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अब प्राधिकरण कार्यालय पर डेरा डालेंगे किसान

Tue, 16 Nov 2021 01:15 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 16 Nov 2021 01:15 AM IST
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Now farmers will camp at the authority office
नोएडा। प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के साथ 81 गांवों के किसानों की वार्ता सोमवार को भी फेल हो गई। अब तक किसानों और प्राधिकरण के बीच ढाई माह में 9 बार बात हो चुकी, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया है। अब किसान मंगलवार को हरौला बरातघर से धरना हटाकर प्राधिकरण कार्यालय पर 24 घंटे का आंदोलन शुरू करेंगे। इस घोषणा के बाद पुलिस और प्राधिकरण अधिकारियों की बैठक भी हुई। इसमें किसानों को कार्यालय पर धरना देने के मुद्दे पर चर्चा की गई।
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75 दिन से 81 गांवों के किसान आबादी और मुआवजा समेत 10 सूत्री मांगों को लेकर हरौला बरातघर पर धरना दे रहे हैं। सोमवार को किसानों ने प्राधिकरण कार्यालय को घेरकर वहीं पर धरना देने का ऐलान किया था, लेकिन प्राधिकरण और पुलिस अधिकारियों ने सीईओ के साथ बैठक कराने की बात कही। इस पर किसानों ने प्राधिकरण पर कूच करने का निर्णय टाल दिया और बैठक में पहुंचे, लेकिन 3 घंटे से अधिक चली बैठक में किसानों की मांगे पूरी नहीं हो पाई। ऐसे में नाराज किसान बैठक छोड़कर चले आए और चेतावनी दी कि मंगलवार से प्राधिकरण कार्यालय के बाहर धरना 24 घंटे धरना दिया जाएगा।
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किसान नेता सुखवीर खलीफा ने बताया कि किसानों की चंद मांगे हैं लेकिन अधिकारियों उसे बोर्ड बैठक में ले जाने के बजाय शासन को भेजने पर अड़े हैं। शासन में जाने का मतलब है कि मामला लंबे समय तक पड़ा रहेगा और फिर सरकार बदल जाएगी। किसानों की 75 दिन की मेहनत बेकार हो जाएगी, इसलिए किसान बोर्ड बैठक में प्रस्ताव जाने पर ही कुछ बात मान सकते हैं।
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किसानों की ओर 5 लोग ही हुए शामिल
40 किसानों का प्रतिनिधिमंडल सीईओ से वार्ता करने आया था, लेकिन सीईओ ने 5 किसानों को ही आने की बात कही। ऐसे में सुखवीर पहलवान, सुधीर चौहान, राजेंद्र, पवन त्यागी समेत 5 किसान मौजूद रहे। इसके अलावा बैठक में एसीईओ प्रवीण मिश्रा, ओएसडी इंद्र प्रकाश के अलावा एडीसीपी रणविजय सिंह भी उपस्थित थे।

प्राधिकरण ने दिया समस्याओं को दूर करने का आश्वासन
नोएडा। प्राधिकरण ने सोमवार देर शाम प्रेसनोट जारी करते हुए बताया कि किसानों के साथ बैठक हुई थी। किसानों ने 1997 से 10 फीसदी आबादी देने की मांग की थी। इसके अलावा आबादी के मामले में प्रति बालिग सदस्य को 1000 वर्गमीटर जमीन बतौर आबादी छोड़ने आदि समेत अन्य मुद्दों पर बात की गई थी। इस पर सीईओ ने बताया कि किसानों को 10 फीसदी भूखंड या उसकी समकक्ष राशि को लेकर शासन से पहले ही निर्णय लिया जा चुका है, लेकिन एक बार फिर इस मुद्दे को शासन तक भेजा जाएगा। आबादी नियमावली 2011 को संशोधित करते हुए प्रति बालिग सदस्य 1000 वर्गमीटर आबादी छोड़े जाने से संबंधित काश्तकार पात्र होता है तो ऐसे प्रकरण को केस टू केस हल किया जाएगा। पुश्तैनी और गैर पुश्तैनी प्रकरण को साल-2014 के बाद से खत्म कर दिया गया है। किसान कोटा प्रकरण को देखते हुए कुछ दिन पहले ही किसानों के भूखंडों का आवंटन ड्रॉ के माध्यम से कराया जा चुका है। चार साल में 688 किसानों को अर्जित भूमि के सापेक्ष में 852 भूखंड दिए जा चुके हैं, जबकि 5 फीसदी भूखंड के एवज में 175 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। ब्यूरो
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