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Noida News: विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस - वरिष्ठ नागरिकों की नियमित जांच जरूरी
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-चिकित्सक बोले, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार है स्वस्थ जीवन की कुंजी
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। उम्र बढ़ने के साथ बीमारियों का खतरा ज्यादा हो जाता है, लेकिन सही समय पर जांच और इलाज से इन्हें काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि जो लोग रोज टहलते हैं, संतुलित खाना खाते हैं और लोगों से जुड़े रहते हैं, वे लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं।
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर चिकित्सकों ने बताया कि अक्सर दवाइयों को लेकर बनी गलतफहमी से बुजुर्गों की स्वास्थ्य बिगड़ जाता है। इसलिए उनसे डरना नहीं बल्कि नियमित इलाज कराना चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों में विशेष रूप से उच्च रक्तचाप, सांस लेने में तकलीफ, पुरानी खांसी, घुटनों में दर्द, पार्किंसन, और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। अस्पतालों में भारी संख्या में इन बीमारियों से ग्रस्त मरीज पहुंच रहे हैं। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के मेडिसन विभाग के असीस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपक वर्मा ने बताया कि जो लोग नियमित रूप से टहलते हैं, संतुलित आहार लेते हैं और सामाजिक रूप से सक्रिय रहते हैं, वे अन्य लोगों की तुलना में अधिक स्वस्थ जीवन जीते हैं। वहीं, दवाओं को लेकर बनी भ्रांतियों से कई बार बुजुर्गों की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है। एक अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉ. दिनेश कुमार त्यागी ने कहा कि जो लोग एक्टिव रहते हैं, उनमें बीमारियों का खतरा बहुत कम है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। उम्र बढ़ने के साथ बीमारियों का खतरा ज्यादा हो जाता है, लेकिन सही समय पर जांच और इलाज से इन्हें काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि जो लोग रोज टहलते हैं, संतुलित खाना खाते हैं और लोगों से जुड़े रहते हैं, वे लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं।
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर चिकित्सकों ने बताया कि अक्सर दवाइयों को लेकर बनी गलतफहमी से बुजुर्गों की स्वास्थ्य बिगड़ जाता है। इसलिए उनसे डरना नहीं बल्कि नियमित इलाज कराना चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों में विशेष रूप से उच्च रक्तचाप, सांस लेने में तकलीफ, पुरानी खांसी, घुटनों में दर्द, पार्किंसन, और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। अस्पतालों में भारी संख्या में इन बीमारियों से ग्रस्त मरीज पहुंच रहे हैं। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के मेडिसन विभाग के असीस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपक वर्मा ने बताया कि जो लोग नियमित रूप से टहलते हैं, संतुलित आहार लेते हैं और सामाजिक रूप से सक्रिय रहते हैं, वे अन्य लोगों की तुलना में अधिक स्वस्थ जीवन जीते हैं। वहीं, दवाओं को लेकर बनी भ्रांतियों से कई बार बुजुर्गों की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है। एक अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉ. दिनेश कुमार त्यागी ने कहा कि जो लोग एक्टिव रहते हैं, उनमें बीमारियों का खतरा बहुत कम है।
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