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सरकार तारीख पर तारीख बढ़ाती रहे, किसान हटने वाले नहीं
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दलित प्रेरणा स्थल पर किसानों के धरने के दौरान करतब दिखाता बच्चा।
सरकार तारीख पर तारीख बढ़ाती रहे, किसान हटने वाले नहीं
नोएडा। सातवें दौर की वार्ता में बुधवार को सरकार और किसानों के बीच दो मुद्दों पर सहमति बन गई, लेकिन दो मुख्य मांगों पर अभी भी किसान अड़े हुए हैं। 4 जनवरी को एक बार फिर वार्ता होगी, लेकिन इस बीच चिल्ला बॉर्डर पर किसानों के तेवर तल्ख हो गए हैं। यहां किसान नेताओं ने एलान किया कि सरकार तारीख पर तारीख बढ़ाती रहे, लेकिन किसान हटने वाले नहीं हैं। जब तक किसान आयोग के गठन और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया जाएगा, तब तक चिल्ला बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, नववर्ष की पूर्व संध्या पर किसानों ने बॉर्डर पर ही जश्न मनाया।
भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने कहा कि बुधवार को हुई वार्ता से हम संतुष्ट नहीं हैं। मांग है कि किसान आयोग का गठन कर किसानों को स्वतंत्र किया जाए। यदि उद्योगपति अपने उत्पादों की कीमत खुद तय करता है तो किसान भी अपनी फसलों की कीमत खुद तय करे। प्रदेशाध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि किसानों की मुख्य मांगें तो अभी सरकार ने मानी ही नहीं हैं। कृषि कानूनों को खत्म कराकर ही किसान यहां से जाएंगे। सरकार अगले दौर की वार्ता चाहे 4 जनवरी को करे या फिर तारीख पर तारीख बढ़ाते रहे, किसान पीछे नहीं हटेगा। सरकार को कृषि आयोग के गठन की मांग माननी पड़ेगी। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना पड़ेगा और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की लिखित गारंटी देनी पड़ेगी। प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि 2 जनवरी को होने वाली किसान संगठनों की वार्ता के बाद आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। जिस तरह केरल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, उसी तरह उत्तर प्रदेश की सरकार भी किसानों के समर्थन में आगे आए।
शाम को ढोल की थाप पर किसानों ने किया भंगड़ा
चिल्ला बॉर्डर पर डटे किसानों ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर जमकर जश्न मनाया। महीनेभर से बार्डर पर डटे कई किसानों के परिवार भी धरनास्थल पर पहुंचे। शाम को अलाव जलाकर ढोल की थाप पर किसानों ने परिवार सहित भंगड़ा किया। बृहस्पतिवार शाम किसान रसोई में मटर-पनीर से लेकर दाल चावल, पूरी, तंदूरी रोटी और खीर बनवाई गई। प्रदेश महासचिव बीसी प्रधान ने कहा कि एक महीने से घरों से दूर रहने वाले किसान और उनके परिवारों के आगमन को देखते हुए धरनास्थल पर ही नववर्ष के जश्न की तैयारियां की गई थीं।
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शूटर पूनम पंडित भी पहुंची किसानों के समर्थन में
अंतरराष्ट्रीय शूटर पूनम पंडित बृहस्पतिवार को चिल्ला बॉर्डर पर किसानों के समर्थन में पहुंचीं। इससे पहले वे सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर भी कई दिनों तक किसानों के समर्थन में डटी रहीं। पूनम ने कहा कि तीनों कृषि कानून किसानों के डेथ वारंट से कम नहीं हैं। इन्हें सरकार को वापस लेना होगा। एमएसपी पर किसानों को लिखित गारंटी देनी होगी। कृषि कानूनों में संशोधन के बाद सरकार ने खुद ही गलतियां मान ली हैं। कानूनों में खामियां नहीं होती तो 9 संशोधन नहीं किए जाते जो कृषि कानूनों का समर्थन कर रहे हैं वो किसान नहीं हैं। किसान आंदोलन का हिस्सा बनने के लिए पूनम बुलंदशहर के सिकंदराबाद से रोजाना आ रही हैं।
दलित प्रेरणा स्थल पर किसानों ने किया योगासन
दलित प्रेरणा स्थल पर भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के बैनर तले किसानों का धरना जारी है। बृहस्पतिवार को किसानों ने योगासन कर आंदोलन तेज करने की चेतावनी सरकार को दी। राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर श्यौराज सिंह ने कहा कि किसान अपनी बात मनवाए बिना धरने से हटने वाले नहीं हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव मलिक ने किसानों को योग कराया। कई बच्चे भी धरनास्थल पर योग करते दिखे।
नव वर्ष की पूर्व संध्या में जाम ने बढ़ाई परेशानी
नववर्ष की पूर्व संध्या पर शहर की सड़कों पर जाम की समस्या ने परेशानी बढ़ाकर रख दी। रास्ते बंद होने से दिल्ली-नोएडा लिंक रोड पर देर शाम तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। सेक्टर-18 बाजार सहित आसपास की सड़कों पर वाहनों का बेतहाशा दबाव शाम के समय बढ़ गया, जिससे ट्रैफिक की रफ्तार मंद पड़ गई। डीएनडी फ्लाईवे पर भी ट्रैफिक धीमी गति से चलता दिखा।
