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Noida News: संगम विहार के हजारों बच्चों का भविष्य अधर में
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-20 साल से पोर्टा केबिन में चल रहे स्कूल, न छत सुरक्षित न जमीन साफ
-वन विभाग व एमसीडी के बीच जमीन विवाद ने थामी स्कूल भवन की राह
-बारिश में टपकती छतों और गिरते बोर्डों के बीच पढ़ाई को मजबूर हैं बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। देश की राजधानी के संगम विहार इलाके में आज भी बच्चे पोर्टा केबिन में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह स्थिति किसी अस्थायी इंतजाम की नहीं, बल्कि बीते 20 वर्षों से चली आ रही हकीकत की तस्वीर है। इलाके में वन विभाग और एमसीडी के बीच जमीन को लेकर जारी विवाद के कारण अब तक स्कूल भवन का निर्माण नहीं हो सका है। परिणामस्वरूप, बच्चे हर साल बारिश के मौसम में टपकती छतों, गीली दीवारों और गिरते फॉल्स सीलिंग बोर्डों के बीच जान जोखिम में डालकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
संगम विहार स्थित आई ब्लाक के एक पोर्टा केबिन स्कूल में दो पाली में लगभग 1100 छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं। सुबह की पहली पाली में करीब 600 लड़कियां, जबकि दूसरी पाली में लगभग 500 लड़के पढ़ने आते हैं। लेकिन पठन-पाठन की यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। पोर्टा केबिन के कमरे जर्जर हो चुके हैं, जिनकी छतें बारिश में टपकती हैं। पिछले कुछ हफ्तों में कई कमरों की फॉल्स सीलिंग टूटकर नीचे गिर चुकी है, जिससे बच्चों की जान खतरे में पड़ चुकी है। अभिभावकों में इसे लेकर भारी चिंता है। स्थानीय लोगों और शिक्षकों के अनुसार, स्कूल जिस भूमि पर बना है, वह तकनीकी रूप से वन विभाग की घोषित भूमि है, जबकि उसका उपयोग और कब्जा एमसीडी के पास है। इस वजह से वहां स्थायी भवन निर्माण की फाइल पिछले दो दशकों से अधर में लटकी हुई है।
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संगम विहार जी-ब्लॉक के स्कूल की स्थिति भी बदतर
संगम विहार स्थित आई ब्लाक के स्कूल की तरह जी ब्लॉक के पोर्टा केबिन स्कूल की भी है। यहां भी करीब 1000 बच्चे पढ़ाई करते हैं, लेकिन सुविधाएं बेहद सीमित और जोखिम भरी हैं। स्कूल की बिल्डिंग के लिए लंबे समय से मांग उठती रही है, लेकिन अब तक विभागीय टालमटोल के चलते कुछ नहीं हो पाया।
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-वन विभाग व एमसीडी के बीच जमीन विवाद ने थामी स्कूल भवन की राह
-बारिश में टपकती छतों और गिरते बोर्डों के बीच पढ़ाई को मजबूर हैं बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। देश की राजधानी के संगम विहार इलाके में आज भी बच्चे पोर्टा केबिन में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह स्थिति किसी अस्थायी इंतजाम की नहीं, बल्कि बीते 20 वर्षों से चली आ रही हकीकत की तस्वीर है। इलाके में वन विभाग और एमसीडी के बीच जमीन को लेकर जारी विवाद के कारण अब तक स्कूल भवन का निर्माण नहीं हो सका है। परिणामस्वरूप, बच्चे हर साल बारिश के मौसम में टपकती छतों, गीली दीवारों और गिरते फॉल्स सीलिंग बोर्डों के बीच जान जोखिम में डालकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
संगम विहार स्थित आई ब्लाक के एक पोर्टा केबिन स्कूल में दो पाली में लगभग 1100 छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं। सुबह की पहली पाली में करीब 600 लड़कियां, जबकि दूसरी पाली में लगभग 500 लड़के पढ़ने आते हैं। लेकिन पठन-पाठन की यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। पोर्टा केबिन के कमरे जर्जर हो चुके हैं, जिनकी छतें बारिश में टपकती हैं। पिछले कुछ हफ्तों में कई कमरों की फॉल्स सीलिंग टूटकर नीचे गिर चुकी है, जिससे बच्चों की जान खतरे में पड़ चुकी है। अभिभावकों में इसे लेकर भारी चिंता है। स्थानीय लोगों और शिक्षकों के अनुसार, स्कूल जिस भूमि पर बना है, वह तकनीकी रूप से वन विभाग की घोषित भूमि है, जबकि उसका उपयोग और कब्जा एमसीडी के पास है। इस वजह से वहां स्थायी भवन निर्माण की फाइल पिछले दो दशकों से अधर में लटकी हुई है।
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संगम विहार जी-ब्लॉक के स्कूल की स्थिति भी बदतर
संगम विहार स्थित आई ब्लाक के स्कूल की तरह जी ब्लॉक के पोर्टा केबिन स्कूल की भी है। यहां भी करीब 1000 बच्चे पढ़ाई करते हैं, लेकिन सुविधाएं बेहद सीमित और जोखिम भरी हैं। स्कूल की बिल्डिंग के लिए लंबे समय से मांग उठती रही है, लेकिन अब तक विभागीय टालमटोल के चलते कुछ नहीं हो पाया।
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