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कानून के शिकंजे से बचने के लिए आरोपियों ने तैयार कराए थे शपथ पत्र

Tue, 14 Sep 2021 07:33 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 14 Sep 2021 07:33 PM IST
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To avoid the clutches of law, the accused had prepared affidavits
फर्जीवाड़े के आरोपी अनिल सेन और मीनू सेन। फाइल फोटो। - फोटो : Grnoida
ग्रेटर नोएडा। बाइक बोट की तर्ज कर गो-वे कंपनी के नाम से 17 हजार लोगों से 150 करोड़ की ठगी करने वाले आरोपी अनिल सेन, मीनू सेन व अन्य ने कानून के शिकंजे से बचने के लिए भरसक प्रयास किए थे। आरोपियों ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की। इसकी जानकारी पर निवेशकों ने मजबूत पैरवी की। हाईकोर्ट ने आरोपियों को निवेशकों का रुपया दो माह में लौटाने के आदेश दिए तो आरोपियों ने कुछ निवेशकों को रुपये लौटाने का झांसा देकर शपथ पत्र तैयार कर लिए, लेकिन सभी निवेशकों का रुपया नहीं लौटाने और अन्य की मजबूत पैरवी के कारण आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली।
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वहीं, मामले में पड़ताल में जुटी पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने में कामयाब हो गई। निवेशकों ने यह भी दावा किया है कि आरोपी अनिल सेन भाजपा से जुड़ा था और आरोपियों ने 300 करोड़ की ठगी की है। गाजियाबाद निवासी निवेशक मीडियाकर्मी जयवीर मावी ने बताया कि गो-वे कंपनी में लगभग 45 लाख रुपये निवेश किया था। उनके अलावा परिचित व रिश्तेदारों का रुपया भी इसमें शामिल है। आरोपियों ने रकम नहीं लौटाई और दफ्तर बंद कर फरार हो गए। इसके बाद उनके परिचित रुपये वापस करने का दबाव बनाने लगे। उन्हें अपने स्तर से भी का रुपया लौटाना पड़ रहा है।
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जयवीर ने बताया कि आरोपियों ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। वहीं, कुछ निवेशकों को रुपया वापस करने का झांसा देकर शपथ पत्र ले लिए थे। इससे आरोपी हाईकोर्ट को यह दिखाना चाहते थे कि वह निवेशकों को रुपया लौटा रहे हैं, लेकिन मेरे अधिवक्ता ने मजबूत पैरवी कर हाईकोर्ट में दलील दी कि बड़ी संख्या में लोग ठगी का शिकार हुए हैं। हाईकोर्ट ने दो माह में रुपया लौटाने के आदेश दिया था, लेकिन आरोपियों ने रकम वापस नहीं की। उन्होंने अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। केस के आईओ शैलेंद्र तोमर ने बताया कि आरोपियों ने शपथ पत्र लिए थे, लेकिन पीड़ितों का रुपया नहीं लौटाया था।
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