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नोएडा। सातवें दौर की वार्ता में बुधवार को सरकार और किसानों के बीच दो मुद्दों पर सहमति बन गई, लेकिन दो मुख्य मांगों पर अभी भी किसान अड़े हुए हैं। 4 जनवरी को एक बार फिर वार्ता होगी, लेकिन इस बीच चिल्ला बॉर्डर पर किसानों के तेवर तल्ख हो गए हैं। यहां किसान नेताओं ने एलान किया कि सरकार तारीख पर तारीख बढ़ाती रहे, लेकिन किसान हटने वाले नहीं हैं। जब तक किसान आयोग के गठन और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया जाएगा, तब तक चिल्ला बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, नववर्ष की पूर्व संध्या पर किसानों ने बॉर्डर पर ही जश्न मनाया।
भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने कहा कि बुधवार को हुई वार्ता से हम संतुष्ट नहीं हैं। मांग है कि किसान आयोग का गठन कर किसानों को स्वतंत्र किया जाए। यदि उद्योगपति अपने उत्पादों की कीमत खुद तय करता है तो किसान भी अपनी फसलों की कीमत खुद तय करे। प्रदेशाध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि किसानों की मुख्य मांगें तो अभी सरकार ने मानी ही नहीं हैं। कृषि कानूनों को खत्म कराकर ही किसान यहां से जाएंगे। सरकार अगले दौर की वार्ता चाहे 4 जनवरी को करे या फिर तारीख पर तारीख बढ़ाते रहे, किसान पीछे नहीं हटेगा। सरकार को कृषि आयोग के गठन की मांग माननी पड़ेगी। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना पड़ेगा और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की लिखित गारंटी देनी पड़ेगी। प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि 2 जनवरी को होने वाली किसान संगठनों की वार्ता के बाद आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। जिस तरह केरल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, उसी तरह उत्तर प्रदेश की सरकार भी किसानों के समर्थन में आगे आए।
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शाम को ढोल की थाप पर किसानों ने किया भंगड़ा
चिल्ला बॉर्डर पर डटे किसानों ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर जमकर जश्न मनाया। महीनेभर से बार्डर पर डटे कई किसानों के परिवार भी धरनास्थल पर पहुंचे। शाम को अलाव जलाकर ढोल की थाप पर किसानों ने परिवार सहित भंगड़ा किया। बृहस्पतिवार शाम किसान रसोई में मटर-पनीर से लेकर दाल चावल, पूरी, तंदूरी रोटी और खीर बनवाई गई। प्रदेश महासचिव बीसी प्रधान ने कहा कि एक महीने से घरों से दूर रहने वाले किसान और उनके परिवारों के आगमन को देखते हुए धरनास्थल पर ही नववर्ष के जश्न की तैयारियां की गई थीं।
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शूटर पूनम पंडित भी पहुंची किसानों के समर्थन में
अंतरराष्ट्रीय शूटर पूनम पंडित बृहस्पतिवार को चिल्ला बॉर्डर पर किसानों के समर्थन में पहुंचीं। इससे पहले वे सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर भी कई दिनों तक किसानों के समर्थन में डटी रहीं। पूनम ने कहा कि तीनों कृषि कानून किसानों के डेथ वारंट से कम नहीं हैं। इन्हें सरकार को वापस लेना होगा। एमएसपी पर किसानों को लिखित गारंटी देनी होगी। कृषि कानूनों में संशोधन के बाद सरकार ने खुद ही गलतियां मान ली हैं। कानूनों में खामियां नहीं होती तो 9 संशोधन नहीं किए जाते जो कृषि कानूनों का समर्थन कर रहे हैं वो किसान नहीं हैं। किसान आंदोलन का हिस्सा बनने के लिए पूनम बुलंदशहर के सिकंदराबाद से रोजाना आ रही हैं।
दलित प्रेरणा स्थल पर किसानों ने किया योगासन
दलित प्रेरणा स्थल पर भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के बैनर तले किसानों का धरना जारी है। बृहस्पतिवार को किसानों ने योगासन कर आंदोलन तेज करने की चेतावनी सरकार को दी। राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर श्यौराज सिंह ने कहा कि किसान अपनी बात मनवाए बिना धरने से हटने वाले नहीं हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव मलिक ने किसानों को योग कराया। कई बच्चे भी धरनास्थल पर योग करते दिखे।
नव वर्ष की पूर्व संध्या में जाम ने बढ़ाई परेशानी
नववर्ष की पूर्व संध्या पर शहर की सड़कों पर जाम की समस्या ने परेशानी बढ़ाकर रख दी। रास्ते बंद होने से दिल्ली-नोएडा लिंक रोड पर देर शाम तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। सेक्टर-18 बाजार सहित आसपास की सड़कों पर वाहनों का बेतहाशा दबाव शाम के समय बढ़ गया, जिससे ट्रैफिक की रफ्तार मंद पड़ गई। डीएनडी फ्लाईवे पर भी ट्रैफिक धीमी गति से चलता दिखा।

नोएडा चिल्ला बॉर्डर पर नए साल का जश्न मनाते किसान।