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Noida News: गहराया सियासी संकट, राजनिवास ने लिखा गृहमंत्रालय को पत्र

Thu, 04 Apr 2024 10:04 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 04 Apr 2024 10:04 PM IST
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Political crisis deepened, Raj Nivas wrote letter to Home Ministry
एलजी पद को बदनाम करने का आरोप, कहा- बेवजह बोला जा रहा झूठ, बढ़ रहे कोर्ट केस
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सार्वजनिक खजाने के करोड़ों खर्च होने के साथ ही अधिकारियों का समय हो रहा है खराब
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच टकराव गहराता जा रहा है। बृहस्पतिवार को राजनिवास ने केंद्रीय गृहमंत्रालय को शिकायत की है कि दिल्ली सरकार लगातार उपराज्यपाल पद को बदनाम कर रही है। बेवजह झूठ बोला जा रहा है जिससे कोर्ट में नए मामले बढ़ रहे हैं।

दरअसल, मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी के बाद आप नेताओं ने राष्ट्रपति शासन लगाने की आशंका जताई थी। ऐसे में यह पत्र राजनीतिक गलियारे में बेहद अहम माना जा रहा है। एलजी कार्यालय ने पत्र में लिखा है कि अदालत से जुड़े मामले दिल्ली के मुख्य सचिव व उपराज्यपाल के पास पेश किए जाने चाहिए, लेकिन दिल्ली सरकार ऐसा नहीं कर रही। इससे अदालतों में नए परिसरों के निर्माण में देरी हुई। जिला अदालत से संबंधित प्रस्ताव 2019 से लंबित रहा। इस कारण न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई। जल बोर्ड से संबंधित एक मामले में कोर्ट केस किया गया। इसमें कहा गया कि धन आवंटित करने के लिए एलजी को आदेश दिया जाए। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां मामला ठंडा पड़ गया। इसके अलावा हाईकोर्ट में आबकारी नीति 2021-22 से जुड़ा मामला चल रहा है। अदालत के 29 मार्च, 22 के आदेशानुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में अनुरूप और गैर-अनुरूप वार्डों की पहचान व वर्गीकरण के उद्देश्य से समिति का गठन किया गया था। इस मामले में कोर्ट केस चल रहा है। इसमें दिल्ली सरकार को दोषी बताया गया है। इसके अलावा दिल्ली की फरिश्ते योजना पर भी विवाद हुआ। इसमें कहा गया कि इसे फिर से चलाने के लिए अस्पतालों का बिल लंबित है। इस मामले को लेकर मीडिया में गलत तथ्य रखे गए। मामला कोर्ट तक पहुंचा और एलजी ऑफिस को नोटिस जारी हुआ, जबकि तथ्य पेश कर बताया गया कि योजना के नियम के तहत फंड दिया गया है। इसी तरह के कई मामले अलग-अलग अदालतों में चल रहे हैं। मुकदमेबाजी में सार्वजनिक खजाने के करोड़ों रुपये खर्च होने व अधिकारियों का समय खराब होने के साथ-साथ अदालत पर बोझ बढ़ रहा है।
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