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UP: इस मंदिर में राम और रावण दोनों की होती है पूजा, यहां नहीं किया जाता 'लंकेश' का दहन; सावन में आप जरूर जाएं
Thu, 18 Jul 2024 01:01 PM IST
विजय पुंडीर
शशांक मिश्रा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
शशांक मिश्रा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Published by: विजय पुंडीर
Updated Thu, 18 Jul 2024 01:01 PM IST
सार
ऐसी मान्यता है कि ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में लंकापति रावण का जन्म हुआ था। रावण के पिता विश्रवा ऋषि ने ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में एक अष्टभुजी शिवलिंग की स्थापना करवाई थी। यह शिवलिंग आज भी वही विराजमान है।
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ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में है यह मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यदि आप ग्रेटर नोएडा में है या वह जाने वाले हैं तो इस सावन के महीने में बिसरख गांव जरूर जाएं। बिसरख गांव में एक अनोखे मंदिर के बारे में हम आपको बताने जा रहे है। यह अनोखा शिव मंदिर उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में स्थित है, साथ ही ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव का उल्लेख शिवपुराण में भी मिलता है।
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यहां रामलीला का आयोजन नहीं होता
ऐसी मान्यता है कि ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में लंकापति रावण का जन्म हुआ था। रावण के पिता विश्रवा ऋषि ने ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में एक अष्टभुजी शिवलिंग की स्थापना करवाई थी। यह शिवलिंग आज भी वही विराजमान है। आपको ये सबसे बड़ी बात बता दें कि ये गांव में भगवान राम और रावण की साथ में पूजा करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है, लेकिन इस गांव में रामलीला का आयोजन कभी नहीं किया जाता है। साथ ही इस गांव में रावण का पुतला दहन भी नहीं किया जाता है।
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दूर-दूर से आते हैं भक्त
ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में एक भव्य शिव मंदिर स्थित है। जहां पर महाशिवरात्रि और सावन के महीने में दर्शन-पूजन करने आसपास के इलाकों के साथ-साथ दूर-दूर से भक्त आते हैं। कहा जाता है कि शिव मंदिर में जो अष्टभुजी शिवलिंग विराजमान हैं। जिसकी स्थापना रावण के पिता विश्रवा ऋषि ने कराई थी। इस मंदिर की शिवलिंग की गहराई आज तक रहस्य बताई जाती है। कहा जाता है कि बहुत पहले के समय में यहां पर खुदाई भी करवाई गई थी, लेकिन कोई छोर नहीं मिलने पर खुदाई को बंद करवा दिया गया था।
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इसी मंदिर मिला था रावण को बुद्धिमान और पराक्रमी वरदान
माना जाता है कि रावण भी इसी गांव के अष्टभुजी शिवलिंग की पूजा अर्चना करने आया करता था। इसके बाद रावण की पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने रावण को इसी जगह बुद्धिमान और पराक्रमी होने का वरदान दे दिया था। इस मंदिर के ट्रस्ट के अनुसार, गांव में आज भी खुदाई होने पर कभी-कभी शिवलिंग निकल जाते हैं। इसी वजह से सालों साल गांव में पूजा- अर्चना करने आने भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती] इस मंदिर की भव्यता और दिव्यता भी बेमिसाल है।
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