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Noida News: टेंडर के विवाद में फंसा प्रसूताओं का भोजन, कहीं चाय-बिस्कुट तो कहीं कुछ भी नसीब नहीं

Tue, 23 Sep 2025 12:19 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 23 Sep 2025 12:19 AM IST
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Pregnant women's meals are embroiled in a tender dispute, with some receiving tea and biscuits, others receiving nothing at all.
गाजीपुर। जनपद में स्थापित सीएचसी पर भर्ती प्रसूताओं का भोजन टेंडर के विवाद में फंसा है। जुलाई में टेंडर निरस्त होने से प्रसूताओं को कहीं चाय- बिस्कुट तो कहीं कुछ भी नसीब नहीं हो रहा है। जुलाई से अब तक सामान्य प्रसव करीब चार हजार तो सिजेरियन 600 के आसपास हुआ है। सीएचसी के अधीक्षक अपने स्तर से उन्हें जलपान मुहैया कराने का दावा कर रहे हैं, जबकि हकीकत कुछ और है। जिले में स्थापित 19 सामुदायिक स्वास्थ्य केेंद्रों में तीन जगह मुहम्मदाबाद, सैदपुर और कासिमाबाद में सामान्य के साथ सिजेरियन प्रसव होता है। जबकि अन्य 16 सीएचसी पर सामान्य प्रसव होता है। ऐसे में इन प्रसूताओं को जननी सुरक्षा योजना के तहत चाय- बिस्कुट के अलावा सुबह और शाम भोजन उपलब्ध कराया जाता है। स्थिति यह है कि जुलाई माह में भोजन की टेंडर प्रक्रिया में शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निरस्त कर दिया था। यह प्रक्रिया तीन महीने से ठंडे बस्ते में ही है। उधर, जुलाई से अब तक चार हजार सामान्य प्रसव और 600 के आसपास सिजेरियन प्रसव हुआ है। भदौरा निवासी गायत्री सिंह ने बताया कि सामान्य प्रसूताओं को अस्पताल से मुश्किल से तीन से चार घंटे बाद छोड़ दिया जाता है। इस दौरान चाय-बिस्कुट ही मिलता है। भदौरा सीएचसी पर सिजेरियन प्रसव होता ही नहीं है। भदौरा की रीमा ने बताया कि प्रसव के बाद शाम को छोड़ दिया गया था। सामान्य प्रसव था। इस दौरान अस्पताल प्रशासन द्वारा एक कप चाय और मात्र बिस्कुट ही मुहैया कराया। मुहम्मदाबाद की प्रमीला ने बताया कि अगस्त माह में रिश्तेदारी में एक महिला का प्रसव यहां हुआ था। परिजन भोजन घर से ही लेकर आते थे। हालांकि चाय और बिस्कुट उपलब्ध कराया गया था। सैदपुर निवासी अनिता ने बताया कि पड़ोस की एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। सामान्य प्रसव हुआ, लेकिन प्रसूता जबतक भर्ती थीं, इस दौरान कुछ भी नहीं मिला था। कमोवेश यही हाल अन्य सीएचसी का भी है।
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टेंडर प्रक्रिया में शिकायत आने पर जिला प्रशासन के निर्देश पर दो महीने पहले टेंडर निरस्त कर दिया गया था। सीएचसी अधीक्षक द्वारा प्रसूताओं को चाय-बिस्कुट और भोजन की व्यवस्था की जाती है। जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी होगी।
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- डाॅ.एसके पांडेय, सीएमओ।
पहले 90 तो अब 150 रुपये प्रति मरीज भोजन पर खर्च-गाजीपुर। सीएमओ डा. एसके पांडेय ने बताया कि पूर्व में शासन की ओर से प्रति प्रसूता भोजन के लिए 90 रुपये मिलता था। शासन की ओर से यह धनराशि बढ़ाकर 150 प्रति मरीज कर दी गई है। जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं को दो वक्त भोजन, चाय- बिस्कुट और फल शामिल है। एक महीने में करीब 4500 से 5000 सामान्य प्रसव और सिजेरियन प्रसव 250 हाेता है।
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