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Noida News: टेंडर विवाद में फंसी सफाई व्यवस्था
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कूड़े के ढेर के बीच से गुजरते बच्चे। संवाद
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-तावडू में कचरा निस्तारण ठप, डंपिंग यार्ड में जलते कूड़े से संकट में सांसें
-धुएं और गंदगी से लोग परेशान
मोहम्मद शाहिद मेवाती
तावडू। नगर में कचरा निस्तारण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नगर से डोर-टू-डोर उठाया जा रहा कचरा डंपिंग यार्ड तक तो पहुंच रहा है, लेकिन उसके आगे निस्तारण न होने के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कचरे के ढेर लगातार बढ़ रहे हैं और स्थिति को संभालने के बजाय उन्हें जलाकर खत्म करने की कोशिश की जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है और स्थानीय लोग गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
नगर से करीब ढाई किलोमीटर दूर अरावली पहाड़ी की तलहटी में बने अस्थायी डंपिंग यार्ड पर शहर का सारा कचरा डाला जा रहा है। यहां निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने के कारण कचरे के ढेरों में बार-बार आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। धुएं और बदबू के कारण आसपास रहने वाले लोगों का जीवन दूभर हो गया है और पर्यावरण भी लगातार दूषित हो रहा है। 7 जनवरी को सजग एजेंसी को लगभग 5 करोड़ 85 लाख रुपये के टेंडर के तहत डोर-टू-डोर कचरा उठाने और डंपिंग यार्ड तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। एजेंसी द्वारा 15 वाहन इस कार्य में लगाए गए हैं और वे नियमित रूप से कचरा पहुंचा रहे हैं।
लेकिन कचरे के अंतिम निस्तारण के लिए अलग से किया जाने वाला टेंडर दो एजेंसियों के बीच उलझ गया है, जिसके कारण पूरी प्रक्रिया ठप पड़ी है। नगर पालिका के मुताबिक कचरे का निस्तारण धारूहेड़ा डंपिंग स्टेशन पर किया जाना था, लेकिन कचरा उठाने वाली एजेंसी केवल 20 किलोमीटर तक ही कचरा ले जाने की शर्त पर काम कर रही है, जबकि धारूहेड़ा तक आने-जाने की दूरी लगभग 30 किलोमीटर है। इसी कारण एजेंसी वहां कचरा ले जाने से पीछे हट रही है। दूसरी ओर निस्तारण का ठेका लेने वाली एजेंसी का कहना है कि यदि उन्हें डंपिंग यार्ड से कचरा उठाने का अलग से भुगतान किया जाए, तभी वे सही तरीके से निस्तारण कर पाएंगे।
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लोग भुगत रहे हैं खामियाजा :
इस खींचतान का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। डंपिंग यार्ड पर कचरे को चोरी-छिपे जलाए जाने के आरोप भी लग रहे हैं, जिससे जहरीला धुआं फैल रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय निवासियों ने इसे नगर पालिका प्रशासन की बड़ी लापरवाही बताया है।
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समस्या के समाधान का हो रहा प्रयास : चेयरपर्सन
वहीं नगर पालिका चेयरपर्सन सुनीता सोनी का कहना है कि इस समस्या को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है और जल्द ही इसका समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, कचरे में लगने वाली आग की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, तावडू में कचरा निस्तारण की व्यवस्था टेंडर विवाद में फंसकर रह गई है और जब तक इसका समाधान नहीं होता, तब तक लोगों को प्रदूषण और गंदगी की इस समस्या से जूझना पड़ सकता है।
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-धुएं और गंदगी से लोग परेशान
मोहम्मद शाहिद मेवाती
तावडू। नगर में कचरा निस्तारण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नगर से डोर-टू-डोर उठाया जा रहा कचरा डंपिंग यार्ड तक तो पहुंच रहा है, लेकिन उसके आगे निस्तारण न होने के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कचरे के ढेर लगातार बढ़ रहे हैं और स्थिति को संभालने के बजाय उन्हें जलाकर खत्म करने की कोशिश की जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है और स्थानीय लोग गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
नगर से करीब ढाई किलोमीटर दूर अरावली पहाड़ी की तलहटी में बने अस्थायी डंपिंग यार्ड पर शहर का सारा कचरा डाला जा रहा है। यहां निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने के कारण कचरे के ढेरों में बार-बार आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। धुएं और बदबू के कारण आसपास रहने वाले लोगों का जीवन दूभर हो गया है और पर्यावरण भी लगातार दूषित हो रहा है। 7 जनवरी को सजग एजेंसी को लगभग 5 करोड़ 85 लाख रुपये के टेंडर के तहत डोर-टू-डोर कचरा उठाने और डंपिंग यार्ड तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। एजेंसी द्वारा 15 वाहन इस कार्य में लगाए गए हैं और वे नियमित रूप से कचरा पहुंचा रहे हैं।
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लेकिन कचरे के अंतिम निस्तारण के लिए अलग से किया जाने वाला टेंडर दो एजेंसियों के बीच उलझ गया है, जिसके कारण पूरी प्रक्रिया ठप पड़ी है। नगर पालिका के मुताबिक कचरे का निस्तारण धारूहेड़ा डंपिंग स्टेशन पर किया जाना था, लेकिन कचरा उठाने वाली एजेंसी केवल 20 किलोमीटर तक ही कचरा ले जाने की शर्त पर काम कर रही है, जबकि धारूहेड़ा तक आने-जाने की दूरी लगभग 30 किलोमीटर है। इसी कारण एजेंसी वहां कचरा ले जाने से पीछे हट रही है। दूसरी ओर निस्तारण का ठेका लेने वाली एजेंसी का कहना है कि यदि उन्हें डंपिंग यार्ड से कचरा उठाने का अलग से भुगतान किया जाए, तभी वे सही तरीके से निस्तारण कर पाएंगे।
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लोग भुगत रहे हैं खामियाजा :
इस खींचतान का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। डंपिंग यार्ड पर कचरे को चोरी-छिपे जलाए जाने के आरोप भी लग रहे हैं, जिससे जहरीला धुआं फैल रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय निवासियों ने इसे नगर पालिका प्रशासन की बड़ी लापरवाही बताया है।
समस्या के समाधान का हो रहा प्रयास : चेयरपर्सन
वहीं नगर पालिका चेयरपर्सन सुनीता सोनी का कहना है कि इस समस्या को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है और जल्द ही इसका समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, कचरे में लगने वाली आग की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, तावडू में कचरा निस्तारण की व्यवस्था टेंडर विवाद में फंसकर रह गई है और जब तक इसका समाधान नहीं होता, तब तक लोगों को प्रदूषण और गंदगी की इस समस्या से जूझना पड़ सकता है।