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नोएडा एयरपोर्ट --------- देश के सबसे बड़े एमआरओ व एक और रनवे के लिए बढ़े कदम
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नोएडा एयरपोर्ट : देश के सबसे बड़े एमआरओ व तीसरे रनवे के लिए बढ़े कदम
ग्रेटर नोएडा। देश के दूसरे मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉलिंग सेंटर (एमआरओ) और नोएडा एयरपोर्ट के तीसरे रनवे की तरफ एक और कदम बढ़ा है। इन दोनों के लिए जमीन अधिगृहीत करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस बार सात गांवों की 1365 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। करीब 3500 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटे जाने का आकलन है। एमआरओ बनने से एयरपोर्ट की मरम्मत के लिए नागपुर या विदेश नहीं जाना पड़ेगा।
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में नोएडा एयरपोर्ट के पांच रनवे को मंजूरी दी है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) ने इस पर अमल शुरू कर दिया है। दो रनवे बनाने का जिम्मा ज्यूरिख कंपनी को पहले ही दिया जा चुका है। अब तीसरा रनवे और एमआरओ सेंटर बनाने की तैयारी है। इसके लिए 1365 हेक्टेयर जमीन की दरकार है। ये जमीन जेवर के सात गांवों करौली बांगर (200 हेक्टेयर), कुरैब (400 हेक्टेयर), बीरमपुर (100 हेक्टेयर), दयानतपुर (175 हेक्टेयर), रन्हेरा (500 हेक्टेयर), नंगला शाहपुर (15 हेक्टेयर) और मुंढेरा (40 हेक्टेयर) में ली जाएगी। हालांकि, गांवों की जमीन अनुमानित है। जिला प्रशासन से रिपोर्ट आने के बाद सही आंकड़े प्राप्त हो सकेंगे।
देश का एकमात्र एमआरओ सेंटर नागपुर में है। मुंबई एयरपोर्ट तक आने वाले विमान तो वहां दुरुस्त हो जाते हैं, लेकिन दिल्ली एयरपोर्ट आने वाले विमान को वहां ले जाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए एमआरओ के लिए एयरक्रॉफ्ट जिस देश की उड़ान भर रहे होते हैं, वहीं पर इसे करा लेते हैं। इससे देश की आमदनी का बड़ा जरिया विदेश चला जाता है। नोएडा एयरपोर्ट पर एमआरओ सेंटर बनने से विमान यहीं दुरुस्त हो सकेंगे। इससे बचत के साथ ही देश भर में विमानों के मेंटेनेंस से जुड़ी इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। दुनिया भर में एमआरओ इंडस्ट्री का कारोबार करीब 48 हजार करोड़ रुपये का है, जिसमें भारत का योगदान सिर्फ एक प्रतिशत है। इस सेंटर को नागपुर से भी बड़ा बनाने का प्लान है। वहीं, तीसरा रनवे बनने से इस एयरपोर्ट से हवाई सफर करने वाले यात्रियों की 2050 तक की जरूरत पूरी हो सकेगी।
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गांवों की जमीन अधिगृहीत करने के लिए अर्जन प्रस्ताव एडीएम (भू-अध्याप्ति) तैयार करेंगे। किसानों से सहमति ली जाएगी और एसआईए होगी। जिसमें पता चलेगा कि इन गांवों की जमीन लेने पर कितने किसान प्रभावित होंगे, कितने किसानों को विस्थापित करना पड़ेगा। उसके हिसाब से इंतजाम किया जाएगा।
डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ, नियाल
दूसरे चरण की जमीन अधिग्रहीत करने के लिए 2000 करोड़ रुपये का इंतजाम हो चुका है। प्रदेश सरकार यह रकम पहले ही दे चुकी है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण को अपना हिस्सा देना है। दूसरे चरण में बतौर मुआवजा करीब 3500 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन है। बता दें कि नियाल में 37.5 फीसदी प्रदेश सरकार, 37.5 फीसदी नोएडा प्राधिकरण और 12.5-12.5 फीसदी ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण की हिस्सेदारी है। उसी अनुपात में जमीन के लिए पैसा भी दिया जाना है।
