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Noida News: ताड़का वध से रामलीला का शुभारंभ
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राजा दशरथ के किरदार में पंकज खरबंदा ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। श्री धार्मिक लीला कमेटी 5 नंबर एम ब्लॉक में सोमवार रात को रामजन्म व ताड़का वध से रामलीला का शुभारंभ किया गया। निर्देशक हरीश आजाद ने बताया कि मंच पर राजा दशरथ के किरदार में पंकज खरबंदा ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता।
ताड़का का किरदार निभा रहे राजू खरबंदा ने हर उम्र के दर्शकों पर अपने अभिनय की छाप छोड़ी। उन्होंने बताया कि दर्शक आज इसी दृश्य के लिए रामलीला मैदान की ओर खिंचे चले आते हैं। वहीं दूसरी ओर स्प्रिंग फील्ड कॉलोनी स्थित श्री राम धार्मिक एवं सांस्कृतिक समिति की ओर से भी सोमवार को रामलीला का मंचन शुरू किया गया। पहले दिन कलाकारों की ओर से रावण, कुंभकर्ण और विभीषण ब्रह्मा से वरदान प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या करते हैं। ब्रह्मा जी से वरदान में कुंभकरण निद्रा, विभीषण प्रभु भक्ति व रावण आवश्यकता अनुसार वरदान मांगता है।
विश्वामित्र ने मांगे राम और लक्ष्मण
वहीं नंगला पार्ट एक स्थित शिव मंदिर रामलीला कमेटी की ओर से सोमवार रात को रामलीला के तीसरे दिन ताड़का, सुबाहु और मारीच के आतंक से विश्वामित्र के अलावा जंगल में वास करने वाले अन्य संत जन भी परेशान थे। वह नियमित यज्ञ कार्य भी नहीं कर पा रहे थे। दुष्ट प्रकृति का सुबाहु यज्ञ स्थल पर मरे प्राणियों की हड्डी बिखेर देता। इससे परेशान होकर विश्वामित्र ने विचार किया और निर्णय लिया कि यज्ञ की रक्षा के लिए अयोध्या नरेश से राम और लक्ष्मण को मांग लें। इसके बाद वह अयोध्या पहुंच गए। अयोध्या में उनका स्वागत राजा दशरथ ने किया। इसके बाद अयोध्या आने का कारण पूछा। तब उन्होंने उनसे राम और लक्ष्मण को मांग लिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। श्री धार्मिक लीला कमेटी 5 नंबर एम ब्लॉक में सोमवार रात को रामजन्म व ताड़का वध से रामलीला का शुभारंभ किया गया। निर्देशक हरीश आजाद ने बताया कि मंच पर राजा दशरथ के किरदार में पंकज खरबंदा ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता।
ताड़का का किरदार निभा रहे राजू खरबंदा ने हर उम्र के दर्शकों पर अपने अभिनय की छाप छोड़ी। उन्होंने बताया कि दर्शक आज इसी दृश्य के लिए रामलीला मैदान की ओर खिंचे चले आते हैं। वहीं दूसरी ओर स्प्रिंग फील्ड कॉलोनी स्थित श्री राम धार्मिक एवं सांस्कृतिक समिति की ओर से भी सोमवार को रामलीला का मंचन शुरू किया गया। पहले दिन कलाकारों की ओर से रावण, कुंभकर्ण और विभीषण ब्रह्मा से वरदान प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या करते हैं। ब्रह्मा जी से वरदान में कुंभकरण निद्रा, विभीषण प्रभु भक्ति व रावण आवश्यकता अनुसार वरदान मांगता है।
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विश्वामित्र ने मांगे राम और लक्ष्मण
वहीं नंगला पार्ट एक स्थित शिव मंदिर रामलीला कमेटी की ओर से सोमवार रात को रामलीला के तीसरे दिन ताड़का, सुबाहु और मारीच के आतंक से विश्वामित्र के अलावा जंगल में वास करने वाले अन्य संत जन भी परेशान थे। वह नियमित यज्ञ कार्य भी नहीं कर पा रहे थे। दुष्ट प्रकृति का सुबाहु यज्ञ स्थल पर मरे प्राणियों की हड्डी बिखेर देता। इससे परेशान होकर विश्वामित्र ने विचार किया और निर्णय लिया कि यज्ञ की रक्षा के लिए अयोध्या नरेश से राम और लक्ष्मण को मांग लें। इसके बाद वह अयोध्या पहुंच गए। अयोध्या में उनका स्वागत राजा दशरथ ने किया। इसके बाद अयोध्या आने का कारण पूछा। तब उन्होंने उनसे राम और लक्ष्मण को मांग लिया।
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