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ग्राउंड रिपोर्ट: हाथ में किताब, आंखों में सवाल, मगर जवाब देने को शिक्षक नहीं; बच्चे स्क्रीन पर पढ़ने को मजबूर

Wed, 09 Sep 2026 11:51 AM IST
Vijay Singh Pundir अंकुर त्रिपाठी/ पुनीत कुमार, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
अंकुर त्रिपाठी/ पुनीत कुमार, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Published by: Vijay Singh Pundir Updated Wed, 09 Sep 2026 11:51 AM IST
सार

जेवर क्षेत्र के 20 से अधिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई का तरीका बदलता दिखाई दे रहा है। बच्चों को पढ़ाने के लिए वीडियो और स्मार्ट स्क्रीन का सहारा लिया जा रहा है। 

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Shortage of teachers in several schools in Jewar
ग्राउंड रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कक्षा में कदम रखते ही सबसे पहले नजर बच्चों पर जाती है। सामने किताबें खुली हैं, कॉपियां रखी हैं और सभी की निगाहें कक्षा में लगे स्क्रीन पर टिकी हैं। स्क्रीन पर वीडियो चल रहा है और उसी के सहारे बच्चे पाठ समझने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन कक्षा में उस समय कोई शिक्षक मौजूद नहीं है।

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वीडियो में शिक्षक बच्चों को पाठ समझा रहा है, जबकि असली कक्षा में बैठे बच्चे स्क्रीन देखकर आगे बढ़ रहे हैं। किसी बच्चे को बात समझ आती है तो वह कॉपी में लिखने लगता है। किसी के सामने सवाल अटक जाता है तो वह कुछ देर स्क्रीन को देखता रहता है। सवाल पूछने के लिए सामने कोई शिक्षक नहीं है, इसलिए वह चुपचाप बैठा रहता है।
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कक्षा का यह दृश्य कुछ देर तक ऐसा ही चलता रहता है। स्क्रीन पर पाठ बदलता है और बच्चे अपनी कॉपियों में उसे उतारते जाते हैं। पढ़ाई हो रही है, लेकिन शिक्षक और बच्चे के बीच वह सीधा संवाद गायब है, जो किसी भी कक्षा की सबसे जरूरी कड़ी माना जाता है।

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एक बच्चे की नजर बार-बार स्क्रीन से हटकर खाली शिक्षक की कुर्सी की ओर जाती है। फिर वह दोबारा वीडियो देखने लगता है। उसके पास पाठ को लेकर कोई सवाल है या नहीं, यह पूछने वाला उस समय कोई नहीं है।

यह तस्वीर सिर्फ एक कक्षा की नहीं है। जेवर क्षेत्र के 20 से अधिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई का तरीका बदलता दिखाई दे रहा है। बच्चों को पढ़ाने के लिए वीडियो और स्मार्ट स्क्रीन का सहारा लिया जा रहा है। तकनीक पाठ तो चला सकती है, लेकिन बच्चे की समझ में कहां अड़चन आ रही है, यह जानने के लिए शिक्षक की जरूरत बनी रहती है। सबसे मार्मिक तस्वीर उन बच्चों की है जो किताब और कॉपी लेकर बैठे हैं, पढ़ना चाहते हैं, लेकिन उनकी पढ़ाई स्क्रीन तक सीमित होकर रह गई है। बच्चे कक्षा में मौजूद हैं, पाठ भी चल रहा है, मगर शिक्षक के बिना पढ़ाई और बच्चों के बीच एक दूरी साफ दिखाई देती है।

बच्चों की खामोशी में छिपी है परेशानी
कक्षा में सबसे अधिक पीड़ा उन बच्चों की है, जिन्हें किसी विषय को समझने में थोड़ा अधिक समय लगता है। वे बार-बार शिक्षक की ओर देखते हैं, लेकिन शिक्षक दूसरी कक्षा में व्यस्त होते हैं। धीरे-धीरे सवाल पूछने के लिए उठे हाथ नीचे हो जाते हैं। पढ़ाई में पीछे रह रहे बच्चों के लिए यह स्थिति और कठिन हो जाती है।

शिक्षक देना चाहते हैं समय, व्यवस्था नहीं दे रही मौका
शिक्षकों का कहना है कि उन्हें भी बच्चों को पूरा समय देकर पढ़ाना अच्छा लगता है। बच्चों को स्मार्ट बोर्ड के सामने बैठाना उनकी पहली पसंद नहीं, बल्कि मजबूरी है। एक कक्षा में पढ़ाते समय दूसरी कक्षा को खाली नहीं छोड़ा जा सकता, इसलिए वीडियो और डिजिटल सामग्री का सहारा लेना पड़ रहा है। प्राथमिक के शिक्षक जूनियर कक्षाओं की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। वहीं अभिभावक रश्मि और अनुप्रिया ने बताया कि बच्चों के पास घर पर पढ़ाई में मदद करने वाला कोई नहीं है, उनके लिए स्कूल का शिक्षक ही सबसे बड़ा सहारा है। ऐसे में शिक्षक की कमी केवल स्कूल की व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के भविष्य का सवाल है, जो हर दिन कक्षा में बैठकर किसी के समझाने का इंतजार करते हैं।

स्कूल    छात्र संख्या   शिक्षक
कंपोजिट स्कूल तिरथली 410 6
कंपोजिट स्कूल जेवर खादर 410 8
प्राथमिक स्कूल घनसिया 78 1
प्राथमिक स्कूल जहांगीरपुर- 2 153 3
प्राथमिक स्कूल बांकापुर  50 1
कंपोजिट स्कूल बीकापुर 60 2

एकल स्कूल - प्राथमिक स्कूल गोविंदगढ़, परसौदा, बूढ़ा घरबार आदि
नोट - शिक्षकों की ओर से मिला डेटा

प्रतिदिन कई पीरियड में शिक्षक नहीं होते हैं। सवाल के जवाब कैसे पूछे। - कुमकुम, छात्रा
पूरे दिन डिजिटल बोर्ड से ही पढ़ने की मजबूरी है। हर दिन यही हाल है। - मनीष,छात्र
डिजिटल बोर्ड पर वीडियो चलाकर शिक्षक दूसरे कक्षा में चले जाते हैं। - नीतू, छात्रा
कई सवालों के जवाब ही नहीं मिल पाते हैं। शिक्षक कहते हैं कि बाद में उत्तर बता देंगे। - लवकुश, छात्र
सरप्लस की प्रक्रिया चल रही है। जल्द सभी स्कूलों में छात्रों की संख्या के हिसाब से शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। - राहुल पंवार, बेसिक शिक्षा अधिकारी

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