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Noida News: इगास बग्वाल पर उत्तराखंड वासियों ने घरों में जलाये दीये
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फोटो
सेक्टर-74 स्थित केपटाउन सोसाइटी में उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति और लोक संगीत का प्रदर्शन हुआ
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-74 स्थित केपटाउन सोसाइटी में शनिवार को उत्तराखंड परिवार की ओर से इगास बग्वाल का आयोजन किया गया। उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति और लोक संगीत का प्रदर्शन किया गया।
सोसाइटी के एओए अध्यक्ष अरुण शर्मा ने बताया, इगास बग्वाल उत्तराखंड का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो दीपावली के 11 दिन बाद मनाया जाता है। इस त्योहार के दौरान उत्तराखंड के लोग अपने घरों में दीये जलाते हैं और अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर खुशियों को बांटते हैं। केपटाउन उत्तराखंड परिवार के सदस्यों ने उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा में सजकर लोक संगीत और नृत्य का प्रदर्शन किया। केपटाउन उत्तराखंड परिवार के अध्यक्ष ने कहा कि इगास बग्वाल महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपरा है, और गर्व है कि हम इसे केपटाउन में मना रहे हैं। अरुण शर्मा ने सभी का धन्यवाद भी किया।
सोसाइटी निवासी विनोद गुप्ता ने बताया कि इगास बाग्वाल को बूढ़ी दिवाली के रूप में भी जाना जाता है। यह एक पारंपरिक त्योहार है जो उत्तरी भारतीय राज्य उत्तराखंड में मनाया जाता है। यह हिंदू चंद्र कैलेंडर में दिवाली या कार्तिक एकादशी के एक दिन बाद मनाया जाता है। भूपी रौतेला, आशीष भट्ट, सुनील, प्रवीण, महेश मौजूद समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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सेक्टर-74 स्थित केपटाउन सोसाइटी में उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति और लोक संगीत का प्रदर्शन हुआ
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-74 स्थित केपटाउन सोसाइटी में शनिवार को उत्तराखंड परिवार की ओर से इगास बग्वाल का आयोजन किया गया। उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति और लोक संगीत का प्रदर्शन किया गया।
सोसाइटी के एओए अध्यक्ष अरुण शर्मा ने बताया, इगास बग्वाल उत्तराखंड का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो दीपावली के 11 दिन बाद मनाया जाता है। इस त्योहार के दौरान उत्तराखंड के लोग अपने घरों में दीये जलाते हैं और अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर खुशियों को बांटते हैं। केपटाउन उत्तराखंड परिवार के सदस्यों ने उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा में सजकर लोक संगीत और नृत्य का प्रदर्शन किया। केपटाउन उत्तराखंड परिवार के अध्यक्ष ने कहा कि इगास बग्वाल महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपरा है, और गर्व है कि हम इसे केपटाउन में मना रहे हैं। अरुण शर्मा ने सभी का धन्यवाद भी किया।
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सोसाइटी निवासी विनोद गुप्ता ने बताया कि इगास बाग्वाल को बूढ़ी दिवाली के रूप में भी जाना जाता है। यह एक पारंपरिक त्योहार है जो उत्तरी भारतीय राज्य उत्तराखंड में मनाया जाता है। यह हिंदू चंद्र कैलेंडर में दिवाली या कार्तिक एकादशी के एक दिन बाद मनाया जाता है। भूपी रौतेला, आशीष भट्ट, सुनील, प्रवीण, महेश मौजूद समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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