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Noida News: नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल से सांसत में मरीजों की जान

Wed, 18 Oct 2023 01:49 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 18 Oct 2023 01:49 AM IST
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Patients' lives at stake due to nursing staff strike
फोटो-पैकेज
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नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल से सांसत में मरीजों की जान
-नर्सिंग स्टॉफ के अनिश्चितकालीन धरने से व्यवस्था धराशायी, 350 भर्ती मरीजों में से 90 बचे
-गंभीर अवस्था में भर्ती मरीजों को जबरन किया जा रहा डिस्चार्ज, दूसरे अस्पताल में ले जाने का दबाव

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में सोमवार से चल रही नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल से भर्ती मरीजों की जान पर बन आई है। अस्पताल के साधारण, आईसीयू, एनआईसीयू, एचडीयू और इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को दवा, इंजेक्शन देने और देखभाल करने वाला कोई नहीं है। मंगलवार को अस्पताल में मरीजों के परिजन परेशान नजर आए। वहीं, अस्पताल प्रशासन मरीजों को डिस्चार्ज लेटर थमाता रहा। गंभीर मरीजों के परिजन को अन्य अस्पतालों में ले जाने के लिए कहा गया। मरीजों के परिजन रो-रोकर गुहार लगाते रहे थे कि आखिर वह कहां जाएं।
जिम्स प्रशासन की ओर से 250 स्टॉफ नर्स की निकाली गई रिक्तियों के विरोध में संविदा पर कार्यरत 200 नर्सिंग स्टाफ हड़ताल पर चले गए हैं। उनकी मांग है कि उन्हें ही स्थायी किया जाए। जिम्स के जनरल, आईसीयू, एनआईसीयू, एचडीयू, इमरजेंसी वार्ड में करीब 350 मरीज भर्ती होते हैं। नर्सिंग स्टाफ के हड़ताल पर जाने से अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई। 24 घंटे में अस्पताल के आईसीयू-1, 2, 3, 4 समेत एनआईसीयू और स्त्री रोग विभाग के आईसीयू से मरीजों को डिस्चार्ज दिया गया। ऐसे में मंगलवार दोपहर तक उनकी संख्या करीब 90 रह गई थी। बच्चे, बुजुर्ग, महिला मरीजों के तिमारदारों का आरोप है कि हालत पूरी तरह ठीक नहीं होने के बावजूद डिस्चार्ज किया जा रहा है। दूसरी तरफ, जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि हड़ताल की स्थिति में अस्पताल चलाना मुमकिन नहीं है। इसलिए मरीजों को डिस्चार्ज किया जा रहा है। गंभीर मरीजों की देखभाल की जा रही है।
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चाइल्ड पीजीआई और जिला अस्पताल भी मरीज लेने को नहीं तैयार
अस्पताल के एनआईसीयू (बाल रोग विभाग) में भर्ती अब्दुल्ला के पिता आरिफ ने बताया कि उसके बेटे को जन्म से ही तालू में छेद है। करीब सप्ताह पहले उसे भर्ती कराया गया है। उसकी स्थिति बेहद गंभीर है लेकिन अस्पताल प्रशसन ने उसे किसी अन्य अस्पताल में ले जाने के लिए कहा है। नोएडा के चाइल्ड पीजीआई और जिला अस्पताल में भी प्रयास किया लेकिन बेड खाली नहीं होने की बात बताकर टरका दिया गया।
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लंतेश की किडनी फेल, कहा उपचार के लिए जाएं दूसरे अस्पताल
जिला संभल निवासी बाबूराम अपने बेटे का उपचार कराने के लिए जिम्स अस्पताल लाए थे। यहां किडनी में संक्रमण होने के कारण उसकी तीन बार डायलेसिस हो चुकी है। फिर भी उन्हें अन्य अस्पताल जाने के लिए कहा है। गंभीर स्थिति में भर्ती लंतेश को भी किसी अन्य अस्पताल में जाने के लिए कहा गया।
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नहीं मिल रहा कोई ठिकाना
मूलरूप से बरेली की निवासी रोशनी की एक माह की बेटी को गंभीर अवस्था में एनआईसीयू में भर्ती करा गया है। मजदूरी करने वाला परिवार दुजाना में रहता है। नर्सिंग स्टाफ नहीं होने से उन्हें किसी अन्य अस्पताल में ले जाने के लिए कहा गया है। रोशनी का कहना है कि यदि उनकी बच्ची को यहां से हटाया गया तो उसकी जान चली जाएगी।
तकनीकी स्टाफ भी हड़ताल पर उतरा
नर्सिंग स्टाफ की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। नर्सिंग स्टॉफ शिवम, दिनेश, उपासना, कल्याण भाटी का कहना है कि उनके उन्हें स्थायी करने का जबतक लिखित आश्वासन नहीं मिलता तबतक वह अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि अब उनके साथ तकनीकी स्टाफ भी हड़ताल पर उतर आया है। करीब 350 अस्थायी कर्मी हड़ताल पर हैं। उनका आरोप है कि अस्पताल प्रशासन पुलिस और प्रशासन का सहयोग लेकर उनको डरा-धमका रहा है।

नेताओं का लगा जमघट
नर्सिंग स्टाफ के अनिश्चितकालीन धरने को सहयोग देने के लिए अस्पताल परिसर में किसान और स्थानीय नेताओं का भी जमघट लगने लगा है। इस दौरान अलग-अलग गुट के कई नेता अस्थायी कर्मियों को सपोर्ट करने आ पहुंचे।
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