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Noida News: सरकारी अस्पतालों में नहीं बदलतीं चादरें, हर माह होता भुगतान

Tue, 28 Oct 2025 12:16 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा Updated Tue, 28 Oct 2025 12:16 AM IST
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Sheets are not changed in government hospitals, payment is made every month
12 सीकेटीपी-5- परिचय-जिला अस्पताल के कुछ बेड में नहीं बिछे चादर । संवाद
चित्रकूट। जिला अस्पताल समेत सीएचसी में जिम्मेदारों की लापरवाही से मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं समय से मिलती नहीं। यहां पर न तो समय पर बेड की चादर बदलती है और न ही धुलती हैं। जबकि एक बेड की चादर बदलने, धुलने व वार्ड की साफ सफाई के नाम पर हर माह हजारों रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में गंदे चादर पर मरीज लेटते हैं। कई बेडों पर मरीज बिना चादर के लेटे नजर आए। इससे मरीजों को और बीमार होने का खतरा बढ़ा है।
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जिला अस्पताल में करीब एक साल पहले सात दिन में सात अलग-अलग रंग के चादर बदलने का नियम लागू किया गया था,लेकिन अब तो चादर कब बदले जाते हैं, यह किसी को पता ही नहीं चलता है। अधिक गंदे होने के बाद ही चादर बदले जाते हैं। वह भी जब मरीज कहते हैं। अब तो लागू नियम का कोई पालन नहीं हो रहा है।
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इससे मरीजों को बीमारी ठीक न होने का भी खतरा और बढ़ जाता है। रविवार को इमरजेंसी में कई बेडों से चादर ही गायब थे। जबकि जिला अस्पताल में हर माह बेड के चादर, वार्ड की साफ सफाई व पेड़-पौधों की देखभाल के लिए करीब ढाई लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बाद भी प्रतिदिन चद्दर बदलने का नियम पूरी तरह से लागू नहीं हो पा रहा है।
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मऊ-मानिकपुर-राजापुर। जनपद में मऊ, रामनगर, सरैंया, मानिकपुर, शिवरामपुर, राजापुर, पहाड़ी में सीएचसी हैं। जो 30-30 बेड की हैं। इनमें भी प्रतिदिन चादर बदलने का नियम लागू नहीं है। यहां पर हफ्तों में भी चादर नहीं बदले जाते हैं। एक ही चादर में कई-कई मरीजों को लिटाने के बाद ही बदलते हैं। इसके बाद भी हर माह एक सीएचसी से 72 हजार रुपये का बजट निकाला जाता है। रविवार को पड़ताल में राजापुर, पहाड़ी, मानिकपुर सीएचसी में कई दिनों पुराने चादर बिछाए हुए मिले। जो काफी गंदे थे।

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इनसेट

चित्रकूट। जिला अस्पताल व सीएचसी में एक बेड का चादर बदलने, धुलने, वार्ड की साफ सफाई, शौचालय की सफाई, बागवानी गार्ड के नाम पर 24 सौ रुपये खर्च दिखाया जाता है। जबकि लोगों का कहना है कि जब प्रतिदिन चादर ही नहीं बदले जाते तो हर माह इतनी धनराशि क्यों निकाली जाती है। कहीं इसमें भी तो सरकारी धन का बंदरबांट नहीं किया जाता है।




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सीएमओ डॉ भूपेश द्विवेदी ने बताया कि हर साल चादर धुलाई, साफ सफाई सहित अन्य कामों का टेंडर होता है। सीएचसी पर एक बेड पर 24 सौ रुपये का बजट रहता है। प्रतिदिन चद्दर बदलने के निर्देश दिए गए हैं। अगर कहीं से कोई भी शिकायत आती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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