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अमेरिकियों को फंसाकर हर रात 1000 डॉलर कमाने का दिया था लक्ष्य

Thu, 18 Nov 2021 01:42 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 18 Nov 2021 01:42 AM IST
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The goal was to earn 1000 dollars every night by trapping
नोएडा (सुशांत समदर्शी)। ड्रग्स केस में फंसाने के नाम पर उगाही करने वाले गिरोह ने अमेरिका के नागरिकों का डाटाबेस प्राप्त करने के लिए ई-मेल ब्लास्टिंग (एक साथ कई लोगों को ई-मेल भेजना) का सहारा लिया था। इसके लिए आरोपियों ने एक टोल फ्री नंबर भी जारी किया था जिनसे अमेरिका के वेंडर को जोड़ते थे। फिर ये वेंडर आरोपियों को ड्रग्स लेने वाले अमेरिका के नागरिकों का डाटा उपलब्ध करा देते थे। प्रत्येक आरोपी को प्रति रात एक हजार डॉलर की कमाई का लक्ष्य दिया जाता था, जो आरोपी इसे पूरा कर लेता था उसे अतिरिक्त पैसे दिए जाते थे।
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पुलिस के अनुसार, सेक्टर-62 के आइथम टावर में एपी टेक्नोमार्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी मार्च 2021 में खोली गई थी। कंप्यूटर सर्विस के नाम पर खोली गई कंपनी के सरगना विनोद लखेरा के निर्देश के हिसाब से आठों आरोपी काम करते थे। इनमें से कई आरोपी पहले कॉल सेंटर में काम भी कर चुके हैं। कॉल सेंटर रात में चलता था और इनके निशाने पर खास तौर पर अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिक होते थे। गिरोह का सरगना अमेरिका के वेंडरों से जुड़ा था। वेंडर डार्क वेब से अमेरिका के नागरिकों का डाटा प्राप्त करते थे। इसके लिए ये लोग टोल फ्री नंबर 8446788343 का इस्तेमाल करते थे। इनकी एक दिन की कमाई लगभग 3-4 हजार डॉलर थी जो भारतीय मुद्रा का लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये होता है। आठों आरोपी हर दिन अलग-अलग पचास लोगों से बातचीत करते थे। प्रति व्यक्ति करीब 100 डॉलर मांगे जाते थे जो आसानी से मिल जाते थे।
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इंटरनेट कॉलिंग कर दूरसंचार विभाग को पहुंचाया नुकसान
आरोपी इंटरनेट से अमेरिका के नागरिकों के लहजे में बात करते थे। आरोपियों को अमेरिका के टैक्स सिस्टम की भी पूरी जानकारी थी। इंटरनेट कॉलिंग कर आरोपियों ने दूरसंचार विभाग को भी करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है। जब इस फर्जीवाड़े के बारे में जानकारी मिली तो पुलिस ने दूरसंचार विभाग से मदद ली। इसके बाद पुलिस व दूरसंचार विभाग के अधिकारियों ने जांच कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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70 हजार किराये पर था ऑफिस
एडीसीपी रणविजय सिंह का कहना है कि सेक्टर-62 के आइथम टावर में मार्च से यह कॉल सेंटर चल रहा था। ऑफिस का किराया 70 हजार रुपये प्रति माह था। कर्मचारियों को 25 से 30 हजार रुपये की सैलरी दी जाती थी। आरोपियों को किस आधार पर यह ऑफिस किराये पर दिया गया। इसकी पड़ताल की जा रही है। कागजात की जांच की जा रही है। इससे पहले भी आइथम टावर में कई फर्जीवाड़े का पुलिस ने खुलासा किया है।

नोएडा में बैठकर विदेशी नागरिकों से ठगी की जा रही थी। इससे देश की सुरक्षा से लेकर अन्य तरह के खतरे हो सकते थे। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया। - रणविजय सिंह, एडीसीपी नोएडा
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