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महामारी के बाद भी पारंपरिक के बजाय मिश्रित मोड से शिक्षा रहेगी जारी
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सीमा शर्मा
नई दिल्ली। कोविड-19 के कारण शिक्षा में आया बदलाव आगे भी जारी रहेगा। केंद्रीय बजट 2021 के शिक्षा बजट में सरकार का पूरा फोकस हाइब्रिड शिक्षा पर होगा। इसलिए शिक्षा बजट में 10 हजार करोड़ रुपये तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसके अलावा नई शिक्षा नीति 2020 को लागू करवाने के लिए भी विशेष बजट जारी होगा।
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय महामारी के बाद अब शिक्षा को तकनीक से जोड़ने पर फोकस कर रहा है। इसी के तहत केंद्रीय बजट 2021 के तहत केंद्रीय वित्त मंत्रालय से हाइब्रिड शिक्षा के लिए बजट में विशेष प्रावधान की मांग रखी गई है। इसका मकसद 2021 सत्र से स्कूल और कॉलेज खुलने के बाद भी पारंपरिक क्लासरूम के साथ ऑनलाइन क्लासेज को जारी रखना है।
इसके तहत विशेष पाठ्यक्रम भी तैयार करना है। इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड होंगे। यानी क्लासरूम और ऑनलाइन दोनों को मिलाकर आधारित पाठ्यक्रम से पढ़ाई होगी। इसके लिए ऑनलाइन लाइब्रेरी, लैब से लेकर क्लासरूम को स्मार्ट क्लासरूम में बदला जाना है।
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इसके अलावा शिक्षकों को टेक्नोलॉजी से जोड़कर पढ़ाई करवाने के लिए विशेष ट्रेनिंग अभियान भी शुरू करना है। स्कूलों से ही छात्रों को रोजगार से जोड़ने के लिए कौशल विकास की ट्रेनिंग, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसे नए कोर्स, इंटर्नशिप आदि पर काम होना है। केंद्रीय बजट 2020 में शिक्षा के लिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट मिला था। हालांकि केंद्रीय बजट 2021 में यह सवा लाख करोड़ तक पहुंचने की संभावना है।
रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप
बजट में रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप के बजट में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। दरअसल 2021 सत्र से नई शिक्षा नीति 2020 के तहत नेशनल एजुकेशन टेक्नोलॉजी फोरम और नेशनल रिसर्च फाउंडेशन काम शुरू करेगा। इसे लागू करने के लिए सभी शिक्षण संस्थानों में सेटअप किया जाना है।
सरकारी स्कूलों का अपग्रेडेशन
नई शिक्षा नीति 2020 में आठवीं और 10वीं कक्षा तक के सरकारी स्कूलों को 12वीं कक्षा तक अपग्रेड किया जाना है। इन सरकारी स्कूलों को गुणवत्ता सुधार के तहत स्मार्ट क्लासरूम से जोड़ा जाएगा। यानी दिल्ली, मुंबई, चैन्नई जैसे शहरों से विषय विशेषज्ञ तकनीक के माध्यम से ऑनलाइन वहां के छात्रों को पढ़ाई करवायी जाएगी।
इसमें प्रति कक्षा प्रति टीवी चैनल योजना भी शामिल है। यानी रेडियो और टीवी के माध्यम से पहली से 12वीं कक्षाओं के छात्रों को समान पढ़ाई का मौका देना है। सरकारी स्कूलों के बोर्ड परीक्षार्थी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए डिवाइस देने की व्यवस्था की जाएगी।
पंचायतों से जुड़ेंगे स्कूल
सरकार बजट में ऐसा प्रावधान कर सकती है कि ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों को पंचायतों के माध्यम से जोड़ा जा सकता है। इसमें पंचायत अपने स्तर पर उनकी पढ़ाई को जारी रखने के लिए रेडियो, टीवी और कंप्यूटर के माध्यम से जोड़ सकती है।
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नई दिल्ली। कोविड-19 के कारण शिक्षा में आया बदलाव आगे भी जारी रहेगा। केंद्रीय बजट 2021 के शिक्षा बजट में सरकार का पूरा फोकस हाइब्रिड शिक्षा पर होगा। इसलिए शिक्षा बजट में 10 हजार करोड़ रुपये तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसके अलावा नई शिक्षा नीति 2020 को लागू करवाने के लिए भी विशेष बजट जारी होगा।
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय महामारी के बाद अब शिक्षा को तकनीक से जोड़ने पर फोकस कर रहा है। इसी के तहत केंद्रीय बजट 2021 के तहत केंद्रीय वित्त मंत्रालय से हाइब्रिड शिक्षा के लिए बजट में विशेष प्रावधान की मांग रखी गई है। इसका मकसद 2021 सत्र से स्कूल और कॉलेज खुलने के बाद भी पारंपरिक क्लासरूम के साथ ऑनलाइन क्लासेज को जारी रखना है।
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इसके तहत विशेष पाठ्यक्रम भी तैयार करना है। इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड होंगे। यानी क्लासरूम और ऑनलाइन दोनों को मिलाकर आधारित पाठ्यक्रम से पढ़ाई होगी। इसके लिए ऑनलाइन लाइब्रेरी, लैब से लेकर क्लासरूम को स्मार्ट क्लासरूम में बदला जाना है।
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इसके अलावा शिक्षकों को टेक्नोलॉजी से जोड़कर पढ़ाई करवाने के लिए विशेष ट्रेनिंग अभियान भी शुरू करना है। स्कूलों से ही छात्रों को रोजगार से जोड़ने के लिए कौशल विकास की ट्रेनिंग, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसे नए कोर्स, इंटर्नशिप आदि पर काम होना है। केंद्रीय बजट 2020 में शिक्षा के लिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट मिला था। हालांकि केंद्रीय बजट 2021 में यह सवा लाख करोड़ तक पहुंचने की संभावना है।
रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप
बजट में रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप के बजट में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। दरअसल 2021 सत्र से नई शिक्षा नीति 2020 के तहत नेशनल एजुकेशन टेक्नोलॉजी फोरम और नेशनल रिसर्च फाउंडेशन काम शुरू करेगा। इसे लागू करने के लिए सभी शिक्षण संस्थानों में सेटअप किया जाना है।
सरकारी स्कूलों का अपग्रेडेशन
नई शिक्षा नीति 2020 में आठवीं और 10वीं कक्षा तक के सरकारी स्कूलों को 12वीं कक्षा तक अपग्रेड किया जाना है। इन सरकारी स्कूलों को गुणवत्ता सुधार के तहत स्मार्ट क्लासरूम से जोड़ा जाएगा। यानी दिल्ली, मुंबई, चैन्नई जैसे शहरों से विषय विशेषज्ञ तकनीक के माध्यम से ऑनलाइन वहां के छात्रों को पढ़ाई करवायी जाएगी।
इसमें प्रति कक्षा प्रति टीवी चैनल योजना भी शामिल है। यानी रेडियो और टीवी के माध्यम से पहली से 12वीं कक्षाओं के छात्रों को समान पढ़ाई का मौका देना है। सरकारी स्कूलों के बोर्ड परीक्षार्थी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए डिवाइस देने की व्यवस्था की जाएगी।
पंचायतों से जुड़ेंगे स्कूल
सरकार बजट में ऐसा प्रावधान कर सकती है कि ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों को पंचायतों के माध्यम से जोड़ा जा सकता है। इसमें पंचायत अपने स्तर पर उनकी पढ़ाई को जारी रखने के लिए रेडियो, टीवी और कंप्यूटर के माध्यम से जोड़ सकती है।