प्लाजा पर फास्टैग लैन में भी वाहनों की एक किमी लंबी लाइन लग रही है। इससे वाहन चालकों को टोल पार करने में एक से डेढ़ घंटे का समय लग रहा है। फास्टैग लेन में नकद वाले वाहन गुजरने से परेशानी और बढ़ रही है। समस्या का कारण फास्टैग मशीन का ठीक से नहीं काम करना है। हैंड मशीनों से स्कैन कर वाहनों को निकाला जा रहा है। वाहन चालकों का कहना है कि उनकी समस्या को सुनने के लिए टोल पर कोई जिम्मेदार अधिकारी भी मौजूद नहीं रहता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-91 पर लुहारली टोल प्लाजा से 24 घंटे में करीब 26000 वाहनों की आवाजाही होती है। इनमें 10,000 फास्टैग वाले वाहन हैं। टोल प्लाजा के दोनों तरफ तीन-तीन लेन फास्टैग और दो-दो लेन नकद वाले वाहनों के लिए हैं। जाम की वजह जानने के लिए मंगलवार रात अमर उजाला की टीम लुहारली टोल प्लाजा पहुंची तो वहां फास्टैग और नकद की लेनों में वाहनों की करीब एक किमी लंबी लाइन लगी हुई थी। नकद पैसे देकर गुजरने वाले वाहन भी फास्टैग लेन से निकलते दिखे। टोल पर बसों और ट्रकों के फास्टैग को स्कैन करने में मशीन को काफी समय लग रहा था। वहीं, कई वाहनों पर लगे फास्टैग को मशीन स्कैन नहीं कर पा रही थी। इस वजह से टोल कर्मी हैंड मशीन से फास्टैग स्कैन कर वाहनों को निकाल रहे थे। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने पर नकद लेकर वाहनों को निकालना पड़ा।
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चालक और टोल कर्मी में होती है बहस
फास्टैग लेन में स्थानीय वाहन चालक भी आवाजाही करते हैं। इससे भी समस्या बढ़ जाती है। कई बार फास्टैग लेन में वाहन चालकों को दोगुना शुल्क देकर निकलना पड़ता है। इसको लेकर अक्सर टोल कर्मियों व वाहन चालक के बीच बहस छिड़ जाती है। इससे टोल पर वाहनों की लाइन लग जाती है। मंगलवार रात भी आधे घंटे के दौरान तीन वाहन चालकों की टोल कर्मियों से बहस हो गई। वहीं, टोल प्लाजा के दोनों ओर 50 मीटर की दूरी पर मालवाहक वाहन भी खड़े मिले। जाम लगने के पीछे यह भी प्रमुख कारण है।
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फास्टैग लेन में स्थानीय लोग आईडी दिखाकर वाहनों को निकालते हैं। मना करने और टोल मांगने पर बहस करते हैं। इससे जाम लग जाता है। फास्टैग स्कैन करने में भी तकनीकी दिक्कत आ रही है। इसे जल्द दूर कराया जाएगा। वहीं, कई बार फास्टैग में पैसा नहीं होने पर भी ज्यादा वक्त लग जाता है।
- अमरेंद्र झा, मैनेजर, लुहारली टोल प्लाजा
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