{"_id":"68d411395270dfebdd079d11","slug":"smoke-rings-are-damaging-your-lungs-noida-news-c-1-gnd1002-3442660-2025-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"वर्ल्ड लंग्स डे: \nफेफड़े खराब कर रहे धुएं के छल्ले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वर्ल्ड लंग्स डे: फेफड़े खराब कर रहे धुएं के छल्ले
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
-जिला अस्पताल की ओपीडी में 25 प्रतिशत मरीज बढ़े
-डेंगू या टायफाइड के साथ निमोनिया बना रहा गंभीर स्थिति
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। धूम्रपान से उड़ते धुएं के छल्ले केवल वातावरण को ही नहीं, बल्कि इंसानी फेफड़ों को भी चुपचाप नुकसान पहुंचा रहे हैं। शहरी इलाकों में वायु गुणवत्ता पहले से ही खराब है। उस पर धूम्रपान और प्रदूषण मिलकर लोगों की सांसों पर भारी पड़ रहा है। हाल के दिनों में अस्पतालों की ओपीडी में सांस संबंधी बीमारियों के मरीज 25 प्रतिशत तक बढ़े हैं। मरीजों को खांसी, सांस फूलना, निमोनिया और लंबे समय तक बना रहने वाला बुखार जैसे लक्षणों के साथ भर्ती किया जा रहा है। कई मामलों में टीबी और लंग्स कैंसर जैसी बीमारियों की भी पुष्टि हो रही है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉक्टर अनुराग सागर बताते हैं कि अस्थमा, सांस लेने में दिक्कत, टीबी के मरीज आ रहे हैं। सिर्फ मेरी ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या 30 से 40 रहती है। इसमें युवा भी रहते हैं। युवाओं में इसका बड़ा कारण धूम्रपान भी है। अभी मौसम बदलने पर इनकी संख्या और बढ़ जाएगी। फोर्टिस हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजी विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ राहुल शर्मा ने बताते हैं कि युवा मरीजों में अस्थमा बड़ी समस्या बन गया है। इन्हेलर के इस्तेमाल के बावजूद कई मरीजों को पर्याप्त राहत नहीं मिल रही है। उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है। वहीं, बुजुर्गों में सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के मामले मौसमी बदलाव, प्रदूषण और वायरल संक्रमण की वजह से बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस साल वायरल संक्रमण के लक्षण पिछले वर्षों की तुलना में अधिक लंबे समय तक रह रहे हैं। कई मरीजों को इन्फ्लुएंजा बी निमोनिया और मिक्स्ड इन्फेक्शन की वजह से वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता पड़ी है।
डेंगू के साथ निमोनिया मरीज की स्थिति बना रही जटिल
डॉक्टरों का कहना है कि मानसून के दौरान डेंगू या टायफाइड के साथ निमोनिया जैसी सह बीमारियों के मामले भी सामने आए हैं, जो मरीजों की स्थिति को और जटिल बना रहे हैं। ऐसे में शुरुआती लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बुखार 48 घंटे से अधिक समय तक बना रहे तो यह गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है।
विज्ञापन
ई-सिगरेट भी खतरनाक
एक ओर लोग पारंपरिक सिगरेट से दूरी बना रहे हैं। वहीं ई-सिगरेट को सुरक्षित विकल्प मानने की भूल कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये भी फेफड़ों के लिए उतने ही हानिकारक हैं।
-- -- -- -- -- -- --
बचाव ही सबसे बेहतर उपाय
धूम्रपान से तुरंत दूरी बनाए।
प्रदूषण से बचने के लिए मास्क पहनें और बाहर की गतिविधियां सीमित करें।
साल में एक बार फेफड़ों की जांच कराएं।
फ्लू और निमोनिया के टीके लगवाएं।
विज्ञापन
-डेंगू या टायफाइड के साथ निमोनिया बना रहा गंभीर स्थिति
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। धूम्रपान से उड़ते धुएं के छल्ले केवल वातावरण को ही नहीं, बल्कि इंसानी फेफड़ों को भी चुपचाप नुकसान पहुंचा रहे हैं। शहरी इलाकों में वायु गुणवत्ता पहले से ही खराब है। उस पर धूम्रपान और प्रदूषण मिलकर लोगों की सांसों पर भारी पड़ रहा है। हाल के दिनों में अस्पतालों की ओपीडी में सांस संबंधी बीमारियों के मरीज 25 प्रतिशत तक बढ़े हैं। मरीजों को खांसी, सांस फूलना, निमोनिया और लंबे समय तक बना रहने वाला बुखार जैसे लक्षणों के साथ भर्ती किया जा रहा है। कई मामलों में टीबी और लंग्स कैंसर जैसी बीमारियों की भी पुष्टि हो रही है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉक्टर अनुराग सागर बताते हैं कि अस्थमा, सांस लेने में दिक्कत, टीबी के मरीज आ रहे हैं। सिर्फ मेरी ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या 30 से 40 रहती है। इसमें युवा भी रहते हैं। युवाओं में इसका बड़ा कारण धूम्रपान भी है। अभी मौसम बदलने पर इनकी संख्या और बढ़ जाएगी। फोर्टिस हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजी विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ राहुल शर्मा ने बताते हैं कि युवा मरीजों में अस्थमा बड़ी समस्या बन गया है। इन्हेलर के इस्तेमाल के बावजूद कई मरीजों को पर्याप्त राहत नहीं मिल रही है। उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है। वहीं, बुजुर्गों में सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के मामले मौसमी बदलाव, प्रदूषण और वायरल संक्रमण की वजह से बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस साल वायरल संक्रमण के लक्षण पिछले वर्षों की तुलना में अधिक लंबे समय तक रह रहे हैं। कई मरीजों को इन्फ्लुएंजा बी निमोनिया और मिक्स्ड इन्फेक्शन की वजह से वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता पड़ी है।
विज्ञापन
डेंगू के साथ निमोनिया मरीज की स्थिति बना रही जटिल
डॉक्टरों का कहना है कि मानसून के दौरान डेंगू या टायफाइड के साथ निमोनिया जैसी सह बीमारियों के मामले भी सामने आए हैं, जो मरीजों की स्थिति को और जटिल बना रहे हैं। ऐसे में शुरुआती लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बुखार 48 घंटे से अधिक समय तक बना रहे तो यह गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है।
विज्ञापन
ई-सिगरेट भी खतरनाक
एक ओर लोग पारंपरिक सिगरेट से दूरी बना रहे हैं। वहीं ई-सिगरेट को सुरक्षित विकल्प मानने की भूल कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये भी फेफड़ों के लिए उतने ही हानिकारक हैं।
बचाव ही सबसे बेहतर उपाय
धूम्रपान से तुरंत दूरी बनाए।
प्रदूषण से बचने के लिए मास्क पहनें और बाहर की गतिविधियां सीमित करें।
साल में एक बार फेफड़ों की जांच कराएं।
फ्लू और निमोनिया के टीके लगवाएं।