{"_id":"5fe77c4b8ebc3e3c8e59f39d","slug":"the-new-rule-of-the-government-put-the-sleep-of-those-who-contest-the-panchayat-elections-mewat-news-noi556250283","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार के नए नियमों से पंचायत चुनाव लडने वालों की उड़ी नींद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकार के नए नियमों से पंचायत चुनाव लडने वालों की उड़ी नींद
विज्ञापन
सरकार के नए नियमों से पंचायत चुनाव लड़ने वालों की उड़ी नींद
यूनुस अलवी
पुन्हाना। प्रदेश में पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। वहीं नए नियमों ने चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों की नींद उड़ा दी है। अभी तक पंच, सरपंच, ब्लाक समिति और जिला परिषद में एससी व बीसीए वर्ग के आरक्षण के ड्रा निकाले गए हैं। वहीं पुन्हाना, पिनगवां, नगीना, नूंह, फिरोजपुर झिरका और इंडरी खंडों की पंचायत समितियों की वार्ड बंदी नहीं की गई है। प्रदेश सरकार द्वारा पंचायती राज कानून में किए गए नए संशोधनों के अनुसार जहां बीसीए वर्ग को पंचायत में 8 फीसदी आरक्षण देने की बात कही गई है। वहीं एससी वर्ग के सरपंच उन्हीं पंचायतों में बन सकेंगे, जहां इस वर्ग की कम से कम 10 फीसदी आबादी होगी। यदि यह प्रावधान लागू होता है तो पुन्हाना में 7 और पिनगवां खंड की 6 पंचायतों में एससी वर्ग के सरपंच नहीं बन सकेंगे।
करीब दो माह पहले जिला पंचायत विभाग ने नूंह जिले में चुनावों की तैयारियों को लेकर पंच, सरपंच, जिला परिषद के सदस्यों के आरक्षण तय किए थे। पंचायत समितियों में भी आरक्षण की तैयारी शुरू कर दी थी। तभी सरकार ने सभी ड्रा पर रोक लगा दी। आरक्षण ड्रा के अनुसार पुन्हाना में बांधौली, नैवाना, हथनगांव, झारौकड़ी, रायपुर, जैंवत, भूरियाकी, तिरवाड़ा, गौधौला, बिछौर और पिनगवां खंड में बसई खांजादा, पिनगवां, सुलतानपुर पुन्हाना, मोहम्मदपुर तेड़, खेड़लीकलां, पापड़ा, खानपुर घाटी, हींगनपुर और रहपुआ सहित 19 पंचायतों को एससी वर्ग के लिए आरक्षित किया गया था। अब सरकार का जो नया नियम आया है, उसके अनुसार केवल उन्हीं पंचायतों में एससी सरपंच हो सकेंगे। जिनमें 2011 की जनगणना के अनुसार कुल आबादी का 10 फीसदी इस वर्ग से होगा। पुन्हाना के बांधौली में 23.45 फीसदी, नैवाना में 18.98, हथनगांव में 17.21 और पिनगवां खंड़ के बसई खांजादा में 23.05, पिनगवां में 14.67 व सुलतानपुर पुन्हाना में 11.67 फीसदी जनसंख्या एससी वर्ग से है। ऐसे में यही पंचायतें एससी वर्ग के लिए आरक्षित हो सकेंगी। बाकी 13 पंचायतें आरक्षण से बाहर हो जाएंगी।
क्या कहते हैं अधिकारी
जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राकेश मोर ने बताया कि पहले एससी वर्ग का आरक्षण प्रदेश की जनसंख्या के आधार पर होता था। अब नए कानून के अनुसार ब्लाक स्तर की जनसंख्या के आधार पर ही सीटें आरक्षित होंगी। जिन गांवों में एससी वर्ग की जनसंख्या 10 फीसदी से कम होगी, वहां इस वर्ग के लिए आरक्षण नहीं होगा। पहले सरपंच पद के लिए गांव में एक एससी वार्ड होना जरूरी था, लेकिन अब दस फीसदी जनसंख्या जरूरी है।
विज्ञापन
.........................
सरकार को ब्लाक स्तर पर नहीं बल्कि प्रदेश की जनसंख्या के आधार पर पहले की तरह आरक्षण देना चाहिए। नए नियम से सरकार एससी वर्ग के आरक्षण को खत्म करना चाहती है। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
समय सिंह, प्रदेश अध्यक्ष बामसेफ
.........................
सरकार का यह अच्छा फैसला है। कई गांवों में कम आबादी होने के बावजूद भी पंचायतें आरक्षित कर दी जाती हैं। उनमें से अधिकतर लोग दूसरे शहरों में रहते हैं और चुनाव लड़ने के मकसद से गांव में वोट बनवाकर रखते हैं।
दीन मोहम्मद, मामलीका समाजसेवी
.........................
