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शाहजहां और औरंगजेब से जुड़ी सामग्री हटाने की मांग याचिका सुनने से इनकार

Thu, 16 Dec 2021 12:51 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 16 Dec 2021 12:51 AM IST
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Refusal to hear petition seeking removal of material related to Shahjahan and Aurangzeb
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने बुधवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया जिसमें राष्ट्रीय शैक्षिक अनसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को 12वीं कक्षा की इतिहास की किताब से शाहजहां और औरंगजेब से संबंधित सामग्री हटाने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था।
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याचिका में कहा गया था कि एनसीईआरटी को ये सामग्री हटाने और सुधार करने का निर्देश दिया जाए कि इन मुगल शासकों के काल में उन मंदिरों की मरम्मत के लिए अनुदान दिया गया जो युद्धों में क्षतिग्रस्त हुए थे।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल एवं न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने याची को फटकार लगाते हुए कहा कि वे याची पर जुर्माना लगाएंगे अगर वह अपनी कथित जनहित याचिका के जरिये मुगल शासकों की नीतियों का पुनरीक्षण उनसे करवाना चाहता है। याचिका दायर करने वालों ने दावा किया था कि वह मेहनती और लगनशील छात्र हैं।
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खंडपीठ ने याची से कहा कि आप कह रहे हैं कि शाहजहां और औरंगजेब की मंदिर आदि की मरम्मत के लिए अनुदान देने की नीति नहीं थी, इससे आपको दिक्कत है। क्या आप ये चाहते हैं कि हम उनकी नीतियों के बारे में निर्णय करें? क्या हाईकोर्ट ये करेगी? अदालत ने कहा कि ये याचिका न्यायिक समय को नष्ट कर रही है। अदालत ने याचिकाकर्ता को बिना शर्त याचिका वापस लेने की अनुमति दी।
याचिकाकर्ताओं संजीव विकल और देपिंदर सिंह विर्क ने दावा किया कि एनसीईआरटी के पास मुगल शासकों से संबंधित उस सामग्री का कोई साक्ष्य या सूचना नहीं जो स्कूलों में पढ़ाई जा रही है। मुगलों के कार्यों को गलत रोशनी में दिखाया जा रहा है।
याचिका में कहा गया है कि 12वीं कक्षा की इतिहास की पुस्तक ‘थीम्स इन इंडियन हिस्ट्री पार्ट-2’ में पृष्ठ 234 पर पैराग्राफ में दी गई सामग्री बिना किसी वैध सूचना या जानकारी के प्रकाशित की गई है। ये सामग्री केवल मुगल शासक शाहजहां और औरंगजेब के शासन को महिमामंडित करने की मंशा से डाली गई है।
याचिका में ये भी कहा गया है कि ये सर्वविदित तथ्य है कि मुगल शासकों ने हिंदुओं पर धार्मिक आयोजन और यात्राओं पर भारी कर लगाए थे। ये बात किसी से छिपी नहीं है कि मुगल शासकों ने गैर मुस्लिमों को धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने के लिए विवश किया था।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने उक्त सामग्री के स्रोत की सूचना प्राप्त करने के लिए एनसीईआरटी के पास आरटीआई भी दाखिल की थी। एनसीईआरटी के जन सूचना अधिकारी ने सूचना दी कि उनके रिकार्ड में इस सामग्री के स्रोत से संबंधित कोई सूचना नहीं है।
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