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Noida News: पौराणिक मान्यता से जुड़ा है तीर्थ परिक्रमा का महत्व
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संभल। प्राचीन श्री वंश गोपाल कल्किधाम बेनीपुर चक से शनिवार सुबह में शुरू हुई 24 कोसीय परिक्रमा का महत्व पौराणिक मान्यता से जुड़ा है। मंदिर के महंत स्वामी भगवत प्रिय महाराज बताते हैं कि संभल-गवां मार्ग से करीब तीन किलोमीटर अंदर बेनीपुर गांव है। इसी गांव के रकबे में वंश गोपाल तीर्थ है। जनश्रुति और पौराणिक आख्यानों के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण अनूपशहर के निकट कुंदनपुर से रुक्मिणी का हरण करके ला रहे थे। यहां उन्होंने कदंब का वृक्ष देखकर रात्रि विश्राम किया। रुक्मिणी ने भगवान से रात्रि में रुकने का कारण पूछा, इस पर भगवान ने कहा कि मैं कलियुग में कल्कि अवतार लेकर इसी संभल में आऊंगा। तभी से कदंब के वृक्ष स्थान को तीर्थ का स्वरूप मिला।
बताया कि इस बात का उल्लेख श्रीमद् भागवत कथा स्कंद 12 के दूसरे अध्याय में मिलता है। प्रसंग यह भी है कि श्रीकृष्ण ने ब्रह्मा जी को बुलवाकर कदंब के वृक्ष के पास शिव मंदिर और सुंदर तीर्थ का निर्माण कराया। तब इस स्थान को गोपालेश्वर महादेव का नाम दिया गया। वर्षों बाद एक निसंतान महिला एक बार मंदिर पहुंची और भगवान से वंश की प्रार्थना की। भगवान की कृपा से उसे एक पुत्र की प्राप्ति हुई उसने अपने पुत्र का नाम वंश रख दिया। इसके बाद गोपालेश्वर महादेव न कहकर इसे वंश गोपाल के नाम से जाना जाने लगा।
वंश गोपाल तीर्थ में अभी भी कदम का विशाल वटवृक्ष मौजूद है। यही नहीं, यहां ब्रह्मा जी की ओर से स्थापित शिवलिंग एवं महाप्राचीन तीर्थ कुंड में स्नान करने से जन्म जन्म के पापों का नाश हो जाता है। बताया कि संभल की 24 कोसीय परिक्रमा से मनुष्य आत्मा रूप बनके परमात्मा से जुड़ जाता है। खास बात यह भी है कि जिस तरह ब्रज, गोकुल, गोवर्धन, अयोध्या की परिक्रमा की महिमा प्रचलित है। उसी तरह यहां की महिमा है।
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बताया कि इस बात का उल्लेख श्रीमद् भागवत कथा स्कंद 12 के दूसरे अध्याय में मिलता है। प्रसंग यह भी है कि श्रीकृष्ण ने ब्रह्मा जी को बुलवाकर कदंब के वृक्ष के पास शिव मंदिर और सुंदर तीर्थ का निर्माण कराया। तब इस स्थान को गोपालेश्वर महादेव का नाम दिया गया। वर्षों बाद एक निसंतान महिला एक बार मंदिर पहुंची और भगवान से वंश की प्रार्थना की। भगवान की कृपा से उसे एक पुत्र की प्राप्ति हुई उसने अपने पुत्र का नाम वंश रख दिया। इसके बाद गोपालेश्वर महादेव न कहकर इसे वंश गोपाल के नाम से जाना जाने लगा।
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वंश गोपाल तीर्थ में अभी भी कदम का विशाल वटवृक्ष मौजूद है। यही नहीं, यहां ब्रह्मा जी की ओर से स्थापित शिवलिंग एवं महाप्राचीन तीर्थ कुंड में स्नान करने से जन्म जन्म के पापों का नाश हो जाता है। बताया कि संभल की 24 कोसीय परिक्रमा से मनुष्य आत्मा रूप बनके परमात्मा से जुड़ जाता है। खास बात यह भी है कि जिस तरह ब्रज, गोकुल, गोवर्धन, अयोध्या की परिक्रमा की महिमा प्रचलित है। उसी तरह यहां की महिमा है।
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