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ग्रेटर नोएडा। देश के दूसरे मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉलिंग सेंटर (एमआरओ) और नोएडा एयरपोर्ट के तीसरे रनवे की तरफ एक और कदम बढ़ा है। इन दोनों के लिए जमीन अधिगृहीत करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस बार सात गांवों की 1365 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। करीब 3500 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटे जाने का आकलन है। एमआरओ बनने से एयरपोर्ट की मरम्मत के लिए नागपुर या विदेश नहीं जाना पड़ेगा।
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में नोएडा एयरपोर्ट के पांच रनवे को मंजूरी दी है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) ने इस पर अमल शुरू कर दिया है। दो रनवे बनाने का जिम्मा ज्यूरिख कंपनी को पहले ही दिया जा चुका है। अब तीसरा रनवे और एमआरओ सेंटर बनाने की तैयारी है। इसके लिए 1365 हेक्टेयर जमीन की दरकार है। ये जमीन जेवर के सात गांवों करौली बांगर (200 हेक्टेयर), कुरैब (400 हेक्टेयर), बीरमपुर (100 हेक्टेयर), दयानतपुर (175 हेक्टेयर), रन्हेरा (500 हेक्टेयर), नंगला शाहपुर (15 हेक्टेयर) और मुंढेरा (40 हेक्टेयर) में ली जाएगी। हालांकि, गांवों की जमीन अनुमानित है। जिला प्रशासन से रिपोर्ट आने के बाद सही आंकड़े प्राप्त हो सकेंगे।
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देश का एकमात्र एमआरओ सेंटर नागपुर में है। मुंबई एयरपोर्ट तक आने वाले विमान तो वहां दुरुस्त हो जाते हैं, लेकिन दिल्ली एयरपोर्ट आने वाले विमान को वहां ले जाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए एमआरओ के लिए एयरक्रॉफ्ट जिस देश की उड़ान भर रहे होते हैं, वहीं पर इसे करा लेते हैं। इससे देश की आमदनी का बड़ा जरिया विदेश चला जाता है। नोएडा एयरपोर्ट पर एमआरओ सेंटर बनने से विमान यहीं दुरुस्त हो सकेंगे। इससे बचत के साथ ही देश भर में विमानों के मेंटेनेंस से जुड़ी इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। दुनिया भर में एमआरओ इंडस्ट्री का कारोबार करीब 48 हजार करोड़ रुपये का है, जिसमें भारत का योगदान सिर्फ एक प्रतिशत है। इस सेंटर को नागपुर से भी बड़ा बनाने का प्लान है। वहीं, तीसरा रनवे बनने से इस एयरपोर्ट से हवाई सफर करने वाले यात्रियों की 2050 तक की जरूरत पूरी हो सकेगी।
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गांवों की जमीन अधिगृहीत करने के लिए अर्जन प्रस्ताव एडीएम (भू-अध्याप्ति) तैयार करेंगे। किसानों से सहमति ली जाएगी और एसआईए होगी। जिसमें पता चलेगा कि इन गांवों की जमीन लेने पर कितने किसान प्रभावित होंगे, कितने किसानों को विस्थापित करना पड़ेगा। उसके हिसाब से इंतजाम किया जाएगा।
डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ, नियाल
दूसरे चरण की जमीन अधिग्रहीत करने के लिए 2000 करोड़ रुपये का इंतजाम हो चुका है। प्रदेश सरकार यह रकम पहले ही दे चुकी है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण को अपना हिस्सा देना है। दूसरे चरण में बतौर मुआवजा करीब 3500 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन है। बता दें कि नियाल में 37.5 फीसदी प्रदेश सरकार, 37.5 फीसदी नोएडा प्राधिकरण और 12.5-12.5 फीसदी ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण की हिस्सेदारी है। उसी अनुपात में जमीन के लिए पैसा भी दिया जाना है।