मेवात और प्रदेश में प्रशासन ने पहले ड्रा निकाल दिए। इसके अनुसार चुनाव लड़ने वालों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। फिर सरकार ने 50 फीसदी महिला और बीसीए का 8 फीसदी के आरक्षण का कानून बना दिया। इससे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोग परेशान हैं।
तारीक हुसैन (चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं)
विज्ञापन
यूनुस अलवी
पुन्हाना। प्रदेश में पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। वहीं नए नियमों ने चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों की नींद उड़ा दी है। अभी तक पंच, सरपंच, ब्लाक समिति और जिला परिषद में एससी व बीसीए वर्ग के आरक्षण के ड्रा निकाले गए हैं। वहीं पुन्हाना, पिनगवां, नगीना, नूंह, फिरोजपुर झिरका और इंडरी खंडों की पंचायत समितियों की वार्ड बंदी नहीं की गई है। प्रदेश सरकार द्वारा पंचायती राज कानून में किए गए नए संशोधनों के अनुसार जहां बीसीए वर्ग को पंचायत में 8 फीसदी आरक्षण देने की बात कही गई है। वहीं एससी वर्ग के सरपंच उन्हीं पंचायतों में बन सकेंगे, जहां इस वर्ग की कम से कम 10 फीसदी आबादी होगी। यदि यह प्रावधान लागू होता है तो पुन्हाना में 7 और पिनगवां खंड की 6 पंचायतों में एससी वर्ग के सरपंच नहीं बन सकेंगे।
करीब दो माह पहले जिला पंचायत विभाग ने नूंह जिले में चुनावों की तैयारियों को लेकर पंच, सरपंच, जिला परिषद के सदस्यों के आरक्षण तय किए थे। पंचायत समितियों में भी आरक्षण की तैयारी शुरू कर दी थी। तभी सरकार ने सभी ड्रा पर रोक लगा दी। आरक्षण ड्रा के अनुसार पुन्हाना में बांधौली, नैवाना, हथनगांव, झारौकड़ी, रायपुर, जैंवत, भूरियाकी, तिरवाड़ा, गौधौला, बिछौर और पिनगवां खंड में बसई खांजादा, पिनगवां, सुलतानपुर पुन्हाना, मोहम्मदपुर तेड़, खेड़लीकलां, पापड़ा, खानपुर घाटी, हींगनपुर और रहपुआ सहित 19 पंचायतों को एससी वर्ग के लिए आरक्षित किया गया था। अब सरकार का जो नया नियम आया है, उसके अनुसार केवल उन्हीं पंचायतों में एससी सरपंच हो सकेंगे। जिनमें 2011 की जनगणना के अनुसार कुल आबादी का 10 फीसदी इस वर्ग से होगा। पुन्हाना के बांधौली में 23.45 फीसदी, नैवाना में 18.98, हथनगांव में 17.21 और पिनगवां खंड़ के बसई खांजादा में 23.05, पिनगवां में 14.67 व सुलतानपुर पुन्हाना में 11.67 फीसदी जनसंख्या एससी वर्ग से है। ऐसे में यही पंचायतें एससी वर्ग के लिए आरक्षित हो सकेंगी। बाकी 13 पंचायतें आरक्षण से बाहर हो जाएंगी।
विज्ञापन
क्या कहते हैं अधिकारी
जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राकेश मोर ने बताया कि पहले एससी वर्ग का आरक्षण प्रदेश की जनसंख्या के आधार पर होता था। अब नए कानून के अनुसार ब्लाक स्तर की जनसंख्या के आधार पर ही सीटें आरक्षित होंगी। जिन गांवों में एससी वर्ग की जनसंख्या 10 फीसदी से कम होगी, वहां इस वर्ग के लिए आरक्षण नहीं होगा। पहले सरपंच पद के लिए गांव में एक एससी वार्ड होना जरूरी था, लेकिन अब दस फीसदी जनसंख्या जरूरी है।
विज्ञापन
.........................
सरकार को ब्लाक स्तर पर नहीं बल्कि प्रदेश की जनसंख्या के आधार पर पहले की तरह आरक्षण देना चाहिए। नए नियम से सरकार एससी वर्ग के आरक्षण को खत्म करना चाहती है। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
समय सिंह, प्रदेश अध्यक्ष बामसेफ
.........................
सरकार का यह अच्छा फैसला है। कई गांवों में कम आबादी होने के बावजूद भी पंचायतें आरक्षित कर दी जाती हैं। उनमें से अधिकतर लोग दूसरे शहरों में रहते हैं और चुनाव लड़ने के मकसद से गांव में वोट बनवाकर रखते हैं।
दीन मोहम्मद, मामलीका समाजसेवी
.........................
मेवात और प्रदेश में प्रशासन ने पहले ड्रा निकाल दिए। इसके अनुसार चुनाव लड़ने वालों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। फिर सरकार ने 50 फीसदी महिला और बीसीए का 8 फीसदी के आरक्षण का कानून बना दिया। इससे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोग परेशान हैं।
तारीक हुसैन (चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं)