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Noida News: राजधानी की हवा में धुआं-धुआं, बढ़ेगी फेफड़ों की परेशानी

Fri, 06 Oct 2023 07:17 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 06 Oct 2023 07:17 PM IST
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Smoke in the air of the capital, lung problems will increase
-दिल्ली में निरंतर बढ़ता वायु प्रदूषण बन रहा परेशानी का सबब
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-ग्रैप लागू होने के बावजूद सुबह व शाम को बढ़ने लगीं दिक्कतें
-अस्थमा, सीओपीडी, लंग्स के मरीजों को सतर्क रहने की सलाह
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-5 से आठ फीसदी तक पहुंची फेफड़ों के रोग से ग्रसित मरीजों की संख्या
-200 के पार हुआ अक्तूबर के पहले सप्ताह में ही प्रदूषण का सूचकांक
-बुजुर्ग, बच्चे, व मरीजों को सुबह और शाम को सैर न करने की सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली की फिजा में बढ़ते प्रदूषण ने अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), लंग्स के मरीज, बुजुर्ग, बच्चों की समस्या बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों से फेफड़ों के अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या सामान्य की तुलना में 5 से 8 फीसदी तक बढ़ गए हैं, जो आने वाले कुछ सप्ताह में बढ़कर 20 फीसदी तक पहुंच जाएंगे। डॉक्टरों ने ऐसे लोगों को सुबह और शाम के समय खुली हवा में न घूमने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अक्तूबर के पहले सप्ताह में ही प्रदूषण का सूचकांक 200 को पार कर गया है। यदि गति इसी तरह रही तो सामान्य मरीजों को भी काफी परेशानी हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना महामारी के बाद काफी लोगों के लंग्स में दिक्कत आई हैं। प्रदूषण इस समस्या को और गंभीर बना देता है। ऐसे में लंग्स को सुरक्षित रखने के लिए प्रदूषण से क्षेत्र से दूर रहना होगा। लंग केयर फाउंडेशन के डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि करीब दो साल पहले दिल्ली के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब एक हजार बच्चों पर अध्ययन किया था। इस अध्ययन में पाया गया कि करीब 28 फीसदी बच्चों को अस्थमा है। वहीं 88 फीसदी बच्चों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। बीते समय में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ समस्या भी बढ़ रही है। जो चिंता का विषय है।
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इस अध्ययन पर राजीव खुराना ने कहा कि सरकार को स्कूलों में ऐसे बच्चों के लिए व्यवस्था करने को कहा गया है। साथ ही सभी स्कूलों को ऐसे बच्चों की पहचान करने, उनके लिए अलग से आपात चिकित्सा की व्यवस्था करने की अपील की गई है। उनका कहना है कि फाउंडेशन एक बार फिर से बच्चों में लंग्स से जुड़े रोग का आंकड़े जुटाने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही सरकार बच्चों की सुरक्षा के लिए गाइडलाइन जारी करने के लिए सरकार को सिफारिश दी है।
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रखना होगा लंग्स का ध्यान
वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट (वीपीसीआई), दिल्ली में निदेशक डॉ. राज कुमार ने कहा कि मौसम सर्द होने के साथ लंग्स की समस्या बढ़ जाती है। आने वाले दिनों में कोहरा पड़ेगा, जो सांस के मरीजों की परेशानी को बढ़ा देगा। ऐसे में सांस से जुड़े सभी रोगियों को अपने लंग्स का विशेष ध्यान देने की जरूरत है।


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सुबह-शाम ठहलने से बचें
प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच डॉक्टरों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। एम्स के पल्मोनरी विभाग के प्रमुख व प्रोफेसर डॉ अनंत मोहन ने कहा कि मौसम सर्द होने के साथ आबोहवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। इसका असर हमारी छाती और सांस की नली पर सीधा पड़ता है। जिन लोगों को सांस की दिक्कत है वह सुबह और शाम के समय बाहर निकलने से बचें। दोपहर के समय टहलने के लिए निकलें। प्रदूषण से बचने के लिए मास्क का प्रयोग करें।
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