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कथा भक्ति नहीं, जीवन जीने की कला : शास्त्री
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रबूपुरा(संवाद)। कस्बे में श्रीमद् भागवत कथा आयोजन समिति के तत्वावधान में मोहल्ला मीणा ठाकुरान स्थित धर्मशाला में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन वृंदावन धाम से आए कथावाचक उमानंद शास्त्री ने कहा कि कथा भक्ति नहीं, जीवन जीने की कला है। मन ही मनुष्य के बंधन और मुक्ति का कारण है। धर्म करते हुए सदैव प्रभु का चिंतन करते रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि कपिल देव भगवान ने अपनी मां हूटी को नौ प्रकार की भक्ति और योग से मुक्ति का माध्यम बताया। मनुष्य को प्रत्येक समय भगवान का नाम जपना चाहिए। इस दौरान गोपाल मीणा, डालचंद, ईश्वर सिंह, चंद्रपाल सिंह, रूपलाल कौशिक, मिथलेश देवी, रानी, विमला देवी आदि मौजूद रहे।
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पूजन सामग्री की दुकानों पर लगी भीड़
रबूपुरा। सावन का माह शुरू होने के साथ ही बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। इससे भी व्यापारियों की चेहरे पर भी मुस्कान नजर आने लगी है। चूड़ी श्रृंगार के अलावा इन दिनों भगवान भोलेनाथ एवं अन्य देवी देवताओं की पोशाकें और पूजन सामग्री की बिक्री होने लगी है। पोशाक विक्रेता वीरेंद्र गर्ग ने बताया कि सावन शुरू होते ही पूजन सामग्री की मांग बड़ी है।
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पूजन सामग्री की दुकानों पर लगी भीड़
रबूपुरा। सावन का माह शुरू होने के साथ ही बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। इससे भी व्यापारियों की चेहरे पर भी मुस्कान नजर आने लगी है। चूड़ी श्रृंगार के अलावा इन दिनों भगवान भोलेनाथ एवं अन्य देवी देवताओं की पोशाकें और पूजन सामग्री की बिक्री होने लगी है। पोशाक विक्रेता वीरेंद्र गर्ग ने बताया कि सावन शुरू होते ही पूजन सामग्री की मांग बड़ी है।
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