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Noida News: नगर और आसपास के क्षेत्रों में 15 से ज्यादा कॉलोनियां, एक भी वैध नहीं
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रॉबर्ट्सगंज इंद्रपुरी कालोनी की एक गली में जमा बारिश का पानी। संवाद
सोनभद्र। नगर पालिका और आसपास के क्षेत्र में 15 से ज्यादा कॉलोनियां आबाद हैं लेकिन एक भी वैध नहीं है। किसी का न कोई ले आउट पास कराया गया और न बुनियादी सुविधाएं विकसित की गईं। इन कॉलोनियों में पक्की सड़क तक नहीं है। जलनिकासी और पेयजल के भी इंतजाम नहीं किए गए। बिजली की व्यवस्था बांस-बल्ली के सहारे है।
नगरीय क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही अवैध कॉलोनियों पर सरकार ने शिकंजा कसने के निर्देश दिए हैं। इन कॉलोनियों को बसाने वाले पहले तो अच्छी सुविधाओं के सब्जबाग दिखाते हैं, फिर प्लाट बेचकर किनारा कर लेते हैं। रहवासी समस्याओं से जूझते हैं और स्थानीय प्रशासन पर ठिकरा फोड़ते हैं। रॉबर्ट्सगंज नगर पालिका और उससे सटे गांवाें में भी ऐसी अवैध कॉलोनियाें की संख्या तेजी से बढ़ी है।
करीब 15 साल पहले तक यहां सिर्फ दो कॉलोनी इमरती और न्यू कॉलोनी थीं। अब 15 से अधिक कॉलोनियां बन गई हैं। गांवों से निकलकर नगर में बसने की चाह लेकर आने वालों को इन कॉलोनियों में महंगे प्लाट दिलाकर बसाया जा रहा है, मगर सुविधाएं नहीं मिल रही।
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यहां तक कि बिजली, पानी, सड़क, जलनिकासी, सफाई जैसी सुविधाएं भी नदारद हैं। सीमा विस्तार के बाद यह कॉलोनियां नगर का हिस्सा बन गई हैं। रहवासी सुविधाएं उपलब्ध कराने में पालिका प्रशासन को मशक्कत करनी पड़ रही है।
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नगरीय क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही अवैध कॉलोनियों पर सरकार ने शिकंजा कसने के निर्देश दिए हैं। इन कॉलोनियों को बसाने वाले पहले तो अच्छी सुविधाओं के सब्जबाग दिखाते हैं, फिर प्लाट बेचकर किनारा कर लेते हैं। रहवासी समस्याओं से जूझते हैं और स्थानीय प्रशासन पर ठिकरा फोड़ते हैं। रॉबर्ट्सगंज नगर पालिका और उससे सटे गांवाें में भी ऐसी अवैध कॉलोनियाें की संख्या तेजी से बढ़ी है।
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करीब 15 साल पहले तक यहां सिर्फ दो कॉलोनी इमरती और न्यू कॉलोनी थीं। अब 15 से अधिक कॉलोनियां बन गई हैं। गांवों से निकलकर नगर में बसने की चाह लेकर आने वालों को इन कॉलोनियों में महंगे प्लाट दिलाकर बसाया जा रहा है, मगर सुविधाएं नहीं मिल रही।
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यहां तक कि बिजली, पानी, सड़क, जलनिकासी, सफाई जैसी सुविधाएं भी नदारद हैं। सीमा विस्तार के बाद यह कॉलोनियां नगर का हिस्सा बन गई हैं। रहवासी सुविधाएं उपलब्ध कराने में पालिका प्रशासन को मशक्कत करनी पड़ रही है।