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Noida News: टेक्नीशियन के इंतज़ार में पीएचसी, वायरल बुखार, खून की जांचें ठप
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कासना स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 18 माह से नहीं है टेक्नीशियन
-रोजाना आने वाले 50-60 मरीजों से घटकर संख्या 30-35 तक पहुंची
ग्रेटर नोएडा। कासना स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में करीब डेढ़ साल से लैब टेक्नीशियन न होने के कारण यहां बुनियादी जांच तक ठप पड़ी है। जिससे मरीजों की दिक्कतें लगातार बढ़ रही हैं। हालात यह हैं कि जांच की सुविधाएं नहीं होने से मरीजों की संख्या में कमी देखी जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार करीब 18 महीने ग्रेटर नोएडा स्थित सरकारी अस्पताल की ओर से टेक्नीशियन की मांग की गई थी। लेकिन अभी तक वापसी नहीं हुई हैं।
पीएचसी में जांच के लिए पहले जहां प्रतिदिन 50 से 60 मरीज आते थे, वहीं अब संख्या घटकर 30 से 35 रह गई है। इनमें से अधिकतर गर्भवती होती हैं, जिन्हें जांच के अभाव में सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कासना पीएचसी पर अधिकतर लोग वायरल बुखार, ब्लड टेस्ट सहित अन्य सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी पहुंचते हैं। पीएचसी के प्रभारी मेडिकल ऑफिसर (एमओ) डॉ. संदीप खटाना ने बताया कि टेक्नीशियन की वापसी को लेकर कई बार शासन स्तर से मांग की जा चुकी है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
धूल फांक रही सीबीसी मशीन
एमओ के अनुसार पीएचसी को करीब छह महीने पहले कम्प्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) मशीन भी मिल चुकी है, लेकिन टेक्नीशियन न होने से मशीन बेकार पड़ी है। मरीजों को बीमारियों की जांच के लिए निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। इससे मरीजों को अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है। मरीज लक्ष्मी का कहना है कि यहां पर खून की जांच की व्यवस्था नहीं होने से बाहर से महंगे रेट में जांच करानी पड़ी।
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-रोजाना आने वाले 50-60 मरीजों से घटकर संख्या 30-35 तक पहुंची
ग्रेटर नोएडा। कासना स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में करीब डेढ़ साल से लैब टेक्नीशियन न होने के कारण यहां बुनियादी जांच तक ठप पड़ी है। जिससे मरीजों की दिक्कतें लगातार बढ़ रही हैं। हालात यह हैं कि जांच की सुविधाएं नहीं होने से मरीजों की संख्या में कमी देखी जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार करीब 18 महीने ग्रेटर नोएडा स्थित सरकारी अस्पताल की ओर से टेक्नीशियन की मांग की गई थी। लेकिन अभी तक वापसी नहीं हुई हैं।
पीएचसी में जांच के लिए पहले जहां प्रतिदिन 50 से 60 मरीज आते थे, वहीं अब संख्या घटकर 30 से 35 रह गई है। इनमें से अधिकतर गर्भवती होती हैं, जिन्हें जांच के अभाव में सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कासना पीएचसी पर अधिकतर लोग वायरल बुखार, ब्लड टेस्ट सहित अन्य सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी पहुंचते हैं। पीएचसी के प्रभारी मेडिकल ऑफिसर (एमओ) डॉ. संदीप खटाना ने बताया कि टेक्नीशियन की वापसी को लेकर कई बार शासन स्तर से मांग की जा चुकी है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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धूल फांक रही सीबीसी मशीन
एमओ के अनुसार पीएचसी को करीब छह महीने पहले कम्प्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) मशीन भी मिल चुकी है, लेकिन टेक्नीशियन न होने से मशीन बेकार पड़ी है। मरीजों को बीमारियों की जांच के लिए निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। इससे मरीजों को अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है। मरीज लक्ष्मी का कहना है कि यहां पर खून की जांच की व्यवस्था नहीं होने से बाहर से महंगे रेट में जांच करानी पड़ी।
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