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Noida News: बच्चों के कफ सिरप की बिक्री में आई भारी गिरावट
Sun, 12 Oct 2025 12:38 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Sun, 12 Oct 2025 12:38 AM IST
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सांकेतिक
फिरोजाबाद। मध्यप्रदेश और राजस्थान में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से 11 से अधिक बच्चों की मौत के बाद जिले में भी बिक्री को लेकर सख्ती शुरू हो गई है। शासन की सख्ती और अभिभावकों की बढ़ती जागरूकता का असर अब बाजार में साफ दिखने लगा है। जिले में बच्चों के कफ सिरप की बिक्री में कमी आई है। मेडिकल स्टोर संचालकों के अनुसार, बीते कुछ दिनों में इसकी मांग लगभग आधी हो गई है। वहीं, चिकित्सक भी अब कफ सिरप बजाय वैकल्पिक उपचारों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
दवा बाजार से जुड़े थोक विक्रेता प्रशांत कुमार ने बताया कि पहले जहां रोजाना कई कंपनियों के कफ सिरप की डिमांड बनी रहती थी, वहीं अब बिक्री बेहद सीमित रह गई है। अभिभावक खुद भी बच्चों को सिरप देने से बचने लगे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले हफ्ते की तुलना में इस हफ्ते बिक्री में करीब 40 से 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। छोटे मेडिकल स्टोरों पर यह गिरावट और भी अधिक है।
इस बदलाव की एक बड़ी वजह शासन का निर्देश है, जिसके तहत बिना डॉक्टर की पर्ची के बच्चों को कोई भी कफ सिरप बेचने पर पाबंदी लगाई गई है। औषधि प्रशासन ने जिले भर में मेडिकल स्टोर, निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की जांच शुरू कर दी है। अब तक दो अस्पताल और कई मेडिकल स्टोरों से कुल 3 नमूने लिए जा चुके हैं, जिनमें पांच नमूने बच्चों के कफ सिरप के हैं। सभी सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
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ड्रग इंस्पेक्टर देशबंधु के अनुसार,लगातार फील्ड में सक्रिय हैं। बच्चों को दी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता, वैधता और वितरण पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। बच्चों के अस्पतालों और क्लीनिकों पर भी नजर रखी जा रही है। बाजार में आई इस गिरावट का दूसरा कारण डॉक्टरों की सोच में आया बदलाव भी है। कई चिकित्सक अब सामान्य खांसी-जुकाम में कफ सिरप की जगह घरेलू उपचार या हल्की दवाएं सुझा रहे हैं। इससे सिरप की मांग घट गई है।
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दवा बाजार से जुड़े थोक विक्रेता प्रशांत कुमार ने बताया कि पहले जहां रोजाना कई कंपनियों के कफ सिरप की डिमांड बनी रहती थी, वहीं अब बिक्री बेहद सीमित रह गई है। अभिभावक खुद भी बच्चों को सिरप देने से बचने लगे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले हफ्ते की तुलना में इस हफ्ते बिक्री में करीब 40 से 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। छोटे मेडिकल स्टोरों पर यह गिरावट और भी अधिक है।
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इस बदलाव की एक बड़ी वजह शासन का निर्देश है, जिसके तहत बिना डॉक्टर की पर्ची के बच्चों को कोई भी कफ सिरप बेचने पर पाबंदी लगाई गई है। औषधि प्रशासन ने जिले भर में मेडिकल स्टोर, निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की जांच शुरू कर दी है। अब तक दो अस्पताल और कई मेडिकल स्टोरों से कुल 3 नमूने लिए जा चुके हैं, जिनमें पांच नमूने बच्चों के कफ सिरप के हैं। सभी सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
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ड्रग इंस्पेक्टर देशबंधु के अनुसार,लगातार फील्ड में सक्रिय हैं। बच्चों को दी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता, वैधता और वितरण पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। बच्चों के अस्पतालों और क्लीनिकों पर भी नजर रखी जा रही है। बाजार में आई इस गिरावट का दूसरा कारण डॉक्टरों की सोच में आया बदलाव भी है। कई चिकित्सक अब सामान्य खांसी-जुकाम में कफ सिरप की जगह घरेलू उपचार या हल्की दवाएं सुझा रहे हैं। इससे सिरप की मांग घट गई है।