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Noida News: रबूपुरा के पेड़े, जेवर का कलाकंद दिवाली पर घोलेंगे मिठास
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- फोटो
- बढ़ती मांग के अनुसार तैयार किया गया अतिरिक्त स्टॉक
-लोगों को खूब पसंद आते हैं कम मिठास वाले पेड़े
माई सिटी रिपोर्टर
यमुना सिटी। दीपावली पर इस बार भी रबूपुरा के पेड़े और जेवर का कलाकंद बाजार में मिठास घोलेंगे। त्योहार करीब आते ही दोनों मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ गई। नतीजतन, मिठाई कारोबारियों ने अतिरिक्त स्टॉक भी तैयार किया, ताकि ग्राहकों को निराश होकर न लौटना पड़े।
रबूपुरा के पेड़े अपनी खास खुशबू और कम मिठास के कारण दूर-दराज तक मशहूर हैं। वहीं जेवर का कलाकंद अपनी मुलायम बनावट और शुद्ध दूध के स्वाद से लोगों का दिल जीत रहा है। दोनों मिठाइयां यमुना सिटी के दनकौर, बिलासपुर और बुलंदशहर तक से ग्राहक खरीदने पहुंच रहे हैं। रबूपुरा के मिठाई कारोबारी सुनील ने बताया, रबूपुरा के पेड़े की मांग हर साल दीपावली पर कई गुना बढ़ जाती है।मांग को देखते हुए अतिरिक्त दूध और खोया मंगवाया है ताकि सप्लाई बनी रहे। कम चीनी वाले देसी पेड़े को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। वहीं जेवर के सतीश हलवाई कहते हैं, कलाकंद ताजे दूध से तैयार किया जाता है। इसकी बनावट इतनी मुलायम होती है कि एक बार खाने वाला हर साल यहीं लौटकर आता है। ग्राहकों में भी इन पारंपरिक स्वादों को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। दनकौर से मिठाई खरीदने आई संगीता भाटी कहती हैं, बाजार में कई तरह की मिठाइयां हैं लेकिन रबूपुरा का पेड़ा बेहद स्वादिष्ट है। दीपावली के मौके पर घरों में रिश्तों की मिठास बढ़ाने के लिए अब लोग इन पारंपरिक स्वादों की ओर लौट रहे हैं।
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आमदनी में हुआ इजाफा
त्योहार के मौसम में बढ़ी मिठाई की मांग से स्थानीय व्यापारियों की आमदनी में अच्छा खासा इजाफा हुआ है। रबूपुरा और जेवर के हलवाइयों का कहना है कि इस सीजन में बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में तीन से चार गुना तक बढ़ जाती है। इससे न केवल स्थानीय रोजगार बढ़ता है, बल्कि दूध और खोया उत्पादन करने वाले किसानों को भी इसका सीधा फायदा मिलता है।
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- बढ़ती मांग के अनुसार तैयार किया गया अतिरिक्त स्टॉक
-लोगों को खूब पसंद आते हैं कम मिठास वाले पेड़े
माई सिटी रिपोर्टर
यमुना सिटी। दीपावली पर इस बार भी रबूपुरा के पेड़े और जेवर का कलाकंद बाजार में मिठास घोलेंगे। त्योहार करीब आते ही दोनों मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ गई। नतीजतन, मिठाई कारोबारियों ने अतिरिक्त स्टॉक भी तैयार किया, ताकि ग्राहकों को निराश होकर न लौटना पड़े।
रबूपुरा के पेड़े अपनी खास खुशबू और कम मिठास के कारण दूर-दराज तक मशहूर हैं। वहीं जेवर का कलाकंद अपनी मुलायम बनावट और शुद्ध दूध के स्वाद से लोगों का दिल जीत रहा है। दोनों मिठाइयां यमुना सिटी के दनकौर, बिलासपुर और बुलंदशहर तक से ग्राहक खरीदने पहुंच रहे हैं। रबूपुरा के मिठाई कारोबारी सुनील ने बताया, रबूपुरा के पेड़े की मांग हर साल दीपावली पर कई गुना बढ़ जाती है।मांग को देखते हुए अतिरिक्त दूध और खोया मंगवाया है ताकि सप्लाई बनी रहे। कम चीनी वाले देसी पेड़े को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। वहीं जेवर के सतीश हलवाई कहते हैं, कलाकंद ताजे दूध से तैयार किया जाता है। इसकी बनावट इतनी मुलायम होती है कि एक बार खाने वाला हर साल यहीं लौटकर आता है। ग्राहकों में भी इन पारंपरिक स्वादों को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। दनकौर से मिठाई खरीदने आई संगीता भाटी कहती हैं, बाजार में कई तरह की मिठाइयां हैं लेकिन रबूपुरा का पेड़ा बेहद स्वादिष्ट है। दीपावली के मौके पर घरों में रिश्तों की मिठास बढ़ाने के लिए अब लोग इन पारंपरिक स्वादों की ओर लौट रहे हैं।
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आमदनी में हुआ इजाफा
त्योहार के मौसम में बढ़ी मिठाई की मांग से स्थानीय व्यापारियों की आमदनी में अच्छा खासा इजाफा हुआ है। रबूपुरा और जेवर के हलवाइयों का कहना है कि इस सीजन में बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में तीन से चार गुना तक बढ़ जाती है। इससे न केवल स्थानीय रोजगार बढ़ता है, बल्कि दूध और खोया उत्पादन करने वाले किसानों को भी इसका सीधा फायदा मिलता है।
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