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Noida News: दूसरी शादी रही नाकाम, घरेलू हिंसा की शिकार महिला को तीन लाख मुआवजा
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Iवैकल्पिक आवास सुविधा देने का भी आदेश
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Iएक मां ने बेटी की खातिर दूसरी शादी की। सोचा कि बेटी को पिता का साया मिलेगा और वह अपनी जिंदगी भी नए सिरे से शुरू करेंगी लेकिन समय बीतने के साथ महिला को मिली प्रताड़ना और बेटी को सौतेला व्यवहार।
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Iदूसरे पति से दो बेटियों ने और जन्म लिया। अब दूसरा पति शराब पीकर सौतेली बेटी को जान से मारने की धमकी देता और पत्नी को तीसरी बेटी जन्म देने के लिए कोसता और मारपीट करता। ऐसे में महिला अपनी और बेटियों की सुरक्षा के लिए ससुराल छोड़ विधवा मां के पास रहने लगी। इस महिला को घरेलू हिंसा कानून के जरिये अदालत से बड़ी राहत मिली है।
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Iअदालत ने महिला की याचिका पर आंशिक न्याय के तौर पर उसके पति को आदेश दिया है कि एक माह के भीतर तीन लाख रुपये एकमुश्त मुआवजा दे। साथ ही महिला को वैकल्पिक आवास की सुविधा देने का आदेश दिया है। इस निर्णय के साथ न्यायिक मजिस्ट्रेट ईशांक राजपूत ने 27 सितंबर को जारी फैसले में आदेश दिया है कि महिला के साथ किसी भी प्रकार की शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक हिंसा न की जाए। उन्होंने कहा कि पत्नी होने के नाते उनको आवास सुविधा उपलब्ध कराने का दायित्व आरोपी पक्ष का है। यदि आवास सुविधा नहीं दे सकते तो महिला के प्रार्थनापत्र दाखिल करने की तिथि से पांच हजार रुपये प्रतिमाह अदा करें।
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Iअदालत ने पाया कि पीड़िता को साल 2022 में धारा-125 के तहत 10 हजार रुपये प्रतिमाह भरण पोषण भत्ता प्राप्त हो रहा है। पीड़िता की दूसरी शादी साल 2015 में हुई थी। घरेलू हिंसा के कारण साल 2022 से अलग रह रही थी। पति एक अस्पताल में 40 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी करता है।I
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Iएक मां ने बेटी की खातिर दूसरी शादी की। सोचा कि बेटी को पिता का साया मिलेगा और वह अपनी जिंदगी भी नए सिरे से शुरू करेंगी लेकिन समय बीतने के साथ महिला को मिली प्रताड़ना और बेटी को सौतेला व्यवहार।
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Iदूसरे पति से दो बेटियों ने और जन्म लिया। अब दूसरा पति शराब पीकर सौतेली बेटी को जान से मारने की धमकी देता और पत्नी को तीसरी बेटी जन्म देने के लिए कोसता और मारपीट करता। ऐसे में महिला अपनी और बेटियों की सुरक्षा के लिए ससुराल छोड़ विधवा मां के पास रहने लगी। इस महिला को घरेलू हिंसा कानून के जरिये अदालत से बड़ी राहत मिली है।
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Iअदालत ने महिला की याचिका पर आंशिक न्याय के तौर पर उसके पति को आदेश दिया है कि एक माह के भीतर तीन लाख रुपये एकमुश्त मुआवजा दे। साथ ही महिला को वैकल्पिक आवास की सुविधा देने का आदेश दिया है। इस निर्णय के साथ न्यायिक मजिस्ट्रेट ईशांक राजपूत ने 27 सितंबर को जारी फैसले में आदेश दिया है कि महिला के साथ किसी भी प्रकार की शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक हिंसा न की जाए। उन्होंने कहा कि पत्नी होने के नाते उनको आवास सुविधा उपलब्ध कराने का दायित्व आरोपी पक्ष का है। यदि आवास सुविधा नहीं दे सकते तो महिला के प्रार्थनापत्र दाखिल करने की तिथि से पांच हजार रुपये प्रतिमाह अदा करें।
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Iअदालत ने पाया कि पीड़िता को साल 2022 में धारा-125 के तहत 10 हजार रुपये प्रतिमाह भरण पोषण भत्ता प्राप्त हो रहा है। पीड़िता की दूसरी शादी साल 2015 में हुई थी। घरेलू हिंसा के कारण साल 2022 से अलग रह रही थी। पति एक अस्पताल में 40 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी करता है।I