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Noida News: तीन माह के भीतर देनी होगी स्पोर्ट्स सिटी की समाधान योजना
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तीन माह में बताया होगा स्पोर्ट्स सिटी परियोजना का समाधान
- पीएसी ने नोएडा प्राधिकरण से मांगी पूरी रिपोर्ट, पूरे हो चुके निर्माण और खाली जमीन की रिपोर्ट दस दिन में मांगी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। लोक लेखा समिति (पीएसी) ने नोएडा प्राधिकरण से तीन माह में स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के समाधान की योजना मांगी है। प्राधिकरण को परियोजना की खाली जमीन और निर्मित स्ट्रक्चर की जानकारी भी दस दिन उपलब्ध करानी होगी। समाधान योजना तैयार करने का काम सलाहकार एजेंसी स्काईलाइन करेगी। इस बाबत निर्देश दिए जा चुके हैं।
हालांकि पीएसी की ओर से नक्शे के मिलान के आधार पर स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के वर्तमान हालात की रिपोर्ट देना खासा मुश्किल साबित होगा। पीएसी ने जिन बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है उसकी जानकरी जुटाई जा रही है। हालांकि परियोजना में प्लॉट के टुकड़े करने से पेच फंस गया है। ऐसी हालत में पहले के नक्शे और मौजूदा हालात का मिलान बेहद मुश्किल हो रहा है।
दरअसल, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने नोएडा प्राधिकरण के परफॉर्मेंस ऑडिट में स्पोर्ट्स सिटी परियोजना पर कई सवाल उठाए हैं। इन्हीं आपत्तियों पर लखनऊ में पीएसी के सामने सुनवाई हो रही है। इसमें सबसे पहले स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के मामले को उठाया गया है। दो सुनवाई के बाद भी पीएसी उक्त परियोजना को ठीक से समझ नहीं पाई है। यही वजह है कि बार-बार इसकी आंतरिक रिपोर्ट मांगी जा रही है।
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पहले चार डेवलपर थे अब 45
स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के भूखंड के आवंटन के वक्त केवल चार डेवलपर्स थे। बाद में प्लाॅट के कई टुकड़े कर 45 डेवलपर्स में बांट दिए गए। यहां सवाल यह उठ रहा है कि जिन चार डेवलपर्स को खेल सुविधाएं विकसित करनी थीं। उन सुविधाओं को इतने सारे बिल्डर कैसे विकसित करेंगे। काम का बंटवारा कैसे हुआ है। कौन सा बिल्डर कौन सी खेल सुविधा विकसित करेगा। पीएसी ने इस पर पूरा ब्यौरा मांगा है। हालात और मुश्किल इसलिए है कि जिन बिल्डरों ने खेल सुविधाओं के विकसित होने का हवाला बीते कुछ वर्ष पहले दिया था। वह स्थानीय स्तर के भी नहीं हैं।
कितनी जमीन खाली है और कितने पर हो चुका है निर्माण
परियोजना में नियम के मुताबिक 70 प्रतिशत क्षेत्र में खेल सुविधाएं और 30 प्रतिशत क्षेत्र में ग्रुप हाउसिंग, वाणिज्यिक, ग्रीन बेल्ट आदि बनाए जाने थे। जब प्लॉट के टुकड़े नहीं किए गए थे तब तक स्थिति स्पष्ट थी। अब प्लॉट के कई टुकड़े कर दिए गए हैं। ऐसे में कौन सा बिल्डर अपनी जमीन के कितने प्रतिशत क्षेत्र में खेल सुविधाएं विकसित करेगा और कितने प्रतिशत क्षेत्र में ग्रुप हाउसिंग के फ्लैट बनाएगा। इसका विवरण स्पष्ट नहीं है। वहीं पीएसी को यह जानकारी चाहिए कि इनमें से कितनी जमीन पर निर्माण हुआ है और कितनी जमीन बाकी है। जिसका पता लगाना भी मुश्किल साबित हो रहा है।
खेल सुविधाएं विकसित होने से पहले ही कुछ मामलों में मिली ओसी
प्राधिकरण ने खेल सुविधाएं विकसित होने से पहले ही कुछ मामलों में ओसी दे दी। हालांकि 2021 से इसे बंद कर दिया गया। यही नहीं कुछ मामलों में नक्शे को भी मंजूरी दे दी गई थी। यह सब सवालों के घेरे में हैं। इन सब पर प्राधिकरण को अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
स्पोर्ट्स सिटी फैक्ट फाइल :-
नोएडा प्राधिकरण ने 2010-11 में सेक्टर-78, 79, 101 और 150 के अलावा वर्ष 2014-15 में सेक्टर-150 और वर्ष 2015-16 में सेक्टर-152 में स्पोर्ट्स सिटी की योजना निकाली थी। सेक्टर-78, 79 व 101 में थ्री सी ग्रीन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को 7.27 लाख वर्गमीटर, सेक्टर-150 में लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को 8 लाख वर्गमीटर, सेक्टर-150 में थ्री सी ग्रीन डेवलपर्स स्पोर्ट्स सिटी प्राइवेट लिमिटेड को 12 लाख वर्गमीटर और सेक्टर-152 में एटीएस होम्स प्राइवेट लिमिटेड को 5 लाख वर्गमीटर जमीन का आवंटन किया गया।
