यूपी में यहां बनेगा बाबा रामदेव का 'आयुर्वेद हब' , 10 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
- आयुर्वेद का हब बनेगा यमुना क्षेत्र
- आचार्य बालकृष्ण ने सेक्टर-22ई, 24 व 24ए में देखी जमीन
- उद्योग, ट्रस्ट, अस्पताल व महाविद्यालय बनाने की है योजना
- 1000 करोड़ रुपये का होगा निवेश, एक लाख को मिलेंगे रोजगार
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आने वाले दिनों में यमुना प्राधिकरण आयुर्वेद का सबसे बड़ा हब बन सकता है। पतंजलि संस्थान यमुना क्षेत्र में उद्योग, ट्रस्ट, अस्पताल व महाविद्यालय खोलने की तैयारी कर रहा है।
संस्थान करीब 1000 करोड़ का निवेश करेगा, जिससे एक लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। सोमवार को आचार्य बालकृष्ण ने जमीन देखी है। उनको जमीन पसंद भी आई है।
सेक्टर-22ई, 24 व 24ए में जमीन का मौके पर मुआयना करने के बाद यमुना प्राधिकरण के सीईओ कार्यालय में मुखातिब हुए आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि दिल्ली से सटे होने और कनेक्टीविटी बेहतर होने के कारण इस एरिया का चयन किया गया है।
पतंजलि के बहुत से उत्पादों का उत्पादन यहां से किया जाएगा। आचार्य ने बताया कि उत्पादों के अलावा चिकित्सा, ट्रस्ट और महाविद्यालय बनाने की भी योजना है।
इन सब पर करीब एक हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे प्रत्यक्ष रूप से 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेंगे, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से मिलने वाले रोजगार को जोड़ लें तो यह संख्या एक लाख तक पहुंच जाएगी।
किसानों से सीधे खरीदे जाएंगे कृषि उत्पाद
उनका कहना है कि पतंजलि के तमाम उत्पादों को देखते हुए इस क्षेत्र में सपोर्टिंग एक्टीविटी भी बढ़ेगी, जिससे यहां के लोगों को काफी लाभ मिलेगा। आगे की योजना के बारे में बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि क्षेत्र के किसानों से सीधे तौर पर कृषि उत्पाद खरीदेगा, जिससे उनको भी मुनाफा होगा और जनता को सस्ते उत्पाद मिल सकेंगे। उन्होंने दावा किया कि यह क्षेत्र दिल्ली-एनसीआर का सबसे बड़ा आयुर्वेदिक हब बन सकता है।
अब तक एनसीआर में आयुर्वेद को लेकर कोई खास पहल नहीं हुई है। उन्होंने प्राधिकरण और प्रदेश सरकार से जमीन की औपचारिकताओं को तय समय में पूरी करने की मंशा जाहिर की।
यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि आचार्य की तरफ से आसपास की सड़कें और चौड़ी करने का सुझाव दिया है। उसे पूरा करा दिया जाएगा।
यमुना किनारे नेचुरोपैथी का प्लान
आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि अगर यमुना प्राधिकरण यमुना के किनारे स्थित ग्रीन एरिया को दे देता है तो उसे नेचुरोपैथी के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे आसपास समुचित तरीके से हरियाली विकसित होगी। इससे पब्लिक को भी लाभ होगा।
विश्वविद्यालय की भी योजना
आचार्य ने बताया कि आयुर्वेद विश्वविद्यालय खोलने की भी मंशा है। इसके लिए बुंदेलखंड में भी जमीन देखी गई है, लेकिन अगर यमुना क्षेत्र में भी जमीन मिल जाती है तो यहां भी खोलने पर विचार किया जा सकता है। इसके लिए 300 एकड़ की दरकार होगी।
पतंजलि के तरफ से जमीन के लिए दिया गया प्रस्ताव
पतंजलि ग्रामोद्योग=========25-30 एकड़
दिव्य फार्मेसी===========50-60 एकड़
पतंजलि आयुर्वेद=========125-150 एकड़
ट्रस्ट, महाविद्यालय व आवास==125-150 एकड़
आचार्य कुलम===========60 एकड़
यमुना के किनारे ग्रीनरी =====करीब 400 एकड़