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Noida News: अमृतपाल सिंह की रिहाई पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से एक हफ्ते में निर्णय लेने को कहा
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब के गृह विभाग को निर्देश दिया कि वह खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की ओर से दाखिल याचिका पर एक सप्ताह में फैसला करे। यह याचिका आगामी शीतकालीन सत्र में शामिल होने के लिए उनकी अस्थायी रिहाई से जुड़ी है। हाईकोर्ट ने कहा कि निर्णय संभव हो तो संसद सत्र शुरू होने से पहले लिया जाए और उसे अमृतपाल को सूचित भी किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें अमृतपाल सिंह ने 1 से 19 दिसंबर तक चलने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में शामिल होने की अनुमति मांगी है। अमृतपाल फिलहाल नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के तहत असम की डिब्रूगढ़ केंद्रीय जेल में बंद हैं।
अमृतपाल ने कोर्ट से कहा है कि वह एनएसए के तहत अंतरिम रिहाई या पैरोल चाहते हैं, ताकि वे संसद में अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठा सकें। इसके अलावा उन्होंने वैकल्पिक रूप से यह अनुरोध भी किया है कि सरकार उनकी संसद में व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था करे।
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उन्होंने 13 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय, पंजाब सरकार और अमृतसर के जिलाधिकारी को भी अपने प्रतिनिधि पत्र भेजे थे जिन पर निर्णय लेने का हाईकोर्ट से आग्रह किया है। करीब 19 लाख मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हुए अमृतपाल ने दलील दी कि उनका संसद में उपस्थित रहना जरूरी है ताकि वे अपने क्षेत्र के विश्वास और मुद्दों को लोकतांत्रिक और सांविधानिक मूल्यों के अनुरूप उठा सकें।
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मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें अमृतपाल सिंह ने 1 से 19 दिसंबर तक चलने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में शामिल होने की अनुमति मांगी है। अमृतपाल फिलहाल नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के तहत असम की डिब्रूगढ़ केंद्रीय जेल में बंद हैं।
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अमृतपाल ने कोर्ट से कहा है कि वह एनएसए के तहत अंतरिम रिहाई या पैरोल चाहते हैं, ताकि वे संसद में अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठा सकें। इसके अलावा उन्होंने वैकल्पिक रूप से यह अनुरोध भी किया है कि सरकार उनकी संसद में व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था करे।
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उन्होंने 13 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय, पंजाब सरकार और अमृतसर के जिलाधिकारी को भी अपने प्रतिनिधि पत्र भेजे थे जिन पर निर्णय लेने का हाईकोर्ट से आग्रह किया है। करीब 19 लाख मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हुए अमृतपाल ने दलील दी कि उनका संसद में उपस्थित रहना जरूरी है ताकि वे अपने क्षेत्र के विश्वास और मुद्दों को लोकतांत्रिक और सांविधानिक मूल्यों के अनुरूप उठा सकें।