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- पीएसी ने नोएडा प्राधिकरण से मांगी पूरी रिपोर्ट, पूरे हो चुके निर्माण और खाली जमीन की रिपोर्ट दस दिन में मांगी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। लोक लेखा समिति (पीएसी) ने नोएडा प्राधिकरण से तीन माह में स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के समाधान की योजना मांगी है। प्राधिकरण को परियोजना की खाली जमीन और निर्मित स्ट्रक्चर की जानकारी भी दस दिन उपलब्ध करानी होगी। समाधान योजना तैयार करने का काम सलाहकार एजेंसी स्काईलाइन करेगी। इस बाबत निर्देश दिए जा चुके हैं।
हालांकि पीएसी की ओर से नक्शे के मिलान के आधार पर स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के वर्तमान हालात की रिपोर्ट देना खासा मुश्किल साबित होगा। पीएसी ने जिन बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है उसकी जानकरी जुटाई जा रही है। हालांकि परियोजना में प्लॉट के टुकड़े करने से पेच फंस गया है। ऐसी हालत में पहले के नक्शे और मौजूदा हालात का मिलान बेहद मुश्किल हो रहा है।
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दरअसल, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने नोएडा प्राधिकरण के परफॉर्मेंस ऑडिट में स्पोर्ट्स सिटी परियोजना पर कई सवाल उठाए हैं। इन्हीं आपत्तियों पर लखनऊ में पीएसी के सामने सुनवाई हो रही है। इसमें सबसे पहले स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के मामले को उठाया गया है। दो सुनवाई के बाद भी पीएसी उक्त परियोजना को ठीक से समझ नहीं पाई है। यही वजह है कि बार-बार इसकी आंतरिक रिपोर्ट मांगी जा रही है।
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पहले चार डेवलपर थे अब 45
स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के भूखंड के आवंटन के वक्त केवल चार डेवलपर्स थे। बाद में प्लाॅट के कई टुकड़े कर 45 डेवलपर्स में बांट दिए गए। यहां सवाल यह उठ रहा है कि जिन चार डेवलपर्स को खेल सुविधाएं विकसित करनी थीं। उन सुविधाओं को इतने सारे बिल्डर कैसे विकसित करेंगे। काम का बंटवारा कैसे हुआ है। कौन सा बिल्डर कौन सी खेल सुविधा विकसित करेगा। पीएसी ने इस पर पूरा ब्यौरा मांगा है। हालात और मुश्किल इसलिए है कि जिन बिल्डरों ने खेल सुविधाओं के विकसित होने का हवाला बीते कुछ वर्ष पहले दिया था। वह स्थानीय स्तर के भी नहीं हैं।
कितनी जमीन खाली है और कितने पर हो चुका है निर्माण
परियोजना में नियम के मुताबिक 70 प्रतिशत क्षेत्र में खेल सुविधाएं और 30 प्रतिशत क्षेत्र में ग्रुप हाउसिंग, वाणिज्यिक, ग्रीन बेल्ट आदि बनाए जाने थे। जब प्लॉट के टुकड़े नहीं किए गए थे तब तक स्थिति स्पष्ट थी। अब प्लॉट के कई टुकड़े कर दिए गए हैं। ऐसे में कौन सा बिल्डर अपनी जमीन के कितने प्रतिशत क्षेत्र में खेल सुविधाएं विकसित करेगा और कितने प्रतिशत क्षेत्र में ग्रुप हाउसिंग के फ्लैट बनाएगा। इसका विवरण स्पष्ट नहीं है। वहीं पीएसी को यह जानकारी चाहिए कि इनमें से कितनी जमीन पर निर्माण हुआ है और कितनी जमीन बाकी है। जिसका पता लगाना भी मुश्किल साबित हो रहा है।
खेल सुविधाएं विकसित होने से पहले ही कुछ मामलों में मिली ओसी
प्राधिकरण ने खेल सुविधाएं विकसित होने से पहले ही कुछ मामलों में ओसी दे दी। हालांकि 2021 से इसे बंद कर दिया गया। यही नहीं कुछ मामलों में नक्शे को भी मंजूरी दे दी गई थी। यह सब सवालों के घेरे में हैं। इन सब पर प्राधिकरण को अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
स्पोर्ट्स सिटी फैक्ट फाइल :-
नोएडा प्राधिकरण ने 2010-11 में सेक्टर-78, 79, 101 और 150 के अलावा वर्ष 2014-15 में सेक्टर-150 और वर्ष 2015-16 में सेक्टर-152 में स्पोर्ट्स सिटी की योजना निकाली थी। सेक्टर-78, 79 व 101 में थ्री सी ग्रीन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को 7.27 लाख वर्गमीटर, सेक्टर-150 में लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को 8 लाख वर्गमीटर, सेक्टर-150 में थ्री सी ग्रीन डेवलपर्स स्पोर्ट्स सिटी प्राइवेट लिमिटेड को 12 लाख वर्गमीटर और सेक्टर-152 में एटीएस होम्स प्राइवेट लिमिटेड को 5 लाख वर्गमीटर जमीन का आवंटन किया गया।