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Noida News: तीन तलाक देने के आरोपी को मिली अग्रिम जमानत
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- याची ने तीन बच्चों की देखभाल करने का दिया हवाला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पत्नी को एक बार में तीन तलाक देने के आरोपी को अदालत ने अग्रिम जमानत दे दी है। याची ने कहा कि उसके तीन नाबालिग बच्चे हैं, जिन्हें उसकी पत्नी ने छोड़ दिया है। उसके खिलाफ भजनपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
कड़कड़डूमा कोर्ट के विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने वकील की दलीलें सुनने व तथ्यों पर विचार करने के बाद आरोपी मोहम्मद जावेद को जमानत दे दी। उन्होंने गौर किया कि आरोपी ने जांच में सहयोग किया है और जांच अधिकारी ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की मांग नहीं की है। अदालत ने कहा कि आवेदक पर तीन नाबालिग बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी है, जिन्हें शिकायतकर्ता ने उस पर छोड़ रखा है। अगर आरोपी को जमानत नहीं दी जाती है तो उससे उसके बच्चों की देखभाल पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
अदालत ने आरोपी को गिरफ्तारी की दशा में 15 हजार रुपए के जमानती और उतनी ही राशि के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। उसके खिलाफ प्राथमिकी मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 4 और आईपीसी की धारा 506 के तहत दर्ज की गई थी।
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उसकी पत्नी ने उसपर आरोप लगाया था कि उसने एक बार में तीन बार तलाक बोलकर उसे तलाक दे दिया। दोनों की शादी 11 मई, 2011 को हुई थी। आरोपी ने कहा था कि पत्नी उस पर पैतृक संपत्ति बेचकर उसके नाम पर संपत्ति खरीदने का दबाव बनाती थी और ऐसा नहीं करने पर झगड़ा करती थी। साथ ही दहेज हत्या का केस लगाने व आत्महत्या करने की धमकी देती थी। उसके बाद उसकी पत्नी ने उसका घर 18 अप्रैल को छोड़ दिया। उसने समझौता करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। उसके बाद पत्नी ने उसपर झूठी प्राथमिकी दर्ज करा दी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पत्नी को एक बार में तीन तलाक देने के आरोपी को अदालत ने अग्रिम जमानत दे दी है। याची ने कहा कि उसके तीन नाबालिग बच्चे हैं, जिन्हें उसकी पत्नी ने छोड़ दिया है। उसके खिलाफ भजनपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
कड़कड़डूमा कोर्ट के विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने वकील की दलीलें सुनने व तथ्यों पर विचार करने के बाद आरोपी मोहम्मद जावेद को जमानत दे दी। उन्होंने गौर किया कि आरोपी ने जांच में सहयोग किया है और जांच अधिकारी ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की मांग नहीं की है। अदालत ने कहा कि आवेदक पर तीन नाबालिग बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी है, जिन्हें शिकायतकर्ता ने उस पर छोड़ रखा है। अगर आरोपी को जमानत नहीं दी जाती है तो उससे उसके बच्चों की देखभाल पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
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अदालत ने आरोपी को गिरफ्तारी की दशा में 15 हजार रुपए के जमानती और उतनी ही राशि के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। उसके खिलाफ प्राथमिकी मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 4 और आईपीसी की धारा 506 के तहत दर्ज की गई थी।
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उसकी पत्नी ने उसपर आरोप लगाया था कि उसने एक बार में तीन बार तलाक बोलकर उसे तलाक दे दिया। दोनों की शादी 11 मई, 2011 को हुई थी। आरोपी ने कहा था कि पत्नी उस पर पैतृक संपत्ति बेचकर उसके नाम पर संपत्ति खरीदने का दबाव बनाती थी और ऐसा नहीं करने पर झगड़ा करती थी। साथ ही दहेज हत्या का केस लगाने व आत्महत्या करने की धमकी देती थी। उसके बाद उसकी पत्नी ने उसका घर 18 अप्रैल को छोड़ दिया। उसने समझौता करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। उसके बाद पत्नी ने उसपर झूठी प्राथमिकी दर्ज करा दी।